गाज़ियाबाद का वीडियो दिल्ली का बता ग़लत दावे के साथ वायरल

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फ़ेसबुक और ट्विटर पर एक वीडियो हज़ारों बार देखा जा चुका है जिसे शेयर करते हुए दावा किया गया है कि "राजधानी दिल्ली में एक प्राथमिक विद्यालय को मदरसे में तब्दील कर दिया गया है." ये दावा ग़लत है: ये वीडियो उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद का है, न कि दिल्ली का. स्थानीय पुलिस और स्कूल की प्राचार्या ने AFP को बताया कि स्कूल में रह रहे एक मुस्लिम परिवार के नमाज़ की वीडियो को ग़लत सन्दर्भ के साथ शेयर किया गया है.

ये वीडियो 29 नवंबर को फ़ेसबुक पर यहां शेयर किया गया. इसे अबतक 16,000 से ज़्यादा बार देखा जा चुका है.

इसके कैप्शन में लिखा है, "स्कूल को मद्रेसा बना दिया."

वीडियो पर टेक्स्ट लिखा हुआ देखा जा सकता है जो कहता है, "दिल्ली में सरकारी स्कूलों को रोहिंग्याओं ने माद्रेसा बना दी."

नीचे लिखा हुआ है, "केजरी के दिल्ली में सब कुछ मुमकिन है. ऐसा क्यों?"

वीडियो में कुछ पुलिसवाले एक कक्षा में घुसकर उन्हें बाहर निकल रहे हैं जहां कुछ नाबालिग़ भी देखे जा सकते हैं.

अधिकारी एक महिला से पूछ रहे हैं कि क्या उन्होंने बच्चों को कक्षा में कुरान पढ़ने से पहले प्रबंधन से अनुमति ली थी? इसके बाद उन्हें मौके पर प्रतिबंधित मांस ढूंढने की कोशिश करते हुए देखा जा सकता है.

बता दें कि उत्तर प्रदेश में गौ मांस पर रोक लगा हुआ है.

Screenshot of the misleading Facebook post taken on December 1, 2021

यही वीडियो हिंदी और अंग्रेज़ी कैप्शंस के साथ फ़ेसबुक पर यहां, यहां, यहां और यहां; और ट्विटर पर यहां और यहां शेयर किया गया.

ये दावे ग़लत है. 

फ़ेसबुक पर कीवर्ड सर्च करने पर हमें यही वीडियो बेहतर क्वालिटी में मिला जिसे 19 नवंबर, 2021 को पोस्ट किया गया था.

इसके कैप्शन में लिखा है, "आज विजय नगर गाजियाबाद में संजीवनी अस्पताल के सामने प्राथमिक स्कूल मे कुछ मुस्लिम जेहादी मांस बना कर नवाज पड़ रहे थे. मैने और हमारी टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया."

भ्रामक पोस्ट (बाएं) और 19 नवंबर के फेसबुक वीडियो (दाएं) के वीडियो की स्क्रीनशॉट की तुलना

वीडियो के अंत में भी वीडियो में स्कूल का नाम लिखा हुआ नज़र आता है, "प्राथमिक विद्यालय मिर्ज़ापुर". मिर्ज़ापुर गाज़ियाबाद के विजय नगर में एक गांव है जो दिल्ली से करीब 40 किलोमीटर दूर है. 

वीडियो में दिखते स्कूल के नाम का स्क्रीनशॉट

स्थानीय पुलिस और स्कूल की प्रिंसिपल ने AFP को बताया कि वीडियो में एक मुस्लिम परिवार निजी तौर से किसी भी आम परिवार की तरह पूजा-पाठ कर रहे थे.

स्थानीय पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी योगेंद्र मालिक ने कहा, “ये घटना मिर्ज़ापुर प्राथमिक विद्यालय की है. ये कोई आवासीय स्कूल नहीं है लेकिन परिवार यहां मैनेजमेंट की अनुमति से सालों से रह रहा था.”

उन्होंने आगे कहा, “परिवार के बच्चे स्वस्थ नहीं रहते थे इसलिए उन्होंने ये धार्मिक कर्मकांड किये थे जिसमें कुरान-ख़्वानी शामिल है.”

स्कूल की प्राचार्या अर्चना परमार ने AFP को बताया, “ये परिवार किसी भी आम परिवार की तरह प्रार्थना कर रहा था.”