वक्फ़ संशोधन पर संसद में बोलते अमित शाह का पुराना वीडियो भ्रामक दावे से UGC बिल से जोड़कर वायरल

हाल ही में विश्वविद्यालयों के लिए लाए गए नए समानता (इक्विटी) नियमों के खिलाफ़ देश के कुछ हिस्सों में तीव्र विरोध प्रदर्शन हुए. इन नियमों के विरोध में कहा गया कि इनमें सामान्य वर्ग के छात्रों को कोई सुरक्षा नहीं दी गई है और उनके खिलाफ़ फ़र्ज़ी आरोप लगने की आशंका बढ़ सकती है. इसी बीच, सोशल मीडिया पर गृहमंत्री अमित शाह का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे कहते दिखते हैं कि संसद से पारित कानून को सभी को स्वीकार करना पड़ेगा. हालांकि, यह वीडियो हालिया विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा नहीं है. यह अप्रैल 2025 में संसद में वक्फ़ से जुड़े कानूनों पर बहस के दौरान अमित शाह द्वारा दिया गया भाषण है.

फ़ेसबुक पर 29 जनवरी 2026 को शेयर की गई फ़ेसबुक पोस्ट का कैप्शन है, "यूजीसी बिल पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, संसद का कानून सभी को मानना होगा."

पोस्ट में शेयर किये गये वीडियो में अमित शाह कहते हैं: "क्या धमकाना चाहते हो भाई यह संसद का कानून है सबको स्वीकार करना होगा. इसका क्या मतलब है कि आप इसे स्वीकार नहीं करेंगे? ऐसा कैसे हो सकता है? यह भारत सरकार का कानून है और सभी पर लागू होगा. इसे मानना ही होगा."

सरकार ने 13 जनवरी को उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव से जुड़े यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा था. इसके तहत संस्थानों में भेदभाव के मामलों को देखने और कैंपस में समानता बढ़ाने के लिए 'इक्विटी कमेटियां' बनाने का प्रावधान किया गया था (आर्काइव्ड लिंक).

नए नियमों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति जैसे अल्पसंख्यक समूहों को सुरक्षा देने और समान अवसर देने पर ज़ोर दिया गया है. हालांकि, विरोध करने वालों — जिनमें ज़्यादातर वे छात्र थे जो इन संरक्षित श्रेणियों में नहीं आते — का कहना था कि इन नियमों के तहत उन्हें अनुचित रूप से निशाना बनाया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को मामले की दोबारा समीक्षा करने का प्रस्ताव देते हुए इन बदलावों पर रोक लगा दी (आर्काइव्ड लिंक).

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गलत दावे से शेयर की गई फ़ेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट 3 फ़रवरी को लिया गया, जिसमें एएफ़पी द्वारा लाल X जोड़ा गया है

वीडियो को इसी तरह के दावों के साथ फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी शेयर किया गया है.

हालांकि, अमित शाह यूजीसी नियमों में किए गए बदलावों पर बात नहीं कर रहे थे.

वीडियो के की-फ़्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर पाया कि यह वीडियो 2 अप्रैल 2025 -- यानी यूजीसी नियमों की घोषणा से कई महीने पहले -- अमित शाह के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया गया था (आर्काइव्ड लिंक).

पोस्ट का कैप्शन है, "संसद में वक्फ़ को लेकर जो कानून बनाया जा रहा है, वह भारत सरकार का कानून है और इसे सभी को स्वीकार करना होगा."

वीडियो के ऊपर भी लिखा है, "संसद वक्फ़ पर जो कानून बना रही है, उसे सभी को मानना होगा."

सरकार ने अप्रैल 2025 में मुस्लिमों की धार्मिक संपत्तियों के रख-रखाव में पारदर्शिता बढ़ाने के लिये वक्फ़ बोर्डों में सुधार से जुड़ा एक विधेयक पारित किया था लेकिन इसके खिलाफ़ मुस्लिम समुदाय ने विरोध किया और विपक्ष ने इसे अल्पसंख्यकों पर "हमला" बताया था.

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गलत दावे की पोस्ट के वीडियो (बायें) और शाह के इंस्टाग्राम पोस्ट के वीडियो के स्क्रीनशॉट की तुलना

वक्फ़ विधेयक पर अमित शाह की स्पीच का एक लंबा वीडियो 3 अप्रैल 2025 को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने आधिकारिक फ़ेसबुक पेज पर भी शेयर किया था (आर्काइव्ड लिंक).

अमित शाह ने 3 फ़रवरी तक यूजीसी से जुड़े इन विरोध प्रदर्शनों पर कोई बयान नहीं दिया है.

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