रामकेश मीणा को भगवा झंडा उतारने के लिए नहीं पीटा गया, पुराना वीडियो वायरल

कॉपीराइट AFP 2017-2022. सर्वाधिकार सुरक्षित.

भीड़ द्वारा एक शख्स की पिटाई का वीडियो दर्जनों लोगों ने शेयर करते हुए दावा किया कि लोग राजस्थान के निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा को भगवा झंडा उतारकर फाड़ने के लिए पीट रहे हैं. ये दावा भ्रामक है; इस वीडियो में रामकेश मीणा ही हैं लेकिन यह वीडियो 2018 का है और हालिया घटना से सम्बंधित नहीं है.

24 जुलाई को किये गए एक फ़ेसबुक पोस्ट के साथ कैप्शन में लिखा गया, “राजस्थान में भगवा ध्वज उतारने वाले रामकेश मीणा विधायक को भगवा प्रेमियों ने दौड़ा दौड़ा कर पीटा.”

इस धुंधले वीडियो में देखा जा सकता है कि हाथ में लाठी-डंडा लिए भीड़ सफ़ेद कपड़ा पहने एक शख्स को खदेड़ रहे हैं. ये वीडियो 10,000 से ज़्यादा बार देखा जा चुका है.

भ्रामक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

ये वीडियो ट्विटर पर यहां और यहां, और यूट्यूब पर यहां और यहां शेयर किया गया.

दरअसल, 22 जुलाई को जयपुर में आमागढ़ किले पर लगे एक भगवा झंडे को कुछ लोगों ने उतार कर फाड़ दिया. हिन्दू धर्म से जुड़े भगवा झंडे को जब फाड़ा गया तो रामकेश मीणा मौके पर ही मौजूद थे जिसके बारे में रिपोर्ट आप यहां पढ़ सकते हैं.

रामकेश मीणा राजस्थान के मीणा समुदाय से आते हैं और इस समुदाय के लिए आमागढ़ किला उनकी धरोहर है. भाजपा समर्थन प्राप्त हिन्दू संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने किले पर भगवा झंडा फहरा दिया था जिससे स्थानीय मीणा समाज में तनाव बढ़ना शुरू हुआ.

रामकेश मीणा ने एक न्यूज़ चैनल से भी इस घटना के बारे में बात की और कहा कि हिन्दू संगठन RSS और बजरंग दल ने पहले किले में लगी मूर्ति तोड़ी और बाद में ये भगवा झंडा लगाया. उन्होंने ये इंटरव्यू ट्वीट भी किया था.  

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक भाजपा ने इस 22 जुलाई की घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी और मामले में 2 लोगों के खिलाफ़ शिकायत भी दर्ज की गयी थी. 

लेकिन फ़ेसबुक पोस्ट में किया गया दावा भ्रामक है.

इस बाबत गूगल पर सर्च करने पर हमें न्यूज़18 की 7 अप्रैल, 2018 की एक रिपोर्ट मिली जिसमें वायरल हो रहे वीडियो का एक स्क्रीनशॉट पब्लिश किया गया है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे देश में दलित समुदाय द्वारा किये जा रहे आंदोलन के समय एक भीड़ ने रामकेश मीणा की पिटाई कर दी थी. हालांकि वो भी आंदोलन का हिस्सा थे लेकिन भीड़ के उग्र होने के बाद जब वो लोगों को शांत करने पहुंचे तो हिंसक भीड़ ने उनपर ही हमला कर दिया और उनके कपड़े फाड़ दिए.

न्यूज़18 की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

इंडिया टुडे के मुताबिक मार्च 2018 में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक बयान के विरोध में दलित समाज ने पूरे देश में आंदोलन किया था. ये वीडियो उसी समय का है. जब इंडिया टुडे रामकेश मीणा से इसपर बात करने पहुंचा तो उन्होंने इसपर कुछ कहने से इनकार कर दिया. 

रामकेश मीणा कांग्रेस से पूर्व विधायक रह चुके हैं लेकिन आंदोलन के समय वो सत्ता में नहीं थे. उन्होंने 2018 में निर्दलीय रहकर चुनाव लड़ा और वर्तमान में राजस्थान के गंगापुर से विधायक हैं. 

नीचे भ्रामक पोस्ट (बाएं) और न्यूज़18 के स्क्रीनशॉट (दाएं) की तुलना देख सकते हैं जिससे मालूम पड़ता है कि दोनों एक ही मौके के वीडियो हैं.

भ्रामक पोस्ट और न्यूज़18 के स्क्रीनशॉट की तुलना