इंडोनेशिया में 5,000 वर्ष पुरानी विष्णु मूर्ति मिलने का ग़लत दावा फिर वायरल

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ट्विटर और फ़ेसबुक यूज़र्स ने पानी के अंदर रखी मूर्तियों की कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए दावा किया कि इंडोनेशिया में हिन्दू देवता विष्णु की 5,000 साल पुरानी मूर्ति मिली है. ये दावा ग़लत है: मंदिर बताई जाने वाली ये जगह इंडोनेशिया के बाली द्वीप के आसपास मूर्तियों का गार्डन है जिसे 2005 में स्कूबा डाइवर्स ने कोरल संरक्षण परियोजना के अंतर्गत बनाया था.

ये तस्वीरें एक ट्विटर यूज़र ने यहां शेयर की जिसे 350 से ज़्यादा बार रीट्वीट और 1,200 से ज़्यादा बार लाइक किया गया है. यही दावा यहां हिंदी में भी शेयर किया गया.

अधिकतर यूज़र्स तीन तस्वीरें शेयर कर रहे हैं. पहली तस्वीर में एक मूर्ति लेटी हुई अवस्था में दिखाई दे रही है. दूसरी तस्वीर में मूर्ति बैठी हुई अवस्था में है और इसके चारों तरफ़ कमल की पंखुड़ियों जैसा ढांचा बना हुआ है. तीसरी और आखिरी तस्वीर में भी दूसरी तस्वीर वाली मूर्ति ही पास से दिखाई गयी है.

भ्रामक ट्विटर पोस्ट का स्क्रीनशॉट

इसी कैप्शन के साथ कई फ़ेसबुक यूज़र्स ने ये तीनों तस्वीरें यहां, यहां, यहां और यहां शेयर की. पहली तस्वीर के साथ भ्रामक दावे वाला एक फ़ेसबुक पोस्ट नीचे देख सकते हैं.

भ्रामक फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

सोशल मीडिया के साथ कुछ न्यूज़ आउटलेट्स ने भी ये दावा पोस्ट किया और लोगों में भ्रम फैलाया जिनमें उड़ीसा पोस्ट, पत्रिका और दैनिक जागरण भी शामिल हैं.

लेकिन ये दावा ग़लत है.

इन तस्वीरों का गूगल पर साधारण-सा रिवर्स सर्च करने पर इनके बारे में कई वेबसाइइट्स पर जानकारी मिलती है. दोनों मूर्तियों की तस्वीरें इंडोनेशिया की ही हैं पर न ही 5,000 हज़ार साल पुरानी है और न ही ये हिन्दू देवता विष्णु की मूर्तियां हैं.

पहली तस्वीर जिसमें मूर्ति अर्धशयन अवस्था में है, वो फ़ोटो स्टॉक वेबसाइट शटरस्टॉक पर भी मौजूद है और यहां बताया गया है कि ये गौतम बुद्ध की मूर्ति है. Alamy पर भी इस तस्वीर को बुद्ध की मूर्ति बताई गयी और इसे खींचने वाले कॉलिन मार्शल ने बताया है कि ये इंडोनेशिया के बाली में स्थित कुबु ज़िले के स्कूबा सेराया रेसॉर्ट में बने कोरल गार्डन में है. इसे 'रिक्लाइनिंग बुद्धा' के नाम से भी जाना जाता है.

मार्शल ने इस कोरल गार्डन में लगी और भी मूर्तियों की तस्वीरें Alamy पर यहां और यहां अपलोड की हैं.

शटरस्टॉक का स्क्रीनशॉट

शटरस्टॉक पर इसे रिक्लाइनिंग बुद्धा की मूर्ति बतायी गयी है वहीं सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर को खींचने वाले डेविड लेज़र ने कैप्शन में इसे विष्णु की मूर्ति बताई है.

हमने इस बारे में डेविड से बात की. उन्होंने कहा, “मुझे मेरे डाइविंग गाइड ने यही बताया कि ये विष्णु की मूर्ति है और मैंने अपने ब्लॉग पर यही लिखा.” उन्होंने आगे कहा, “मैं दावे से कह सकता हूं कि ये मूर्ति 1990 या 2000 के आस-पास लगायी गयी है. ये स्कूबा डाइवर्स के लिए ही है ताकि तट के पास डाइविंग का और भी आनंद लें सकें.”

