कराची में विस्फोट का पुराना वीडियो "तालिबानी हमला" बताकर गलत दावे से शेयर किया गया
- प्रकाशित 2 जनवरी 2026, 08h52
- 3 मिनट
- द्वारा Chayanit ITTHIPONGMAETEE, एफप थाईलैंड
- अनुवाद और अनुकूलन Akshita KUMARI
अक्टूबर में हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद सीमा पर बढ़ते संघर्ष के बाद पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच तनाव अभी भी जारी है, मगर सोशल मीडिया पर आग की लपटों में घिरे वाहनों का वीडियो, जैसा दावा किया गया है, सीमा पास तालिबान द्वारा पाकिस्तानी सेना पर किये हमले को नहीं दिखाता. यह वीडियो अक्टूबर 2024 के न्यूज़ रिपोर्ट्स में कराची हवाई अड्डे के पास हुए विस्फोट के दौरान शेयर किया गया था जिसमें दो चीनी नागरिक मारे गए थे.
सोशल मीडिया साइट X पर 1 दिसंबर, 2025 को एक वीडियो शेयर करते हुए आंशिक कैप्शन दिया गया: "टीटीपी विद्रोहियों ने खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू ज़िले के आज़ाद मंडी बाज़ार के पास पाकिस्तान आर्मी के काफिले पर घात लगाकर हमला किया."
वीडियो में सड़क पर कई वाहनों को जलते हुए देखा जा सकता है, जिसके आस-पास सुरक्षाकर्मी चल रहे हैं.
यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और X पर कई भाषाओं में शेयर किया गया था.
फ़ुटेज ऐसे समय वायरल हुआ जब इस्लामाबाद और काबुल के बीच संबंध -– जो 2021 में तालिबान के सत्ता में वापस आने के बाद से तनावपूर्ण रहे हैं –- अक्टूबर में सीमा पर हुई झड़पों के बाद बिगड़ गए, जिसमें दोनों ओर से लगभग 70 लोग मारे गए (आर्काइव्ड लिंक).
कतर और तुर्की द्वारा अक्टूबर में किए गए युद्धविराम समझौते के बावजूद तनावपूर्ण सीमा क्षेत्र में घातक झड़पें होती रही हैं.
हालांकि सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा वीडियो अक्टूबर 2024 में फ़िल्माया गया था.
कराची विस्फोट
गलत दावे से शेयर किए गए क्लिप के की-फ़्रेम्स को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर पाकिस्तानी न्यूज़ आउटलेट डॉन द्वारा 7 अक्टूबर, 2024 को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया वीडियो का एक लंबा संस्करण मिला (आर्काइव्ड लिंक).
वीडियो का कैप्शन है, "रविवार रात कराची हवाई अड्डे के पास एक विस्फोट की सूचना मिली, जिसकी आवाज़ें अलग-अलग इलाकों में लोगों ने सुनी."
यह पोस्ट डॉन की विस्फोट संबंधी रिपोर्ट में भी शामिल थी (आर्काइव्ड लिंक).
एएफ़पी ने बताया कि इस भीषण विस्फोट में दो चीनी नागरिक मारे गए और कई पाकिस्तानी नागरिक घायल हुए (आर्काइव्ड लिंक).
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की स्वायत्तता की वकालत करने वाले एक अलगाववादी उग्रवादी समूह, बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने यह कहते हुए हमले की ज़िम्मेदारी ली कि उसने चीनी इंजीनियरों और निवेशकों के एक काफ़िले को निशाना बनाया था.
यह समूह नियमित रूप से चीनी नागरिकों को निशाना बनाता रहा है और दावा करता है कि स्थानीय बलूच लोगों को विदेशी निवेशकों द्वारा कमाई गई संपत्ति का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है.
इस्लामाबाद स्थित चीनी दूतावास ने मौतों की पुष्टि की और पाकिस्तान से चीनी नागरिकों, संस्थानों और परियोजनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है.
गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो में दिख रहे जलते वाहनों में से एक को विस्फोट के बाद की एएफ़पी तस्वीरों में भी देखा जा सकता है.
एएफ़पी ने पहले भी अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष से जुड़ी अन्य गलत सूचनाओं को फ़ैक्ट-चेक किया है.
कॉपीराइट © एएफ़पी 2017-2025. इस कंटेंट के किसी भी तरह के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए सब्सक्रिप्शन की ज़रूरत पड़ेगी. अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.