बाढ़ग्रस्त बांग्लादेश में नमाज़ पढ़े जाने का वीडियो भारत का बताकर ग़लत दावे के साथ शेयर

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फ़ेसबुक और ट्विटर पर एक वीडियो बहुत वायरल है जिसे शेयर करते हुए दावा किया गया कि भारत में मुस्लिम समुदाय के लोग गंगा में खड़े होकर नमाज़ पढ़ रहे हैं जो कि हिन्दुओं में पवित्र नदी मानी जाती है. ये दावा ग़लत है: ये वीडियो बांग्लादेश का है जहां लोग बाढ़ग्रस्त इलाके में नमाज़ अता कर रहे हैं.

ये वीडियो फ़ेसबुक पर 28 जुलाई, 2021 को यहां शेयर किये जाने के बाद 7,000 बार शेयर किया जा चुका है.  

इसके साथ लिखा गया, "यह एक योजना है कि एकान्त स्थान पर गंगा नदी में अज़ान लगा कर कब्जा किया जये."

आगे लिखा गया, "इनकी योजना के अनुसार गंगा नदी के किनारे किनारे पर अस्थाई निवास बनाये जाय बाद में यह स्थाई निवास में परिवर्तन कर दिया जायेगा. क्यों कि विश्व की अगली लड़ाई पानी के लिए होनी है. और यह मॉ गंगा को आबे जमजम बनाए जाने का ऐक्सपेरिमैंट शुरू हो गया है!"

गंगा भारत से गुज़रने वाली वो नदी है जिसे हिन्दू धर्म में पवित्र माना जाता है. मुस्लिम धर्म में ईश्वर की आराधना को नमाज़ के तौर पर जाना जाता है. आब-ए ज़मज़म इस्लाम में पवित्र कुंड माना जाता है जो मक्का के मस्जिद-अल-हराम में स्थित है.  

8 अगस्त, 2021 को लिया गया भ्रामक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

यही दावा फ़ेसबुक पर यहां, यहां और यहां; और ट्विटर पर यहां, यहां और यहां किया गया.

लेकिन ये दावा ग़लत है.

इस वीडियो का रिवर्स इमेज सर्च और फिर कीवर्ड सर्च करने पर हमें ये 25 मई, 2020 के एक फ़ेसबुक पोस्ट में यहां मिला. 

इस पोस्ट में वीडियो के साथ बंगाली कैप्शन लिखा है जिसका हिंदी में मतलब है, "खुलना कोयरा में ईद का नमाज़ पानी में खड़े होकर अता करते हुए." 

 खुलना जिला बांग्लादेश में स्थित है.

नीचे हालिया भ्रामक पोस्ट (दाएं) और फ़ेसबुक पर मिले पुराने वीडियो (दाएं) की तुलना देख सकते हैं:

हालिया पोस्ट और पुराने फेसबुक पोस्ट की तुलना

इस बारे में गूगल पर कीवर्ड सर्च करने पर बांग्लादेशी समाचारपत्र ढाका ट्रिब्यून की 25 मई, 2020 की एक रिपोर्ट मिली जिसमें वीडियो के विज़ुअल से मिलती हुई तस्वीर छापी गयी है.

इस तस्वीर के साथ कैप्शन है, "खुलना के कोयरा उपज़िला में 25 मई, 2020 को स्थानीय लोग ईद के मौके पर एकसाथ पानी में खड़े हुए." 

इस रिपोर्ट में बताया गया है, "खुलना के कोयरा उपज़िला में अम्फ़ान तूफ़ान के बाद भारी बाढ़ और तटबंध टूटने के कारण लोगों ने बाढ़ग्रस्त इलाके में पानी में खड़े होकर ईद मनाया."

मई 2020 में अम्फ़ान तूफ़ान ने बांग्लादेश के कई तटीय ज़िलों को बुरी तरह प्रभावित किया था. 

नीचे भ्रामक पोस्ट में दिख रहे वीडियो (बाएं) और ढाका ट्रिब्यून में छपी तस्वीर (दाएं) के स्क्रीनशॉट की तुलना की गयी है:

भ्रामक पोस्ट के विज़ुअल और ढाका ट्रिब्यून पर छपी तस्वीर की तुलना

बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट्स डेली आजकेर न्यूज़, डेली सन और बांग्ला न्यूज़ मिरर ने भी इस घटना के बारे में रिपोर्ट किया था.

आजकेर न्यूज़ ने 25 मई, 2020 को अपनी रिपोर्ट में बताया था, "खुलना कोयरा उपज़िला में अम्फ़ान तूफ़ान ने चावल और सब्ज़ी के खेतों को डुबा दिया..." 

रिपोर्ट में आगे जानकारी दी गयी है, "हज़ारों निवासी ईद-उल-फ़ितर के मौके पर टूटे हुए तटबंधों की खुद मरम्मत करने के लिए आगे बढे. उन्होंने घुटनों तक पानी में खड़े होकर प्रार्थना की. इतनी बड़ी संख्या में कोयरा नदी के दूसरे तटबंध पर नमाज़ पढ़ा गया." 

इस रिपोर्ट में बांग्लादेश के खुलना में जिस जगह की बात हो रही है उसे गूगल स्ट्रीट व्यू पर भी देखा जा सकता है.