
पत्रकार राणा अयूब का पुराना वीडियो शेयर कर गिरफ़्तारी का ग़लत दावा वायरल
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- प्रकाशित 3 मार्च 2022, 13h17
- 2 मिनट
- द्वारा Anuradha PRASAD, एफप भारत
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गिरफ़्तारी के दावे वाला ये वीडियो 11 फ़रवरी, 2022 को फ़ेसबुक पर यहां शेयर किया गया.
वीडियो में भाजपा की आलोचक रही भारतीय पत्रकार और वॉशिंगटन पोस्ट की कॉलमिस्ट राणा अयूब एक ईमारत से निकल कर कार में जा रही हैं.
पोस्ट के कैप्शन में लिखा है, "विदेशी पैसे ले कर पत्रकारिता के नाम पर देश में अफवाह और हिंदुओ के खिलाफ़ नफरत फैलाने वाली राणा अयूब धर ली गयी है,1.77 करोड़ रुपए ED ने किए अटैच, मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप."

इसी दावे के साथ ये वीडियो फ़ेसबुक पर यहां, यहां, यहां और यहां; और ट्विटर पर यहां और यहां शेयर किया गया.
दरसअल, प्रत्यर्पण निदेशालय ने हाल ही में राणा अयूब पर पैसे की हेर फेर का मामला दर्ज करते हुए उनके 1.77 करोड़ रुपये ज़ब्त कर लिए. उनपर कोरोना पीड़ितों के लिए इकट्ठा किये गए चंदे का निजी इस्तेमाल करने का आरोप लगा है.
लेकिन उनकी गिरफ़्तारी की बात बेबुनियाद है.
यूट्यूब पर कीवर्ड सर्च करने पर हमें यही वीडियो रिपब्लिक भारत के एक रिपोर्ट में मिला जिसे 2 जुलाई, 2022 को अपलोड किया गया था.
नीचे भ्रामक वीडियो (बाएं) और रिपोर्ट वाले वीडियो (दाएं) के स्क्रीनशॉट की तुलना है.

रिपोर्ट के मुताबिक राणा अयूब समेत कुछ अन्य पत्रकारों और नेताओं पर एक कथित तौर से फ़र्ज़ी वीडियो शेयर किये जाने के आरोप लगा था. मामला दर्ज होने के बाद वो ग़ाज़ियाबाद के लोनी थाने में अपना बयान दर्ज करने पहुंची थीं.
ये मामला एक वीडियो ट्वीट किये जाने का था जिसमें कथित तौर पर दो लड़के एक बुज़ुर्ग के साथ मारपीट कर उससे 'जय श्री राम' बुलवा रहे थे.
ये वीडियो एक अन्य रिपोर्ट में यहां भी देखा जा सकता है.
मुंबई के बांद्रा में रहने वाली अयूब ने AFP से बात करते हुए गिरफ़्तारी वाले दावे को सिरे से ख़ारिज कर दिया.
AFP में बांद्रा पुलिस के सूचना अधिकारी से बात की और उन्होंने कहा, "हमारे क्षेत्र में ऐसी कोई गिरफ़्तारी नहीं की गयी है."