दूसरी और तीसरी तस्वीर में कोरल गॉडेस की मूर्ति लगी है. इसका रिवर्स इमेज सर्च करने पर ये हमें फ़ोटो स्टॉक वेबसाइट Alamy पर मिली. यहां बताया गया है कि ये मूर्ति इंडोनेशिया के बाली में स्थित पेमुटेरन तट के पास पानी के अंदर रखी गयी है. यहां मूर्ति को कोरल गॉडेस बताया गया है.

द मरीन फ़ाउंडेशन के मुताबिक, कोरल गॉडेस की ये मूर्ति 2011 में लगायी गयी थी और ये बायो रॉक परियोजना का हिस्सा है. पेमुटेरन की बायो रॉक परियोजना की वेबसाइट पर भी ये तस्वीर देखी जा सकती है. द मरीन फ़ाउंडेशन ने बायो रॉक परियोजना की टीम के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम किया है. बता दें की इंडोनेशिया में समुद्री जीवन और संसाधनों के संरक्षण के लिए कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं. इसमें पेमुटरनबायो रॉक परियोजना भी शामिल है जिसे 2000 में शुरू किया गया था.

द मरीन फ़ाउंडेशन की वेबसाइट स्क्रीनशॉट

इससे पहले भी ये तस्वीरें और पानी में मूर्तियों के कुछ अन्य विज़ुअल्स ऐसे ही दावों के साथ शेयर किये जा चुके हैं. सोशल मीडिया यूज़र्स ने पानी में दिख रहे मूर्तियों का एडिट किया हुआ एक वीडियो शेयर करते हुए यही दावा किया था.

लेकिन मालूम चला कि वो वीडियो इंडोनेशिया के बाली में समंदर के अंदर बना एक अंडरवाटर टेम्पल गार्डन है जिसे पॉल टर्ली और क्रिस ब्राउन की टीम ने 2005 में बनाया था. उनका यूट्यूब वीडियो नीचे देख सकते हैं जहां मूर्तियों को बेहद करीब से दिखाया जा रहा है.

भ्रामक दावे वाला वीडियो 8 मिनट 18 सेकंड का है जबकि ओरिजिनल वीडियो 10 मिनट का है.

AFP ने अपनी 2018 की अपनी रिपोर्ट में पॉल टर्ली से बात की थी और उन्होंने बताया था कि यूट्यूब पर उनके वीडियो में जो मूर्तियां दिख रही हैं वही रीफ़ गार्डन का हिस्सा हैं. वीडियो में दिख रही बुद्ध की मूर्ति रिक्लाइनिंग बुद्धा की मूर्ति से बिल्कुल अलग है.

ग़ौर करें कि अंडर वॉटर रीफ़ प्रोजेक्ट पेमुटरन में है और स्कूबा सेराया रेसॉर्ट से करीब 122 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है. गूगल मैप पर दोनों जगहों की दूरी देखी जा सकती है.

हालांकि पॉल के रीफ़ गार्डन में हिन्दू देवताओं की मूर्तियां लगी हैं जिसके दो कारण हैं. पहला, इंडोनेशिया के बाली द्वीप में हिन्दू बड़ी संख्या में हैं और दूसरा, रीफ़ गार्डन आस-पास के लोगों और संस्कृति से जुड़ा होने के मकसद से.

पॉल ने 5,000 साल पुरानी मूर्तियों की खोज वाले दावे को फ़र्ज़ी बताया था. पाठक गौर करें कि हाल में वायरल हुई रिक्लाइनिंग बुद्धा और कोरल गॉडेस की मूर्तियां पॉल टर्ली के रीफ़ गार्डन की नहीं हैं. ये तीनों अलग-अलग जगहों पर हैं. इंडोनेशिया में कई जगहों पर ऐसी ही परियोजनाएं देखने को मिलती हैं जिनमें हिन्दू देवताओं और बौद्ध धर्म से जुड़ी मूर्तियों को सौंदर्य बढ़ाने के लिए लगाया जा रहा है. इसका एक अन्य उदहारण नुसा पेनिडा है.