वृंदावन में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ प्रदर्शन की एक पुरानी तस्वीर झूठे दावे से वायरल

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सोशल मीडिया पर एक तस्वीर इस दावे से हज़ारों बार शेयर की जा चुकी है कि उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिज़वी के धर्मान्तरण के बाद दर्जनों मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म अपना लिया है. ये तस्वीर ग़लत दावे के साथ शेयर की जा रही है: 2016 में अमर उजाला अख़बार में छपी ये तस्वीर उरी हमले के बाद वृंदावन के मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा पाकिस्तान के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने की है. 

फ़ेसबुक पर ये तस्वीर 13 दिसंबर 2021 को यहां शेयर की गई है थी. हटाए जाने से पहले इसे 490 से अधिक बार शेयर किया गया.

वायरल तस्वीर में कई मुस्लिम समुदाय के लोग एक संत के चारों ओर खड़े हैं.

भ्रामक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

पोस्ट के कैप्शन में लिखा है: "वसीम रिज़वी की सनातन धर्म में वापसी के बाद, मुसलमान अधिक भयभीत हो रहे हैं और स्वेच्छा से हिंदू धर्म में परिवर्तित हो रहे हैं. उत्तर प्रदेश में 34 मुस्लिम परिवार सनातन हिंदू धर्म में लौट आए हैं. श्री राम की जय हो.”

वसीम रिज़वी उत्तर प्रदेश के शिया सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष थे जिन्होंने धर्मांतरण के बाद अपना नाम बदलकर जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी कर लिया था.

इसी दावे के साथ ये तस्वीर फ़ेसबुक पर यहां और यहां; साथ ही ट्विटर पर यहां और यहां शेयर की गई है.

हालाँकि, तस्वीर को गलत दावे के साथ शेयर किया गया है.

गूगल पर कीवर्ड सर्च के साथ रिवर्स इमेज सर्च करने पर पता चला कि ये तस्वीर 24 सितंबर, 2016 को अमर उजाला की एक रिपोर्ट में प्रकाशित हुई थी. 

ये ख़बर कश्मीर के उरी हमले में 19 भारतीय सैनिकों की हत्या के बाद उत्तर प्रदेश में वृंदावन के शाही जामा मस्जिद के बाहर मुसलमानों के पाकिस्तान के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के बारे में है.  

अमर उजाला की खबर की हेडलाइन में लिखा है: "पाकिस्तान मुर्दाबाद, जामा मस्जिद में लगाए गए नारे.”

रिपोर्ट की पहली लाइन में लिखा है: "जम्मू और कश्मीर में उरी सैन्य मुख्यालय पर आतंकवादी हमले में 18 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद शहर के मुस्लिम समुदाय ने पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा व्यक्त किया है.”

भ्रामक पोस्ट (बाएं) और अमर उजाला समाचार रिपोर्ट (दाएं) में स्क्रीनशॉट की तुलना नीचे दी गई है:

भ्रामक पोस्ट (बाएं) और अमर उजाला समाचार रिपोर्ट (दाएं) में स्क्रीनशॉट की तुलना

अमर उजाला ने यहां इस विरोध प्रदर्शन का का एक वीडियो भी पोस्ट किया है.

अमर उजाला के वृंदावन संवाददाता राजीव अग्रवाल ने AFP को बताया कि उन्होंने ही वो फोटो लिया था और 2016 में विरोध प्रदर्शन को भी कवर किया था. 

वृंदावन के जामा मस्जिद इंतेजामिया कमिटी के अध्यक्ष आज़ाद कुरैशी ने AFP को बताया कि वो प्रदर्शन पाकिस्तान द्वारा भारतीय सैनिकों पर हमले के विरोध में किया गया था.

AFP ने वायरल तस्वीर में दिख रहे हिंदू पुजारी, नवल गिरी, से भी बात की. नवल गिरी ने कहा कि भारत पर पाकिस्तान के हमले के बाद उन्होंने स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ विरोध प्रदर्शन किया था.

उन्होंने कहा, "मैं जानता हूं कि लोग झूठी जानकारी शेयर कर रहे हैं कि 30-40 मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म अपना लिया, लोग उस पुरानी तस्वीर का दुरुपयोग कर रहे हैं."

"इन झूठे दावों को वसीम [रिज़वी] के धर्मांतरण के बाद ही शेयर किया जा रहा है. हालांकि, हम खुले दिल से हिंदू धर्म अपनाने के इच्छुक लोगों का स्वागत करते हैं."