लंदन में हिजाब विरोधी प्रदर्शन का वीडियो ग़लत दावे से वायरल

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फ़ेसबुक और ट्विटर पर हज़ारों बार देखा जा चुका एक वीडियो इस दावे के साथ वायरल है कि इसमें बर्मिंघम, यूनाइटेड किंगडम में मंदिर में तोडफ़ोड़ करने वाले व्यक्ति को हिन्दुओं के एक समूह द्वारा पीटते हुए दिखाया गया है. ये दावा ग़लत है: ये वीडियो असल में लंदन का है जहां सितम्बर 2022 में ईरान सरकार और हिजाब के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी थी.

ये वीडियो ट्विटर पर 11 अक्टूबर, 2022 को यहां शेयर किये जाने के बाद 2,800 से ज़्यादा बार देखा जा चुका है.

इसके साथ कैप्शन में लिखा है, “इंग्लैंड के बर्मिंघम में मंदिर पर हमला करने वाले मोहमद रिजवान को पुलिस थाने से अदालत लेकर जा रही थी ये बात वहां रहने वाले हिन्दुओं को पता चल गयी , फिर क्या हुआ ---- आप खुद ही देख लो॥ हिन्दू जाग रहा है फिर चाहे किसी भी देश मे हो.”

दो मिनट 18 सेकंड के इस वीडियो में पुलिसवाले एक व्यक्ति को भीड़ से बचाने की कोशिश कर रहे हैं जिसपर बोतलों और अन्य चीज़ों से हमला किया जा रहा है.

वीडियो में स्थिति गंभीर होती दिख रही है जहां लोग पुलिस की गाड़ी को घेरकर उसपर पत्थरबाज़ी और बोतलों से हमला करते हुए नज़र आ रहे हैं.

भ्रामक पोस्ट का 12 अक्टूबर, 2022 को लिया गया स्क्रीनशॉट

ये वीडियो यूके में हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच हालिया हुए तनाव के बाद शेयर किया जा रहा है.

गार्डियन अख़बार के मुताबिक सेंट्रल इंग्लैंड के लेस्टर में “मार-पिटाई, धार्मिक प्रतीकों पर हमले और मंदिर-मस्जिदों के पास हुड़दंग मचाने की रिपोर्ट्स आयीं थीं.”

बीबीसी के मुताबिक ये हिंसात्मक गतिविधियां बर्मिंघम से छः किलोमीटर दूर स्मेथविक में भी हुईं थीं.

यही वीडियो भ्रामक दावे के साथ ही फ़ेसबुक पर यहां और यहां, और ट्विटर पर यहां शेयर किया गया. ट्विटर पर यहां इसी वीडियो का 45 सेकंड का क्लिप भी शेयर किया गया.

आपको बता दें ये दावा ग़लत है.

ईरानी दूतावास के सामने प्रदर्शन

गूगल पर कीवर्ड सर्च करने पर हमें ऑस्ट्रेलिया के आउटलेट news.com.au की 28 सितम्बर की एक न्यूज़ रिपोर्ट मिली. इसमें 22-वर्षीय ईरानी महिला महसा अमिनी की मौत के ख़िलाफ़ लंदन में विरोध प्रदर्शन की बात बताई गयी है.

महसा को सितम्बर में ईरान की नैतिक पुलिस ने सही से हिजाब नहीं पहनने के जुर्म में गिरफ़्तार किया था जिसके तीन दिन बाद उनकी मौत हो गयी. इसके बाद से ही ईरान के कड़े नियमों और हिजाब के खिलाफ़ पूरी दुनिया में प्रदर्शन किये जा रहे हैं.

वहीं news.com.au के मुताबिक वायरल वीडियो उत्तरपश्चिमी लंदन के किलबर्न में हो रहे प्रदर्शन का है. किलबर्न ईरानी दूतावास से करीब 3.8 किलोमीटर उत्तर की तरफ़ है.

रिपोर्ट में वही वीडियो देखा जा सकता है जो अब वायरल है. साथ ही वीडियो के कुछ स्क्रीनशॉट भी दिखाए गए हैं.

नीचे वायरल वीडियो के कुछ स्क्रीनशॉट (बाएं) की तुलना news.com.au द्वारा लगाए गए स्क्रीनशॉट (दाएं) से की गयी है:

वायरल वीडियो के कुछ स्क्रीनशॉट (बाएं) की news.com.au द्वारा लगाए गए स्क्रीनशॉट (दाएं)से तुलना

वीडियो में दिख रही यह जगह मेडा वेल नीचे गूगल के स्ट्रीट व्यू में साफ़ नज़र आती है:

नीचे सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रही जगह के स्क्रीनशॉट (बाएं) और गूगल स्ट्रीट व्यू में दिख रही जगह (दाएं) की तुलना में AFP ने रोड साइन, विस्टा फ़ार्मेसी और मैरियट होटल को चिन्हित किया है.

वायरल वीडियो में दिख रही जगह के स्क्रीनशॉट (बाएं) और गूगल स्ट्रीट व्यू में दिख रही जगह (दाएं) की तुलना में AFP ने रोड साइन, विस्टा फ़ार्मेसी और मैरियट होटल को चिन्हित किया है.

लंदन की मेट्रोपोलिटन पुलिस ने बताया कि ये झड़पें ईरानी दूतावास के पास मार्बल आर्क से पहले और फिर मेडा वेल में हुई जहां पास ही में इस्लामिक सेंटर ऑफ़ इंग्लैंड को निशाना बनाया गया था.

पुलिस ने बताया कि वो ईमारत की सुरक्षा करने में तो कामयाब रहे लेकिन इस क्रम में वो खुद घायल हो गए. इस हिंसात्मक टकराव पर बीबीसी और एलबीसी ने भी रिपोर्ट किया है.

AFP की एक रिपोर्ट में लंदन की मेट्रोपोलिटन पुलिस का बयान है जिसमें उन्होंने कहा है, “पुलिसवालों पर पत्थर, बोतलें और कई चीज़ें फेंकी गयीं जिससे वो घायल हो गए. कम से कम 5 पुलिसवाले अभी हॉस्पिटल में भर्ती हैं जिनमें टूटी हड्डियों वाले घायल भी शामिल हैं.”

पुलिस ने पहले भी बताया था कि ईरानी दूतावास के आगे बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हुए थे “जिनकी मंशा अशांति फैलाना है.”

पुलिस के एक प्रवक्ता ने 11 अक्टूबर को AFP को बताया, "ईरानी दूतावास के सामने हुई हिंसा में पुलिस ने 25 सितम्बर को 2 लोगों को गिरफ़्तार किया है."