अमरनाथ यात्रा का वीडियो भारतीय ज़मीन पर चीन के कब्ज़े के गलत दावे से वायरल

जुलाई 2026 में अरुणाचल प्रदेश के एक स्थानीय सामाजिक संगठन ने दावा किया कि चीनी सैनिकों ने भारत-चीन सीमा के पास भारतीय क्षेत्र में शिविर बनाए हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा गया कि यह चीनी सैनिकों के भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ के दौरान का है. हालांकि यह दावा गलत है. वीडियो रिकॉर्ड करने वाले व्यक्ति ने AFP को बताया कि यह जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के दौरान भीड़ को नियंत्रित करते सुरक्षाकर्मियों का वीडियो है. 

जुलाई 7, 2026 को इंस्टाग्राम पर शेयर की गई एक पोस्ट का कैप्शन है, "अरुणाचल प्रदेश में भारत की सीमा में घुसे चीनी सैनिक 60 किलोमीटर जमीन को कब्जाया कुछ भारतीय सैनिकों को भी बनाया बंधक." 

करीब 15 सेकंड के इस वीडियो में वर्दी पहने सुरक्षाकर्मी कांटेदार तारों के पास भीड़ को नियंत्रित करते दिखाई देते हैं. 

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट जिस पर AFP द्वारा X साइन जोड़ा गया है

वीडियो फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी मिलते-जुलते दावे के साथ शेयर किया गया. यह ऐसे समय वायरल हुआ जब भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की खबरों को खारिज किया था (आर्काइव्ड लिंक). 

सेना की यह प्रतिक्रिया नाह वेलफ़ेयर सोसाइटी के उस दावे के बाद आई थी, जिसमें संगठन ने कहा था कि चीन ने भारत-चीन सीमा के पास अपने ठिकानों का विस्तार किया है (आर्काइव्ड लिंक). 

दिसंबर 2022 में अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन की सेनाओं के बीच सीमा पर झड़प हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों के सैनिक घायल हुए थे (आर्काइव्ड लिंक). 

उस समय चीनी सेना ने आरोप लगाया था कि भारतीय सैनिकों ने "अवैध रूप से" सीमा पार कर चीनी गश्ती दल को रोका था. वहीं भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि चीनी सैनिक सीमा पर "यथास्थिति को एकतरफ़ा बदलने" की कोशिश कर रहे थे.

उससे पहले 2020 में लद्दाख सीमा पर हुई झड़प में 20 भारतीय और चार चीनी सैनिक मारे गए थे. इसे दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच हाल में सबसे गंभीर सीमा विवादों में से एक माना गया था (आर्काइव्ड लिंक). 

वायरल पोस्ट को वास्तविक मानते हुए कई यूज़र्स ने इसपर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं. 

एक यूज़र ने लिखा, "कमांडर-इन-चीफ कहां हैं? प्रधानमंत्री क्या कर रहे हैं? हमारी सेना कहां गई?" वहीं दूसरे ने लिखा, "इसके लिए नरेंद्र मोदी ज़िम्मेदार हैं." 

हालांकि वीडियो वास्तव में जम्मू-कश्मीर के बालटाल क्षेत्र में अमरनाथ यात्रा के दौरान रिकॉर्ड किया गया था, जो अरुणाचल प्रदेश से लगभग 3,300 किलोमीटर दूर है. 

वायरल क्लिप के कीफ़्रेम को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर AFP को 5 जुलाई को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया समान वीडियो मिला. हालांकि वीडियो को हॉरिज़ॉन्टली फ़्लिप किया गया है (आर्काइव्ड लिंक). 

वीडियो पर हिंदी में लिखा था, "इंस्टेंट रजिस्ट्रेशन एंड RFID कार्ड, बालटाल, लाइव अपडेटेड" और इसके कैप्शन में भी अमरनाथ यात्रा 2026 का उल्लेख किया गया है (आर्काइव्ड लिंक). 

बालटाल, जम्मू-कश्मीर में स्थित वह प्रमुख मार्ग है जहां से हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण कराते हैं.

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गलत दावे से शेयर की गयी क्लिप (बाएं) और इंस्टाग्राम अकाउंट पर मौजूद फ़ुटेज के स्क्रीनशॉट्स की तुलना

इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करने वाले सुशील सैनी ने AFP को बताया कि इसे उन्होंने बालटाल में ही फ़िल्माया था. 

उन्होंने 9 जुलाई को AFP से कहा, "मैंने यह वीडियो उस समय रिकॉर्ड किया था जब अमरनाथ यात्रा के लिए बालटाल के प्रवेश द्वार के पास ऑन-द-स्पॉट रजिस्ट्रेशन के दौरान भारी भीड़ जमा हो गई थी." 

गूगल स्ट्रीट व्यू की तस्वीरें भी वायरल वीडियो की बैकग्राउंड से मेल खाती हैं (आर्काइव्ड लिंक).

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गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो (बाएं) और बालटाल क्षेत्र की गूगल स्ट्रीट व्यू इमेजरी के स्क्रीनशॉट की तुलना, AFP द्वारा हाइलाइटेड समान तत्वों के साथ

इसके अलावा वीडियो में दिखाई देने वाला "J&K Police" लिखा बैरिकेड भी पुष्टि करता है कि यह वीडियो अरुणाचल प्रदेश का नहीं, जम्मू-कश्मीर का है. 

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गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो का स्क्रीनशॉट जिसमें 'J&K Police' लिखा बैरिकेड AFP द्वारा हाइलाइट किया गया है

AFP पहले भी भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़े कई भ्रामक दावों का फ़ैक्ट चेक कर चुका है.

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