बांग्लादेश का पुराना वीडियो पश्चिम बंगाल चुनावी हिंसा से जोड़कर शेयर किया गया

पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा में कम से कम पांच लोगों की मौत हुई है लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के साथ किया गया दावा कि ये उपद्रवियों द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर में लगाई गयी आग को दिखाता है, गलत है. वीडियो चुनाव परिणाम आने से कई महीने पहले भी वायरल हुआ था और असल में पड़ोसी बांग्लादेश में बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगी आग का है. इसका पश्चिम बंगाल चुनाव से कोई सम्बन्ध नहीं है.  

मई 4, 2026 को X पर शेयर किए गए वीडियो में एक घर भीषण आग की चपेट में दिखाई देता है, साथ में आसपास मौजूद लोग घबराकर चिल्लाते नज़र आते हैं. 

वीडियो का कैप्शन है, "पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने ममता बनर्जी के घर और टीएमसी कार्यालय में आग लगा दी."

ममता बनर्जी 15 साल तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रहीं, लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उनकी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एकतरफ़ा हराकर सत्ता से बाहर कर दिया (आर्काइव्ड लिंक).

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट जिस पर एएफ़पी द्वारा X साइन जोड़ा गया है

यह वीडियो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर इसी तरह के दावे से शेयर किया गया. चुनाव परिणामों के बाद राज्य में हुई हिंसा में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई (आर्काइव्ड लिंक). 

मारे गए लोगों में पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के एक करीबी सहयोगी भी शामिल हैं. 

विपक्षी नेताओं ने भी भाजपा कार्यकर्ताओं पर पार्टी कार्यालयों में आग लगाने का आरोप लगाया लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो पश्चिम बंगाल का नहीं है (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां). 

सिलहट का फ़ुटेज

गूगल पर वायरल वीडियो के कीफ़्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च करने पर यही फ़ुटेज भारतीय समाचार चैनलों News 9 Live और NewsX Live की जनवरी 16 की वीडियो रिपोर्ट्स में पब्लिश की गयी मिली (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां). 

इन रिपोर्ट्स में बताया गया कि वीडियो बांग्लादेश के सिलहट में एक हिंदू स्कूल शिक्षक के घर पर हुए हमले का है. 

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गलत दावे की पोस्ट (बायें) और यूट्यूब वीडियो के स्क्रीनशॉट की तुलना

यह वीडियो उस समय वायरल हुआ जब मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में चुनाव से पहले धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाएं बढ़ गई थीं. बांग्लादेश में बौद्ध, हिंदू और ईसाई समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख संगठन ने कहा था कि दिसंबर 2025 में उनके सदस्यों के खिलाफ़ कम से कम 51 घटनाएं हुईं, जिनमें 10 हत्याएं शामिल थीं (आर्काइव्ड लिंक). 

2001 और 2014 के चुनावों में हुई बड़े पैमाने पर हिंसा के बाद बांग्लादेश में चुनावों के दौरान अल्पसंख्यकों में डर का माहौल रहता है. हिंदुओं को अक्सर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग, जो अब प्रतिबंधित है, के समर्थक के रूप में निशाना बनाया जाता रहा है. जुलाई 2024 आंदोलन के बाद हसीना को सत्ता से हटना पड़ा (आर्काइव्ड लिंक)

हालांकि, गूगल पर आगे कीवर्ड सर्च करने पर एक बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट मिली, जिसने भारतीय मीडिया की रिपोर्टों का खंडन किया है  (आर्काइव्ड लिंक). 

रिपोर्ट में कहा गया कि सिलहट में आग 15 जनवरी को लगी थी और इसका कारण शॉर्ट सर्किट था. रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वीडियो को गलत दावों के साथ फैलाया गया, जिसमें कहा गया कि आग राजनीतिक या धार्मिक कारणों से लगाई गई थी. 

लेकिन घर के मालिक, सिलहट के हिंदू निवासी बिकाश कुमार देव, ने मीडिया को बताया था कि यह एक दुर्घटना थी. उन्होंने AFP को भी यही बताया. 

स्कूल शिक्षक कुमार ने 12 मई को AFP से कहा, "हादसे के बाद हमारे मुस्लिम पड़ोसी मदद के लिए आए और घर की मरम्मत में भी सहयोग किया. सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा गलत है."

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रेस विंग ने भी इस दावे का खंडन किया था कि हिंदू शिक्षक के घर में जानबूझकर आग लगाई गई (आर्काइव्ड लिंक). 

एएफ़पी इससे पहले भी पश्चिम बंगाल चुनावों से जुड़े कई झूठे दावों को फ़ैक्ट चेक कर चुका है.

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