महीनों पुराने वीडियो UGC बिल से जोड़कर गलत दावे से शेयर किये गए
- प्रकाशित 10 फरवरी 2026, 12h51
- 4 मिनट
- द्वारा Sachin BAGHEL, एफप भारत
विश्वविद्यालयों में हाशिए पर मौजूद समुदायों के छात्रों के खिलाफ़ भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए नए नियमों को लेकर सामान्य वर्ग के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. इसी बीच सोशल मीडिया पर कई वीडियो इन प्रदर्शनों के बताकर शेयर किए गए. हालांकि ये सभी वीडियो UGC बिल के विरोध शुरू होने से कई महीने पहले के हैं. इनमें से एक लोकप्रिय गायक ज़ुबीन गर्ग के निधन पर शोक जताते प्रशंसक और दो अन्य राजनीतिक पार्टी के विरोध प्रदर्शन के हैं.
28 जनवरी 2026 को इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो का कैप्शन है, "यूजीसी नियमों के खिलाफ आंदोलन की चिंगारी बिहार में फैलती दिख रही है. बिहार के पटना में छात्रों ने प्रदर्शन किया और डाक बंगला रोड को जाम कर दिया."
वीडियो, जिसमें सड़क पर भारी भीड़ दिखाई देती है, के ऊपर भी इसी तरह का टेक्स्ट लिखा हुआ है.
ये क्लिप उस समय वायरल हुआ जब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के खिलाफ़ छात्र प्रदर्शन कर रहे थे. इन नियमों का मकसद हाशिए पर मौजूद समुदायों -- खासकर जाति व्यवस्था में सबसे नीचे रखे गए तथाकथित जाति -- के खिलाफ़ भेदभाव रोकना बताया गया था (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां).
प्रदर्शनकारियों --जिनमें ज़्यादातर सामान्य वर्गों के छात्र शामिल हैं -- का कहना है कि नए नियमों के तहत उन्हें अनुचित रूप से निशाना बनाया जा सकता है और ये सभी वर्गों को समान सुरक्षा नहीं देते हैं.
29 जनवरी को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा दी. अदालत ने इन्हें "बहुत व्यापक" बताते हुए कहा कि इन नियमों की दोबारा जांच की ज़रूरत है (आर्काइव्ड लिंक).
इसी तरह का दावा 27 जनवरी को इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक अन्य वीडियो में भी किया गया, जिसमें मशालें और तख्तियां लिए लोगों की भीड़ मार्च करती दिखाई देती है.
वीडियो पर हिंदी में लिखा है, "UGC वापस ले सरकार".
27 जनवरी को X पर शेयर किए गए एक पोस्ट में एक और वीडियो है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की तस्वीरों पर काली स्याही फेंकी जा रही है. यह कथित तौर पर यूजीसी नियमों के विरोध में हुई घटना बताई जा रही है.
ये वीडियो इसी तरह के दावों के साथ फ़ेसबुक और X पर भी शेयर किए गए.
जबकि यूजीसी के नए समानता (इक्विटी) नियमों के खिलाफ़ हुए प्रदर्शनों में शहरों की सड़कों और विश्वविद्यालय परिसरों में भीड़ ज़रूर देखी गई, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल ये वीडियो उन प्रदर्शनों से पहले के हैं (आर्काइव्ड लिंक).
ज़ुबीन गर्ग की शवयात्रा
सड़क पर भारी भीड़ वाली वीडियो के की-फ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर यही फ़ुटेज 22 सितंबर 2025 को लाइफ़स्टाइल आउटलेट 'इंडियाटाइम्स' द्वारा यूट्यूब पर पोस्ट किया हुआ मिला (आर्काइव्ड लिंक).
इस वीडियो का शीर्षक है, "गुवाहाटी में हज़ारों लोगों ने गायक ज़ुबीन गर्ग को भावभीनी विदाई दी".
ज़ुबीन गर्ग की सिंगापुर में डूबने से मौत हो गई थी. उनके निधन के बाद असम में उनके लाखों प्रशंसकों के बीच गहरा शोक देखा गया, जहां वो काफ़ी लोकप्रिय थे (आर्काइव्ड लिंक).
यूट्यूब वीडियो में भीड़ को गायक का नाम लेते हुए सुना जा सकता है.
वीडियो में दिखाई देने वाली सड़क गुवाहाटी के एक चौराहे की गूगल स्ट्रीट व्यू पर मौजूद तस्वीरों से भी मेल खाती है (आर्काइव्ड लिंक).
एएफ़पी पहले भी इसी वीडियो को बिहार में वोटिंग में गड़बड़ी के खिलाफ़ हुए प्रदर्शन के दावे से शेयर करने पर फ़ैक्ट चेक कर चुका है.
चुनाव में धांधली के खिलाफ़ प्रदर्शन
मशालें और तख्तियां पकड़े प्रदर्शनकारियों वाले वीडियो के की-फ़्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च करने पर पता चला कि इसी तरह का फ़ुटेज 14 अगस्त 2025 को छत्तीसगढ़ यूथ कांग्रेस ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर किया था (आर्काइव्ड लिंक).
पोस्ट के कैप्शन के अनुसार वीडियो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हुए प्रदर्शन का है जिसमें विपक्षी कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी के समर्थक शामिल थे.
गलत दावे के साथ शेयर किए गए वीडियो की करीब से जांच करने पर दिखता है कि प्रदर्शनकारी "स्टॉप वोट चोरी" लिखा हुआ बैनर और तख्तियां पकड़े हैं.
वीडियो में दिखने वाले कुछ दृश्य गूगल स्ट्रीट व्यू पर रायपुर शहर की तस्वीरों से मेल खाते हैं (आर्काइव्ड लिंक).
राहुल गांधी ने 2024 के चुनावों में मतदाता धांधली कराने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से मिलीभगत का आरोप लगाया था. इसके बाद उनके समर्थकों ने कई राज्यों में बीजेपी के खिलाफ़ प्रदर्शन किए थे (आर्काइव्ड लिंक).
इस प्रदर्शन की कवरेज दैनिक भास्कर अख़बार ने भी की थी, जिसमें मशालें पकड़े प्रदर्शनकारियों के ऐसे ही वीडियो शामिल थे (आर्काइव्ड लिंक).
कांग्रेस का प्रदर्शन
प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की तस्वीरों पर काली स्याही वाले आखिरी वीडियो को रिवर्स इमेज सर्च करने पर वही फ़ुटेज 17 दिसंबर 2025 को इंस्टाग्राम पर शेयर किया हुआ मिला (आर्काइव्ड लिंक).
कैप्शन में दावा किया गया है कि यह वीडियो रायपुर में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन का है (आर्काइव्ड लिंक).
पार्टी कार्यकर्ता सत्तारूढ़ बीजेपी पर सरकारी जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के ज़रिये विपक्ष को निशाना बनाने का आरोप लगा रहे थे.
वीडियो में दिख रहे दृश्य रायपुर में मौजूद सड़क के गूगल स्ट्रीट व्यू से भी मेल खाते हैं (आर्काइव्ड लिंक).
दैनिक भास्कर ने भी इससे मिलता जुलता एक वीडियो अपनी रिपोर्ट में प्रकाशित किया था (आर्काइव्ड लिंक).
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