क्या वायरल तस्वीर में दिख रहे शख्स एकनाथ शिंदे हैं?

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सोशल मीडिया में ऑटो रिक्शा के साथ खड़े एक व्यक्ति की तस्वीर को सैकड़ों बार शेयर करते हुए यह दावा किया जा रहा है कि यह महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को दिखाती है जब वो अपनी युवावस्था में ऑटो रिक्शा चलाते थे. हालांकि ये दावा झूठा है; ये तस्वीर रिक्शा चालकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक यूनियन नेता बाबा कांबले की है. उन्होने AFP को बताया कि यह तस्वीर 1997 में ली गई थी.

तस्वीर को फ़ेसबुक पर 27 जुलाई 2022 को शेयर किया गया था. 

इस वायरल तस्वीर में एक व्यक्ति ऑटो रिक्शा के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है.

पोस्ट के कैप्शन में लिखा है: "जीवन कभी भी बदल सकता है. एक ऑटो चालक को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री भी बना सकता है, ये दोनों तस्वीरें महाराष्ट्र के एकनाथ शिंदे की हैं. कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिये, हमेशा कड़ी मेहनत करनी चाहिये"

गलत दावे से शेयर की जा रही फ़ेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट, 28 जुलाई 2022.

तस्वीर को इसी दावे के साथ फ़ेसबुक पर यहां, यहां और ट्विटर पर यहां शेयर किया गया है.

हालांकि ये दावा गलत है; ये तस्वीर महाराष्ट्र के एक रिक्शा यूनियन लीडर की है. 

रिक्शा ड्राइवर यूनियन नेता की तस्वीर

तस्वीर को कुछ कीवर्ड के साथ गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमने पाया कि इसे कुछ फ़ेसबुक यूज़र्स द्वारा 22 और 25 जुलाई, 2022 को यहां और यहां पोस्ट किया गया है.

दोनों ही पोस्ट में फ़ोटो में दिख रहे व्यक्ति की पहचान महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा चालकों के अधिकारों की वकालत करने वाले महाराष्ट्र रिक्षा पंचायत के संस्थापक बाबा कांबले के रूप में की गई है.

22 जुलाई की पोस्ट के मराठी भाषा में कैप्शन का अनुवाद है: "महाराष्ट्र रिक्षा पंचायत के संस्थापक और अध्यक्ष, मेहनती नेता बाबा कांबले की रिक्शा के साथ तस्वीर. यह तस्वीर 1997 की है जब वह रिक्शा चला रहे थे. वह अपने रिक्शा को सजा रहे हैं. पिंपरी रिक्शा स्टैंड पर श्रावण का पवित्र महीना."

नीचे गलत दावे से शेयर की जा रही पोस्ट (बाएं) और बाबा कांबले की पहचान करने वाले पोस्ट की तस्वीर (दायें) के  स्क्रीनशॉट की एक तुलना है:

बाबा कांबले ने 29 जुलाई को AFP को बताया कि वायरल तस्वीर उनकी ही है.

कांबले ने कहा, "यह 1997 की मेरी तस्वीर है, जब मैं ऑटो-रिक्शा चलाता था."

उन्होंने बताया कि पूरे महाराष्ट्र राज्य में रिक्शा चालक सावन के पवित्र महीने को मनाने के लिए अपने रिक्शा को सजाते हैं, उन्होंने भी उस समय ऐसा किया था.

उन्होंने कहा, "मैंने 2007 में रिक्शा चालकों के अधिकारों की वकालत करने के लिए एक संगठन बनाया था, तब से मैं लगातार ड्राइवरों के अधिकारों और उनकी समस्याओं के लिए लड़ रहा हूं," 

नीचे गलत दावे से शेयर की जा रही पोस्ट (बाएं) और बाबा कांबले की उनके सोशल मीडिया अकाउंट (दाएं) से ली गई एक तस्वीर की तुलना है:

कांबले ने कहा कि उन्होंने कुछ दिन पहले मराठी अख़बार लोकमत को एक इंटरव्यू दिया था जिसमें वो लोग साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले रिक्शा चालकों की सफ़लता की कहानी बता रहे थे. उसी में उन्होंने अपनी ये तस्वीर दी थी, संभव है ये तस्वीर प्रकाशित होने के बाद ही गलत दावे से वायरल हुई हो.

उन्होंने 25 जुलाई को अपने फ़ेसबुक पेज पर अखबार की कतरनें शेयर की थीं.