दिल्ली में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र और कर्यकर्ता 22 फ़रवरी, 2016 को नेहरू की मूर्ति के पास ओपन लेक्चर सुनते हुए ( AFP / CHANDAN KHANNA)

जामिआ मिलिआ इस्लामिआ के छात्रावास की तस्वीर ग़लत दावे के साथ वायरल

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सोशल मीडिया पर एक बहुमंजिला इमारत की तस्वीर को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि ये जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में स्थित एक हॉस्टल है जिसमें कश्मीर के मुस्लिम छात्रों को मुफ़्त में रहने की सुविधा मिलती है. हालांकि ये दावा गलत है; ये तस्वीर जामिआ मिलिआ इस्लामिआ विश्वविद्यालय के एक हॉस्टल की है न कि JNU की. जामिया प्रशासन के मुताबिक़ ये हॉस्टल पूरी तरह से लड़कियों का है और देश के सभी क्षेत्रों और धर्मों के स्टूडेंट्स के लिए समान तौर पर उपलब्ध है जिसमें वो निर्धारित फीस जमा करके ही रहते हैं.

फ़ेसबुक पर इस दावे के साथ बिल्डिंग की ये तस्वीर यहां 23 अप्रैल, 2022 को शेयर की गई है.

पोस्ट के कैप्शन में लिखा है: "ये कोई फाइव स्टार होटल नहीं है. ये जेएनयू का एक हॉस्टल है जिसे कांग्रेस सरकार ने 2012 में कश्मीर के मुस्लिम छात्रों के लिए बनाया था. इसमें 400 कमरे हैं और इस हॉस्टल में कोई भी हिंदू नहीं रह सकता. कश्मीर के मुस्लिम छात्र इस हॉस्टल में भारतीयों के टैक्स के पैसे पर फ्री में रहकर पढ़ाई करते हैं. पढ़ाई पूरी करने के बाद यही लोग भारत के खिलाफ नारेबाजी करते हैं."

भ्रामक पोस्ट का 4 मई, 2022 को लिया गया स्क्रीनशॉट

इस तस्वीर को बिलकुल इसी दावे के साथ फ़ेसबुक पर यहां, यहां और यहां शेयर किया गया है.

हालांकि दावा गलत है. 

बिल्डिंग की तस्वीर

वायरल पोस्ट में दिख रही तस्वीर JNU की नहीं बल्कि जामिआ मिलिआ इस्लामिआ के एक हॉस्टल की है.

गूगल पर एक रिवर्स इमेज सर्च में इस बिल्डिंग की ओरिजिनल तस्वीर 30 अप्रैल, 2018 के एक ट्वीट में पोस्ट की हुई मिली.

ट्वीट के कैप्शन में लिखा है: "लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जामिया मिल्लिया इस्लामिया का जम्मू और कश्मीर हॉस्टल बनकर तैयार है. महबूबा मुफ्ती और राजनाथ सिंह जी का बहुत शुक्रिया."

नीचे भ्रामक फेसबुक पोस्ट (बाएं) और 2018 में ट्विटर में पोस्ट की गई तस्वीर (दाएं) के स्क्रीनशॉट के बीच एक तुलना है.

भ्रामक फेसबुक पोस्ट (बाएं) और 2018 में ट्विटर में पोस्ट की गई तस्वीर (दाएं) के स्क्रीनशॉट के बीच एक तुलना

ट्विटर में पोस्ट की गई हॉस्टल की तस्वीर को जूम करके थोड़ा ध्यान से देखने पर बिल्डिंग के गेट पर लिखा दिखाई देता है "जम्मू और कश्मीर हॉस्टल, जामिआ मिलिआ इस्लामिआ".

ईमारत की तस्वीर का स्क्रीनशॉट जिसपर AFP ने लाल रंग से घेरा लगाया है

जामिया यूनिवर्सिटी के जनसंपर्क अधिकारी अहमद अज़ीम ने AFP से स्पष्ट किया कि वायरल तस्वीर में दिख रही जम्मू और कश्मीर हॉस्टल की तस्वीर जामिया के ही हॉस्टल की है.

वायरल पोस्ट में किया जा ये दावा भी गलत है कि ये हॉस्टल 2012 में कांग्रेस की सरकार में बना. 

जामिया प्रशासन के मुताबिक़ हॉस्टल बनाने के लिए 2012 में कांग्रेस सरकार के समय एक समझौता हुआ था लेकिन इसका निर्माण मौजूदा भारतीय जनता पार्टी की सरकार के समय 2017 में हुआ.

जामिया प्रशासन द्वारा 16 नवंबर, 2017 को जारी हॉस्टल के उद्घाटन की प्रेस रिलीज भी यहां देखी जा सकती है जिसमे लिखा हैं कि हॉस्टल का उद्घाटन तत्कालीन गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह के हाथों हुआ था. 

जम्मू और कश्मीर हॉस्टल में प्रवेश लेने की अहर्ता

जामिया प्रशासन के अनुसार, ये हॉस्टल देश के सभी धर्मों और क्षेत्र से आने वाली महिला स्टूडेंट्स के लिए खुला है, और हॉस्टल में रहने के लिए सभी स्टूडेंट्स को निर्धारित फीस का भुगतान करना पड़ता है.

जामिया के एक अधिकारी ने कहा, "विश्वविद्यालय में ऐसी कोई भी सुविधा नहीं है जिसके तहत किसी भी छात्र को उसके धर्म या क्षेत्र के आधार पर मुफ़्त में रहने दिया जाए. हमारे छात्रावासों में सभी के लिए प्रवेश एक समान है और प्रत्येक छात्र को निर्धारित शुल्क भी जमा करना पड़ता है."

उन्होंने आगे कहा, "हम कभी कभी जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व के राज्यों के छात्रों को कुछ छूट दे देते हैं क्योंकि उन्हें बाहर रहने में काफी परेशानी होती है. लेकिन उन्हें भी निर्धारित शुल्क का भुगतान करना ही पड़ता है. ये कहना कि यहां जम्मू और कश्मीर के मुस्लिम छात्रों को मुफ़्त हॉस्टल मिलता है, गलत है. 

JNU में इस नाम का कोई हॉस्टल ही नहीं

जेएनयू की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार विश्विद्यालय परिसर में "जम्मू और कश्मीर हॉस्टल" नाम का कोई छात्रावास ही नहीं है. साथ ही ऐसी कोई नीति भी नहीं जिसमें हॉस्टल में प्रवेश लेने पर किसी भी स्टूडेंट को धर्म या क्षेत्र के आधार पर कोई छूट मिले.

JNU के छात्र कल्याण अधिष्ठाता (DSW) सुधीर सिंह ने कहा कि जेएनयू में जम्मू और कश्मीर के नाम से कोई हॉस्टल नहीं है और JNU का कोई भी हॉस्टल धर्म या क्षेत्र के आधार पर किसी भी स्टूडेंट को कोई विशेष छूट नहीं देता है.

सुधीर सिंह ने 29 अप्रैल, 2022 को AFP को बताया, "सभी छात्रों को हॉस्टल में कमरा लेने से पहिले फीस जमा करना अनिवार्य है. यह दावा सरासर गलत है कि यहां कश्मीर के मुस्लिम छात्रों को मुफ़्त हॉस्टल सुविधा मिलती है."