2017 में काबा पर पेट्रोल फेंकने का वीडियो गलत दावे से वायरल

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सोशल मीडिया पर एक वीडियो को अब तक हज़ारों बार देखा गया है, जिसे शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह एक ईरानी व्यक्ति को मक्का, सऊदी अरब में काबा पर दूध चढ़ाते हुए दिखाता है. साथ ही ये दावा भी गया है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति कहता है कि यह एक शिवलिंग है और उसके पूर्वज हिंदू थे. हालांकि ये दावा गलत है. यह वीडियो फ़रवरी 2017 से मीडिया रिपोर्टों में प्रसारित हो रहा है. वीडियो में दिख रहा व्यक्ति दरअसल सऊदी अरब का रहने वाला है और उसने काबा पर पेट्रोल फेंका था.

लगभग 25 सेकेंड के इस वीडियो को ट्विटर पर 23 अगस्त 2022 को शेयर किया गया है जहां इसे 90,000 से भी अधिक बार देखा जा चुका है. 

वायरल क्लिप में सफ़ेद कपड़े में एक व्यक्ति को अपने दाहिने कंधे पर पीले रंग की शॉल लपेटे हुए देखा जा सकता है. वो एक बोतल से दीवार पर कुछ छिड़कता दिखाई देता है. 

उसे अरबी भाषा में चिल्लाते हुए सुना जा सकता है: "दूर रहो, दूर रहो ... इन लोगों का कोई धर्म नहीं है, वे इस्लाम के नाम पर व्यापार कर रहे हैं, आपके धर्म और आपके राष्ट्र का व्यापार कर रहे हैं. जैसा उन्होंने मेरे साथ किया है. मैं जाने की कसम खाता हूँ, वे तुम्हें बेच रहे हैं,” उस व्यक्ति के पास खड़े लोगों का एक समूह वीडियो समाप्त होने से पहले ही उसे रोकना शुरू कर देता है.

पोस्ट के कैप्शन में लिखा है, “ईरान के युवक ने "मक्का" पर दूध चढ़ाया और बोला हमारे पूर्वज "हिन्दु" थे और ये "शिवलिंग" है. जय भोलेनाथ जी.”

गलत दावे से शेयर की जा रही पोस्ट का स्क्रीनशॉट, 25 अगस्त 2022

वीडियो को इसी दावे से फ़ेसबुक पर यहां, यहां और ट्विटर पर यहां शेयर किया गया है. 

हालांकि ये दावा गलत है.

 काबा में पेट्रोल छिड़कने का वीडियो 

गूगल कीवर्ड सर्च से हमें 7 फ़रवरी, 2017 को स्थानीय सऊदी न्यूज़ वेबसाइट सब्क (sabq.org) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट मिली. रिपोर्ट में इस घटना के बारे में मस्जिद में तैनात सुरक्षा बलों के एक प्रवक्ता के हवाले से बताया गया है कि उस व्यक्ति ने खुद को पेट्रोल छिड़क कर आग लगाने की कोशिश की थी. 

बयान में कहा गया है, “सोमवार, 6 फ़रवरी 2017 को रात 11 बजे, काबा के पास के इलाके में तवाफ़ की रस्म के दौरान एक नागरिक को अपने कपड़ों के ऊपर पेट्रोल डालने के दौरान गिरफ़्तार किया गया था. उस व्यक्ति ने खुद को आग लगाने का प्रयास किया था.

"जैसे ही सुरक्षाकर्मियों ने उसे देखा, वे उसे रोक कर खुद को आग लगाने से पहले गिरफ़्तार करने में सफ़ल रहे. उसकी हरकतों से लग रहा था कि वह मानसिक रूप से बीमार है."

कई अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में 7 फ़रवरी, 2017 की इस घटना को यहां और यहां प्रकाशित किया गया है.

इंस्टाग्राम पर भी इस वीडियो को शेयर कर कैप्शन में लिखा गया है कि काबा पर पेट्रोल छिड़कने के दौरान एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया. 

नीचे गलत दावे से शेयर की गई ट्विटर पोस्ट (बायें), इस्लामिक इंफॉर्मेशन वेबसाइट की तस्वीर (बीच में) और इंस्टाग्राम पर शेयर किये गये वीडियो (दायें) के स्क्रीनशॉट के बीच तुलना है.

इस्लामिक इन्फॉर्मेशन वेबसाइट द्वारा प्रकाशित घटना के वीडियो के स्क्रीनशॉट में आदमी को एक बोतल पकड़े हुए देखा जा सकता है जिसमें लाल रंग का द्रव्य पदार्थ साफ़ नज़र आ रहा है.