वायरल वीडियो में राजनीति में भ्रष्टाचार पर बात करता यह शख्स आईपीएस ऑफ़िसर नहीं यूट्यूबर है

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एक वीडियो ट्विटर पर लाखों बार देखा जा चुका है जिसमें एक शख्स भारत के राजनीति में भ्रष्टाचार और अपराध के बारे में बात कर रहा है. बताया जा रहा है कि वो लखनऊ का एक आईपीएस अधिकारी है. ये दावा गलत है, वीडियो में दिख रहा शख्स कोई अधिकारी नहीं बल्कि एक यूट्यूबर है. उन्होंने AFP को बताया कि उनका यह वीडियो जुलाई 2020 का है. 

ट्विटर पर 6 मिनट 53 सेकंड का यह वीडियो 27 अगस्त, 2022 को पूर्व नेवी अधिकारी और लेखक हरिंदर सिंह सिक्का ने यहां शेयर किया.

वीडियो में एक शख्स भारतीय नेताओं पर दर्ज़ आपराधिक मामलों पर बोल रहा है.

वीडियो पर एक टेक्स्ट लगाया गया है जिसमें अंग्रेज़ी में लिखा हुआ है कि ये शख्स लखनऊ के आईपीएस ऑफ़िसर शैलजा कांत मिश्रा है.

यह शख्स आगे कई रिसर्च संगठनों का डाटा देता है और कहता है, “एडीआर (एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म) के शोध के मुताबिक एक नेता जिस पर कोई आपराधिक मामला है उसके जीतने की संभावना बाकियों से 3 गुना अधिक है.”

“CMS (सेंटर फ़ॉर मीडिया स्टडीज़) के मुताबिक भारत में 2019 के आम चुनाव में 50,000 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. भारत पूरी दुनिया में चुनाव पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाला देश है.”

एडीआर की जिस रिसर्च की बात वीडियो में की जा रही है उसे एडीआर ने यहां और उसके बाद इकनॉमिक टाइम्स ने यहां पब्लिश किया था. इकनॉमिक टाइम्स ने सीएमएस की रिसर्च पर भी रिपोर्ट छापी थी.

भारत की कई बड़ी घटनाओं को गिनवाते हुए हरिंदर सिंह ने ट्वीट में कहा, “कृपा हर देशवासी तक कड़वा सत्य पहुँचाए. आज़ादी के बाद से हम ग़ुलामों की तरह आपराधिक नेताओं को समर्पित हैं. इमर्जन्सी,ऑपरेशन ब्लूस्टार,1984 में सिखों की हत्या,गोदरा ट्रेन में हिंदुओं को ज़िंदा जलाना, दिल्ली में शराब पर छूट से पैसे कामना…? क़ुसूर हमारा है,हम नपुंसक हैं,नेता नहीं.”

कैप्शन में 1970 के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए 21 महीने की आपातकाल, सिख  अलगाववादी नेता संत जरनैल सिंह भिंडरावाले की भारतीय सेना द्वारा हत्या, 1984 में सिख विरोधी दंगे और 2002 में गुजरात के गोधरा में एक ट्रेन में जिंदा जलाए गए हिंदुओं की बात की गई है.

A screenshot of the misleading tweet taken on August 31, 2022

यह वीडियो 2020 से ही शेयर किया जाता रहा है जैसा कि फ़ेसबुक पर यहां और टि्वटर पर यहां देख सकते हैं. 

कई यूजर्स ने ट्वीट के कमेंट में बताया कि वीडियो में दिख रहा है शख्स कोई आईपीएस अधिकारी नहीं बल्कि यूट्यूबर नीतीश राजपूत है.

नितीश राजपूत के यूट्यूब पर दस लाख से ज़्यादा फॉलोअर्स हैं. उन्होंने ओरिजिनल वीडियो 26 जुलाई 2020 को पोस्ट किया था जिसका टाइटल है: अपराधी चुनाव क्यों जीतते हैं. नीतीश राजपूत. 

नितीश ने AFP को बताया कि वीडियो में वही नज़र आ रहे हैं.

उन्होंने कहा, “मैं एक यूट्यूबर हूं और अपनी एक कंपनी चलाता हूं. मैं वीडियो में राजनीति में बढ़ते अपराध की बात कर रहा था.”

आईपीएस अधिकारी

उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी शैलजा कांत मिश्रा वर्तमान में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद् (UPBTVP) में बतौर उपाध्यक्ष कार्यरत हैं.

नीचे यूट्यूबर नितीश राजपूत (बाएं) और आईपीएस ऑफ़िसर शैलजा कांत मिश्रा (दाएं) की तस्वीर की तुलना देख सकते हैं.