
ये महाराणा प्रताप नहीं बल्कि ग्रेनेडा के शासक ‘बोआब्दिल की तलवार’ है
- यह आर्टिकल एक साल से अधिक पुराना है.
- प्रकाशित 25 फरवरी 2022, 17h07
- 5 मिनट
- द्वारा Qadaruddin SHISHIR, Anuradha PRASAD, AFP बांग्लादेश, एफप भारत
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इसे फ़ेसबुक पर 10 मई, 2021 को यहां शेयर किया गया था.
इसके साथ कैप्शन में लिखा है, "यह वही तलवार है, हल्दी घाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के पास सिर्फ 20000 सैनिक थे और अकबर के पास 85000 सैनिक. इसके बावजूद महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे."
आगे दावा किया गया है, "महाराणा प्रताप का भाला 81 किलो वजन का था और उनके छाती का कवच 72 किलो का था. उनके भाला, कवच, ढाल और साथ में दो तलवारों का वजन मिलाकर 208 किलो था."

ये तस्वीर ऐसे ही दावे के साथ फ़ेसबुक पर यहां और यहां; और ट्विटर पर यहां और यहां शेयर की गयी.
लेकिन ये दावे ग़लत हैं.
गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें एक ट्वीट मिला जिसमें तस्वीर के साथ कैप्शन में लिखा है, "बोआब्दिल की तलवार" जिसे 1400 ईसवीं के आसपास बनाया गया और स्पेन के टोलेडो आर्मी म्यूज़ियम में रखा गया है.
बता दें कि भारत के शासक महाराणा प्रताप का जन्म ही 16वीं शताब्दी में हुआ था.
Espada jineta y vaina de Boabdil (Muhammad XI), Reino nazarí de Granada, c.1400. Museo del Ejército de Toledo. pic.twitter.com/oGGaMyqvP0
— Archivos de la Historia (@Arcdelahistori) January 2, 2017
AFP ने स्पेन के आर्मी टोलेडो म्यूज़ियम से संपर्क किया तो वहा के विशेषज्ञों ने बताया कि वायरल तस्वीर वाली तलवार फ़्रांस के राष्ट्रीय पुस्तकालय, बिब्लियोथिक नेशनेल डी फ़्रांस (BnF), पेरिस में रखी है. आर्मी टोलेडो म्यूज़ियम में उस काल की ऐसी ही एक और तलवार है लेकिन वो वायरल तस्वीर वाली तलवार टोलेडो आर्मी म्यूज़ियम के पास नहीं है.
म्यूज़ियम के एक प्रवक्ता ने AFP से कहा, "ये तलवार टोलेडो के आर्मी म्यूज़ियम की नहीं हैं. ये डिपार्टमेंट ऑफ़ मोने, मेदा ए एंटीक (डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस, मेडल्स एंड ऐंटिक्स) में प्राचीन, मध्य काल और पुनर्जागरण काल से संजोये गए वस्तुओं में शामिल है जिन्हें पेरिस के राष्ट्रीय पुस्तकालय के डी’ऐंटिक्स में रखा गया है."
उन्होंने आगे कहा, "बोआब्दिल की जिनेत (Jinete) तलवार अपने आप में ही ख़ास है. दुनिया में ऐसी केवल 12 तलवारें हैं जिनमें से एक ही बोआब्दिल की तलवार हमारे म्यूज़ियम में हैं."
राष्ट्रीय पुस्तकालय बिब्लियोथिक नेशनेल डी फ़्रांस (BnF) के एक प्रवक्ता ने बताया कि वायरल तस्वीर में जो तलवार है वो उनके ही म्यूज़ियम में है.
एलोडी विन्सेंट ने AFP को बताया, "ये तलवार अबू धाबी में लूव्रे म्यूज़ियम को तीन सालों के लिए दी गयी थी जिसे पिछले साल ही वापिस लाया गया है."
BnF की वेबसाइट के मुताबिक ये ‘बोआब्दिल की तलवार’ है जिसे प्राचीन स्पेनिश शहर टोलेडो में 1480 के दशक में बनाया गया था.
इबेरिया प्रायद्वीप पर मुस्लिम नासरीद वंश के राजा मुहम्मद (बारहवें), उर्फ़ बोआब्दिल ने 1492 तक शासन किया था. अंततः कास्टील की कैथोलिक रानी इसाबेल प्रथम के सामने उन्हें घुटने टेकने पड़े.
तस्वीर के साथ फ़्रेंच भाषा में लिखा कैप्शन बताता है, "ये तलवार स्पेनिश कलेक्शन में रखी उस समय की (नासरीद शासन) उन्हीं हथियारों की श्रेणी का हिस्सा है जिसे ‘बोआब्दिल की तलवार’ कहा जाता है. 15वीं शताब्दी के अंत में लुजान रिकॉन्क्विस्ता के ठीक पहले रहे ग्रेनेडा के आखिरी मुस्लिम शासक के नाम पर ही इस तलवार का नाम पड़ा है."
"मुस्लिम राजा अपने सेनापति और योद्धाओं को तलवारों से सम्मानित करते थे जिसकी खासियत उनके पद के आधार पर होती थी."

इसके ओरिजिनल ब्लेड को 16 वीं शताब्दी में जर्मनी में बदल दिया गया था.
नीचे भ्रामक पोस्ट (बाएं) और BnF की तस्वीर के स्क्रीनशॉट की तुलना देख सकते हैं (दाएं).

इस तलवार पर अरबी अक्षरों में लिखा है, "सिर्फ़ अल्लाह ही विजयी है," ये नासरीद शासन का नारा है.
महाराणा प्रताप के युद्ध सामग्री का सही वज़न
AFP ने राजस्थान के सिटी पैलेस से संपर्क किया जहां महाराणा प्रताप की युद्ध सामग्री रखी हुई है. सिटी पैलेस में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी भूपेंद्र सिंह आउवा ने हमें मेल में उन सभी सामग्री की फ़ोटो समेत वज़न की सूची भेजी.
इसके मुताबिक महाराणा प्रताप की तलवार 1.799 किलो, तीर और कमान 2.266 किलो, ढाल 2.474 किलो, कवच 16.295 किलो, भाला 2.900 किलो, पाटा 2 किलो, गदा 1.464 किलो, डंडा 0.79 किलो, बन्दूक 4.63 किलो वज़नी थे, जो कुल मिलाकर 34.618 किलो होते हैं. यानी, दावे से बहुत ही कम.
इस सूची का स्क्रीनशॉट नीचे देख सकते हैं.



इस तस्वीर को पैगम्बर मोहम्मद की तलवार बताते हुए भी शेयर किया जा चुका है, इसका AFP द्वारा किया गया अंग्रेज़ी फ़ैक्ट-चेक यहां पढ़ सकते हैं.
