इराक का असंबंधित वीडियो नेपाल सांप्रदायिक झड़पों से जोड़कर शेयर किया गया

जुलाई 2026 के अंत में नेपाल में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच हुई सांप्रदायिक हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई. इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर यह दावा किया गया कि हिन्दुओं द्वारा मुस्लिमों का एक गांव जला दिया गया है. हालांकि, वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने AFP को बताया कि यह क्लिप इराक में एक धार्मिक जुलूस के दौरान सड़क पर किए गए एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन का है.

इंस्टाग्राम पर 2 अगस्त को शेयर किए गए पोस्ट का कैप्शन है, "नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण पालिक (कप्तानगंज) में 26 जुलाई 2026 की रात कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे बजाने और झंडे लगाने को लेकर दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प हुई."

वीडियो में एक खुली जगह पर टेंट जैसी संरचनाओं को घने काले धुएं और आग की लपटों में घिरे देखा जा सकता है, जबकि बुर्का पहने कुछ महिलाएं रोती हुई दिख रही हैं.

वीडियो के ऊपर लिखा टेक्स्ट है: "नेपाल में हिंदू के दो युवक कावड़ ले जा रहे थी तो मुस्लिम ने उनकी हत्या कर दी, फिर हिंदुओं ने पूरा मुस्लिम गांव जला दिया."

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट जिस पर AFP द्वारा X साइन जोड़ा गया है

यह वीडियो फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और X पर भी इसी तरह के दावों के साथ तब शेयर किया गया जब दक्षिणी नेपाल में सांप्रदायिक तनाव फैला, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और कई शहरों में अनिश्चितकालीन कर्फ़्यू लगा दी गयी (आर्काइव्ड लिंक).  

यह हिंसक झड़पें 26 जुलाई की रात भारत की सीमा से लगे दक्षिणी नेपाल के सुनसरी ज़िले के एक गांव में शुरू हुई थी जहां हिन्दुओं के कांवड़ यात्रा के दौरान तेज़ संगीत और धार्मिक झंडों के लगाने को लेकर विवाद हुआ (आर्काइव्ड लिंक).

हालांकि, यह क्लिप नेपाल में हुए सांप्रदायिक हिंसा का नहीं है.

वायरल वीडियो के कीफ़्रेम को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर AFP को यही वीडियो 26 जून को इराक के फ़ोटोग्राफ़र अली शाहिद द्वारा इंस्टाग्राम पर शेयर किया हुआ मिला (आर्काइव्ड लिंक).

"यह वीडियो इराक में शूट किया गया था और इसमें अह्ल अल-बैत (आशूरा) की याद में निकाले जाने वाले जुलूस को दिखाया गया है; इसमें कोई हिंसा या ऐसी कोई चीज़ नहीं दिखाई गई है -- यह बस एक री-एनेक्टमेंट है," शाहिद ने 7 अगस्त को AFP को बताया.

इराक के शिया ब्रॉडकास्टर कर्बला टीवी ने जुलूस का संबंधित फ़ुटेज पब्लिश किया (आर्काइव्ड लिंक).

आशूरा शिया मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है, जो करबला में इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है. दुनिया भर के शिया मुसलमानों ने जून 2026 में आशूरा मनाया (आर्काइव्ड लिंक).

यह घटना 7वीं सदी में कर्बला के युद्ध मैदान में हुसैन की शहादत की याद दिलाती है. शिया उन्हें पैगंबर मोहम्मद का सही उत्तराधिकारी मानते हैं (आर्काइव्ड लिंक).

वर्ष 680 ईस्वी में हुई उनकी मौत का शोक मनाने के लिए, शिया पुरुष और महिलाएं काले लिबास पहन कर मातम में हिस्सा लेते हैं जहां वह एक साथ रोते और अपनी छाती पीटते हैं; कुछ लोग तलवारों और धारदार जंज़ीरों से खुद को लहूलुहान भी करते हैं.

कुछ जगहों पर सड़कों पर नाटक और मशालों के साथ जुलूस भी निकाले जाते हैं (आर्काइव्ड लिंक).

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गलत दावे से शेयर किए गए क्लिप (बाएं) और इंस्टाग्राम वीडियो के स्क्रीनशॉट की तुलना

आगे और खोजने पर इराक स्थित एक अन्य इंस्टाग्राम यूज़र द्वारा शेयर किए गए इसी तरह के क्लिप मिले (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां).

अरबी भाषा के कैप्शन में लिखा है: "मुहर्रम के दसवें दिन, हुसैनी जुलूस के हिस्से के रूप में नासिरिया के सौक अल-शुयुख में सबसे बड़ा आशूरा जुलूस निकाला गया."

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गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो (बाएं) और इंस्टाग्राम वीडियो की स्क्रीनशॉट तुलना, जिसमें AFP ने संबंधित दृश्यों को हाइलाइट किया है

AFP ने पहले भी नेपाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े अन्य फ़र्ज़ी दावों को फ़ैक्ट चेक किया है.

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