पोलैंड में 2020 में आसमान में दिखी चमकीली रोशनी का वीडियो भारत का बताकर वायरल

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सोशल मीडिया पोस्ट में एक वीडियो को हज़ारों बार देखा गया है, जिसे शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह सितंबर 2022 में उत्तर प्रदेश में रात के आसमान में चमकती हुई एक अजीब रोशनी की शृंखला दिखाता है. जबकि उस समय उत्तर प्रदेश में लोगों द्वारा आसमान में ऐसी ही रोशनी देखने की खबरें थीं, जिसकी काफ़ी चर्चा भी रही मगर वायरल वीडियो को गलत संदर्भ में शेयर किया गया है. यह वीडियो 2020 से ही यूट्यूब पर मौजूद है. मूल क्लिप को रिकॉर्ड करने वाले यूज़र ने AFP को बताया कि यह स्टारलिंक उपग्रहों को दिखाता है, जो मध्य यूरोप में उच्च गति की इंटरनेट सेवा प्रदान करते हैं.

लगभग 15 सेकंड के इस वीडियो को - जिसमें एक साथ तीन अलग क्लिप को एडिट कर जोड़ा गया है - फ़ेसबुक पर 13 सितंबर, 2022 को शेयर किया गया है.

इसे 7,100 से ज़्यादा बार देखा जा चुका है.

वीडियो के कैप्शन में लिखा है: “फर्रुखाबाद ब्रेकिंग : जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में आसमान में चमकीली रोशनी के कतारबद्ध गोलों को देखने से अचरज में पड़े लोग. वही इसका वीडियो व फोटो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं.

शाम करीब 7:30 बजे की तरफ आसमान में कुछ छोटे-छोटे बिंदु के समान चमकीली चीज तेजी से निकलते हुए दिखे. स्थानीय लोगों ने इसको अपने मोबाइल में कैद किया जिसके बाद यह जनपद में कौतूहल का विषय बन गया और जमकर वायरल हो रहा है.”

“5 मिनट तक लोगों ने बताया कि ट्रेन की डिब्बों की तरह सफेद लाइटें जलती हुई दिखाई दी और कुछ ही देर में आंखों के सामने से गायब हो गई. फर्रुखाबाद जनपद का मामला.”

गलत दावे से शेयर की जा रहा फ़ेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट, 20 सितंबर 2022

इसी तरह के दावे के साथ वीडियो को फ़ेसबुक पर यहां और यहां शेयर किया गया है जहां इसे हज़ारों बार देखा गया है.

पोस्ट पर यूज़र्स के कमेंट्स से लगता है कि उन्होंने वायरल दावे को सच माना है.

एक यूज़र ने कमेंट किया, "यहां तक कि मैंने इसे कल भी देखा था.”

एक अन्य ने लिखा: "ऐसा न केवल फर्रुखाबाद बल्कि आसपास की कई जगहों में भी देखा गया."

उत्तर प्रदेश में हाल ही में लोगों द्वारा आकाश में चमकदार रोशनी की एक स्ट्रिंग देखने की सूचना के बाद ही कई पोस्ट ऑनलाइन शेयर हुए हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार ये स्टारलिंक उपग्रह कक्षा में जा रहे थे.

स्टारलिंक, अरबपति टेक उद्यमी एलन मस्क के स्पेसएक्स द्वारा संचालित एक उपग्रह इंटरनेट सर्विस है. स्पेसएक्स ने 10 सितंबर को 34 स्टारलिंक उपग्रहों को कक्षा में लॉन्च किया था.

हालांकि, वीडियो को गलत संदर्भ में शेयर किया गया है.

पोलैंड के ऊपर उपग्रह

रिवर्स इमेज और कीवर्ड सर्च में हमें इस वीडियो का लंबा वर्ज़न यूट्यूब पर मिला जिसे 11 अगस्त, 2020 को अपलोड किया गया था.

वायरल पोस्ट की क्लिप का पहला भाग यूट्यूब वीडियो के 18-सेकंड के टाइम स्टैम्प से मेल खाता है; दूसरा भाग इसके 38-सेकंड के टाइम स्टैम्प से मेल खाता है, जबकि तीसरा भाग इसके 1 मिनट 15-सेकंड के टाइम स्टैम्प से मेल खाता है.

नीचे फ़ेसबुक पोस्ट (बाएं) और यूट्यूब वीडियो (दाएं) के स्क्रीनशॉट की तुलना है:

यूट्यूब चैनल Nocne Niebo पर दो मिनट 28 सेकंड के वीडियो की हेडलाइन है; "पोलैंड के ऊपर स्टारलिंक उपग्रह, स्टारलिंक ट्रेन."

चैनल एक यूज़र द्वारा चलाया जाता है जिसने अपना नाम "ज़बीस्ज़ेक" बताया है.

उन्होंने AFP को बताया: "यह वीडियो 10 अगस्त, 2020 को मध्य यूरोप में शूट किया गया था. मैंने अपने चैनल पर सभी सैटेलाइट के पास व्यक्तिगत रूप से रिकॉर्ड किए हैं.”

"हालांकि वर्तमान में ये उपग्रह भारत के ऊपर उड़ रहे हैं, लेकिन लोग पोलैंड से मेरा पुराना वीडियो चुरा रहे हैं."

मिशिगन विश्वविद्यालय में खगोल विज्ञान विभाग के एक शोधकर्ता पैट्रिक सीट्जर ने AFP को बताया कि ये क्लिप वास्तव में स्टारलिंक उपग्रहों को दिखाती है.

उन्होंने कहा, "वीडियो में इन उपग्रहों को लॉन्च के ठीक बाद देखा जा सकता है, जब वे कम कक्षा में एक साथ बहुत करीब होते हैं. वर्तमान में इस कक्षा में 3,000 से अधिक स्टारलिंक हैं."

वायरल पोस्ट में शेयर किये गया वीडियो यूके के नेशनल स्पेस सेंटर की वेबसाइट में यहां और स्पेस डॉट कॉम वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में प्रकाशित स्टारलिंक उपग्रहों की तस्वीरों से भी मेल खाता है.

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