Delhi's Chief Minister Arvind Kejriwal. ( AFP / MONEY SHARMA)

भारत में ऊर्जा संकट के चलते कोयला दान का भ्रामक विज्ञापन वायरल

कॉपीराइट AFP 2017-2022. सर्वाधिकार सुरक्षित.

भारत में ऊर्जा संकट के चलते दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का लोगों से कोयला दान करने की गुहार दिखाता एक विज्ञापन कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर काफी शेयर हो रहा है. यह विज्ञापन फ़र्ज़ी है: इसे दिल्ली सरकार द्वारा अखबारों में प्रकाशित एक पुरानी संवेदना संदेश को फोटोशॉप द्वारा एडिट कर वायरल ग़लत दावे के साथ वायरल किया गया है. 

इस विज्ञापन की तस्वीर को यहां 12 अक्टूबर, 2021 को फ़ेसबुक पर शेयर किया गया था. 

इसे देखकर ऐसा लगता है कि विज्ञापन किसी समाचार के पूरे पेज का है.

वायरल पोस्ट के कैप्शन में लिखा है, "कोयला दान करके बिजली की कमी के बीच दिल्ली सरकार की मदद करें."

"आपका कोयले का एक तसला पूरे राज्य में अंधेरे को दूर रखने में मदद कर सकता है."

वायरल विज्ञापन में कोयले से भरा तसला और साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की एक तस्वीर दिखाई दे रही है:

भ्रामक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी के कारण अक्टूबर 2021 में राजधानी दिल्ली सहित कई भारतीय राज्यों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है. 

बिल्कुल यही तस्वीर यहां, यहां और यहां फे़सबुक पर शेयर की गई है;  इसके अलावा यहां और यहां ट्विटर पर भी शेयर हुई है.

हालांकि, इस तस्वीर को को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है.

गूगल पर कीवर्ड सर्च करने पर भारतीय पोर्टल फ़ॉरवर्ड प्रेस की वेबसाइट पर 23 जुलाई, 2021 को प्रकाशित एक लेख मिला. 

यह रिपोर्ट उन भारतीय सफ़ाई कर्मचारियों के बारे में है जिनकी कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद मृत्यु हो गई. 

लेख की हेडलाइन में लिखा है: “स्वच्छता कर्मियों के परिवारों की दुर्दशा जिन्होंने कोविड-19 के कारण दम तोड़ दिया.”

इस लेख में 9 जुलाई, 2021 के अख़बार में छपे वायरल विज्ञापन की मूल तस्वीर शामिल है:

फ़ॉरवर्ड प्रेस में पोस्ट किया गया असली विज्ञापन

मूल विज्ञापन में लिखा है: “दिल्ली सरकार उन परिवारों के साथ है जिन्होंने अपने प्रियजनों को कोविड से खो दिया.” 

जबकि वायरल तस्वीर में एडिट कर अलग से कोयले की तस्वीर और एक भ्रामक कैप्शन जोड़ दिया गया.

अरविंद केजरीवाल ने कोविड-19 से मरने वालों के परिवारों की मदद के लिए एक वित्तीय सहायता योजना शुरू की थी. 

इस योजना को यहां 6 जुलाई, 2021 को द हिन्दुस्तान टाइम्स द्वारा रिपोर्ट भी किया गया था.

उसी विज्ञापन का ई-पेपर  इस अख़बार की वेबसाइट पर भी प्रकाशित किया गया था.

भ्रामक पोस्ट (L) और मूल विज्ञापन (R) में एडिट कर बदली गई तस्वीर की तुलना भी नीचे दी गई है:

भ्रामक विज्ञापन और हिंदुस्तान अख़बार में छपी असली विज्ञापन के स्क्रीनशॉट की तुलना

बिल्कुल वही विज्ञापन अंग्रेजी, गुजराती और पंजाबी में भी प्रकाशित हुआ था.