अमानवीयता के लिए पुलिसकर्मी हुए थे सस्पेंड, पुराना वीडियो गलत दावे से वायरल

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सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें दो पुलिसकर्मी एक युवक को बुरी तरह पीटते हुए नजर आ रहें है. वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि हाल ही में 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगाने पर उत्तर प्रदेश पुलिस युवक को पीट रही है. हालांकि दावा भ्रामक है. ये वीडियो उत्तर प्रदेश चुनाव परिणाम आने के लगभग 10 महीने पहिले का है. स्थानीय पुलिस ने AFP को बताया कि उन लड़कों को चोरी के आरोप में पुलिस ने बुरी तरह पीटा था बाद में उन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था.

चेतावनी: हिंसक दृश्य 

वीडियो को फ़ेसबुक पर 31 मार्च, 2022 को शेयर किया गया है.

पोस्ट के कैप्शन में लिखा है, "#यूपी #बुलडोजर 2 दिन पहिले पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने वाले को बाबाजी के सिपाही द्वारा इनाम दिया जा रहा है."

चेतावनी

21 मार्च 2022 को लिया गया भ्रामक फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट


वीडियो को अब तक लगभग 25,000 बार से अधिक बार देखा जा चुका है. इसी दावे से फेसबुक पर यहां, यहां और ट्विटर पर यहां, यहां शेयर किया शेयर किया गया है.

एक और पोस्ट के कैप्शन में लिखा है, "बुलडोजर बाबा की पुलिस उन लोगों को अच्छा सबक सिखा रही है जो पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं."

एक और सोशल मीडिया यूजर ने वीडियो में कमेंट किया, "आज उत्तर प्रदेश में अपने वोट की कीमत देख लो, पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने वालों पुलिस पीट रही है."

हालांकि वीडियो को भ्रामक संदर्भ में शेयर किया जा रहा है.

गूगल में कीवर्ड सर्च करने पर हमें ये वीडियो यहां टाइम्स ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर 6 मई, 2021 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में मिला.

रिपोर्ट में लिखा है कि, "मोबाइल चोरी के आरोप में पकड़े जाने पर पुलिस ने नाबालिग लड़कों को बुरी तरह से पीटा, वीडियो हुआ वायरल."
वीडियो में पुलिसकर्मियों को बेंत से युवक को पीटते हुए देखा जा सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, "वीडियो के वायरल होने के बाद चंदौली जिले के बलुआ पुलिस स्टेशन के SHO और एक कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया." 

नीचे भ्रामक पोस्ट के वीडियो (बाएं) और टाइम्स ऑफ इंडिया के वीडियो (दाएं) के स्क्रीनशॉट के बीच एक तुलना है.

भ्रामक पोस्ट के वीडियो (बाएं) और टाइम्स ऑफ इंडिया के वीडियो (दाएं) के स्क्रीनशॉट के बीच एक तुलना है.

चंदौली जिले में घटी इस घटना की रिपोर्टिंग दैनिक जागरण, हिंदुस्तान और अमर उजाला में भी की गई है.

भ्रामक पोस्ट के बारे में चंदौली पुलिस के एक प्रवक्ता ने AFP को बताया, "वायरल दावा गलत है, उन तीन लड़कों को एक मोबाइल की दुकान में चोरी के आरोप में दुकानदार की शिकायत पर पकड़ा गया था जिसके बाद पुलिस ने उनको पकड़कर बुरी तरह पीटा था. बाद में उन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था." 

चंदौली पुलिस ने भी 20 मार्च, 2022 को ट्विटर पर यहां पोस्ट किए गए एक बयान में वायरल दावे का खण्डन किया.

ट्वीट में लिखा है, "प्रकरण एक वर्ष से अधिक पुराना है जिसमें बच्चों के साथ किए गए अमानवीय व्यवहार के कारण तत्समय दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित करते हुए विभागीय कार्रवाई की जा चुकी है. कृपया पूर्ण तथ्य और स्पष्ट जानकारी के बिना किसी चीज को प्रसारित करने से बचें."