अतिक्रमण हटवाने का वीडियो नेपाल से शरणार्थियों को भगाने के गलत दावे से वायरल

पुलिस द्वारा बांग्लादेश की राजधानी ढाका में अवैध ठेलों को हटाए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर हज़ारों बार देखा जा चुका है. कुछ यूज़र इसे धार्मिक रंग देकर यह दावा कर रहे हैं कि नेपाल में अधिकारियों ने "सभी बांग्लादेशियों को बाहर निकालना शुरू कर दिया है". यह वीडियो ढाका में पुलिस कार्रवाई बताते हुए स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में भी प्रकशित हुई है और गूगल स्ट्रीट व्यू की तस्वीरों से भी इसकी लोकेशन मेल खाती है. 

24 अप्रैल 2026 को X पर शेयर किए गए एक वीडियो का कैप्शन है, "नेपाल में आक्रोश, नेपाल में हिंदुओं की सरकार ने अब सभी बांग्लादेशियों को भगाना शुरू कर दिया है." 

वीडियो, जिसे 2 लाख से अधिक बार देखा गया है, पुलिस टीम को एक स्टेडियम के बाहर खाने के ठेलों को डंडों से हटाती और दुकानदारों को जाने के लिए कहते दिखाती है.

कैप्शन में आगे लिखा है, "नेपाल सरकार का साफ कहना है जब हम काफिर है तो हमारे देश से बाहर निकलो." 

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गलत दावे से शेयर की गई X पोस्ट का स्क्रीनशॉट जिसमें एएफ़पी द्वारा लाल X साइन जोड़ा गया है

यह फ़ुटेज उस समय वायरल हुआ जब रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह ने 27 मार्च को नेपाल के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, जिसमें हिंदू और बौद्ध परंपराओं से जुड़े विस्तृत अनुष्ठान किये गए थे (आर्काइव्ड लिंक). 

35 वर्षीय सुधारवादी नेता और उनकी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने सितंबर 2025 में भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के बाद हुए पहले चुनाव में युवा-आधारित राजनीतिक बदलाव के मुद्दे पर जीत हासिल की.  

भारत के 'द स्टेट्समैन' अख़बार के अनुसार, शाह के शपथ ग्रहण समारोह के धार्मिक स्वरूप की सिविल सोसाइटी समूहों और बुद्धिजीवियों ने आलोचना की. उनका कहना था कि इससे नेपाल की धर्मनिरपेक्षता की संवैधानिक प्रतिबद्धता पर सवाल उठता है और अल्पसंख्यकों के अलग-थलग पड़ने का खतरा है (आर्काइव्ड लिंक). 

नेपाल पुलिस द्वारा बांग्लादेशियों को बाहर निकालने का दावा करने वाला यह वीडियो फ़ेसबुक और X पर इसी तरह के पोस्ट में शेयर किया गया. 

एक पोस्ट पर कमेंट था: "हाँ, बांग्लादेशियों को भारत से भी बाहर निकाल देना चाहिए."

एक अन्य कमेंट में कहा गया: "जो लोग हिंदुओं को काफ़िर कहते हैं, उन्हें तुरंत देश छोड़ देना चाहिए, और अगर वे नहीं जाते हैं तो सरकार को उन्हें बाहर निकाल देना चाहिए."

 लेकिन यह वीडियो असल में बांग्लादेश में फ़िल्माया गया था.  

वीडियो को ध्यान से देखने पर कई जगह बांग्ला भाषा में लिखे बोर्ड्स नज़र आते हैं, एक होर्डिंग पर बांग्लादेश का नाम भी दिखता है और एक पुलिसकर्मी की टोपी पर "Bangladesh Police" लिखा हुआ नजर आता है. 

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गलत दावे के साथ शेयर किए गए वीडियो के स्क्रीनशॉट, जिनमें बांग्लादेश में शूट होने के संकेत को एएफ़पी ने हाइलाइट किया है

गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो के कुछ फ़्रेम्स  गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर समान दृश्य लिए 18 मार्च को यूट्यूब पर पब्लिश की गई एक बांग्ला रिपोर्ट मिली (आर्काइव्ड लिंक). 

इस रिपोर्ट के अनुसार, जो बांग्लादेश के एक न्यूज़ चैनल के यूट्यूब चैनल पर शेयर की गई थी, वीडियो में राजधानी ढाका में पुलिस अवैध फेरीवालों को हटाती हुई दिख रही है. 

ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के प्रवक्ता मुहम्मद तालेबुर रहमान ने 3 मई को एएफ़पी को बताया कि इस वीडियो का "इमिग्रेशन या धार्मिक मुद्दों से कोई संबंध नहीं है".

उन्होंने पुष्टि की कि यह वीडियो राजधानी में गुलिस्तान स्टेडियम के पास फेरीवालों को हटाने की कार्रवाई का है. 

यह क्लिप गूगल स्ट्रीट व्यू में ढाका के नेशनल स्टेडियम के बाहर दिखने वाले इलाके से मेल खाता है (आर्काइव्ड लिंक). 

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गलत दावे के साथ शेयर किए गए वीडियो (बाएं) और ढाका की गूगल स्ट्रीट व्यू तस्वीर की तुलना, जिसमें मिलते-जुलते फ़ीचर्स को एएफ़पी ने हाइलाइट किया है

एएफ़पी पहले भी नेपाल से जुड़े अन्य भ्रामक दावों को फ़ैक्ट चेक कर चुका है.

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