जातिगत महापंचायत का पुराना वीडियो "अरावली बचाओ अभियान" के दावे से शेयर किया गया

नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के विरोध में देश में कई जगह प्रदर्शन हुए. फैसले को पर्यावरणविदों ने चिंताजनक बताया. इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप इस दावे से शेयर की गई कि वह इस मामले से जुड़े एक प्रदर्शन का है. हालांकि जांच में पता चला कि असल वीडियो जनवरी 2025 में हुई एक महापंचायत का है, जिसका अदालत के फैसले से कोई सरोकार नहीं है.

X पर एक यूज़र ने 20 दिसंबर को वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन लिखा, जिसका एक हिस्सा है, "अरावली को बचाने के लिए लाखों की भीड़, संगठन में ही शक्ति है." 

20 सेकंड के इस वीडियो में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ दिखाई देती और इसमें "Save Aravalli" हैशटैग भी शामिल है. 

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गलत दावे से शेयर की गई X पोस्ट का 25 दिसंबर 2025 को लिया गया स्क्रीनशॉट, जिसमें एएफ़पी द्वारा लाल X मार्क जोड़ा गया है

नवंबर में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को सीमित कर दिया गया. अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली तक फैली हुई है (आर्काइव्ड लिंक). 

इस बदलाव के तहत 100 मीटर (328 फीट) से कम ऊंचाई वाले इलाकों को अरावली क्षेत्र से बाहर कर दिया गया है जिससे वहां खनन पर लगने वाली पाबंदियां लागू नहीं होंगी (आर्काइव्ड लिंक). 

ANI समाचार एजेंसी के मुताबिक, पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि इससे कई निचली लेकिन पर्यावरण के लिहाज से बेहद अहम पहाड़ियां खनन और निर्माण के दायरे में आ सकती हैं (आर्काइव्ड लिंक). 

हालांकि, सरकार का कहना है कि यह कदम नियमों को एक समान बनाने और पर्यावरण संरक्षण को कमज़ोर नहीं, बल्कि मजबूत करने के लिए उठाया गया है (आर्काइव्ड लिंक). 

29 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही आदेश पर रोक लगा दी और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया (आर्काइव्ड लिंक). 

इस बीच फ़ेसबुक और X पर एक वीडियो यह दावा करते हुए शेयर किया गया कि वह इन प्रदर्शनों का है, लेकिन असल में यह वीडियो जनवरी 2025 में राजस्थान के एक गांव में हुई एक बैठक का है, जहां सामुदायिक मुद्दों पर चर्चा की जा रही थी. 

गूगल रिवर्स इमेज सर्च से पता चला कि यही वीडियो 28 जनवरी 2025 को स्थानीय मीडिया संगठन न्यूज़18 द्वारा प्रकाशित किया गया था (आर्काइव्ड लिंक). 

रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो एक 'महापंचायत' का है जो एक शादी रद्द होने को लेकर दो परिवारों के बीच उठे विवाद पर बुलाई गई थी. इसमें करीब 12,000 से 13,000 लोग शामिल हुए थे. 

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गलत दावे की वीडियो (बायें) और न्यूज़18 पर प्रकाशित वीडियो के स्क्रीनशॉट की तुलना जिसमें समानताओं को एएफ़पी द्वारा हाइलाईट किया गया है

वीडियो में "विशाल महापंचायत" लिखा होर्डिंग देखा जा सकता है. 

स्थानीय मीडिया आउटलेट राजस्थान न्यूज़ ने भी इस कार्यक्रम पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें इस बैठक से मिलते-जुलते दृश्य साझा किए गए थे (आर्काइव्ड लिंक). 

जनवरी में हुई इस बैठक में शामिल गांव के निवासी अमित मीणा ने 24 दिसंबर को फ़ोन पर एएफ़पी को बताया कि यह आयोजन गांव के कुश्ती मैदान में किया गया था. 

उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो का सुप्रीम कोर्ट के अरावली से जुड़े आदेश से कोई संबंध नहीं है और उनके गांव में हाल में कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ है. 

एएफ़पी पहले भी बड़े जमावड़ों से जुड़े ऐसे दावों को फ़ैक्ट चेक कर चुका है. 

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