
बेल्जियन आर्टिस्ट द्वारा बनाये बालों के झंडे की कृति ईरान के हिजाब विरोधी आन्दोलन से जोड़कर वायरल
- यह आर्टिकल एक साल से अधिक पुराना है.
- प्रकाशित 17 अक्टूबर 2022, 12h57
- 4 मिनट
- द्वारा Uzair RIZVI, एफप भारत
- अनुवाद और अनुकूलन Devesh MISHRA
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काले रंग के बालों से बने झंडे की इस तस्वीर को फ़ेसबुक पर 21 सितंबर 2022 को शेयर किया गया है.
तस्वीर के कैप्शन में लिखा है; “दुनिया की सबसे ताकतवर तस्वीर ईरान से निकली है, ईरान की महिलाओं ने अपने बाल काटकर उसका झंडा बनाकर शहर में लहराया है.”
पोस्ट में आगे लिखा है कि ईरान में 16 सितंबर, 2022 को देश की कुख्यात नैतिकता पुलिस द्वारा 22 वर्षीय महसा अमीनी को उसके बालों को न ढकने के लिए की गई कथित हत्या के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये.

ईरान में लगभग पिछले तीन सालों में कई युवा महिलाओं, विश्वविद्यालय के छात्रों और यहां तक कि स्कूली छात्राओं ने अपने हिजाब उतार दिए, अपने बाल काट दिए और विरोध प्रदर्शन करते हुए सुरक्षा बलों का सामना किया.
AFP की रिपोर्ट के अनुसार अधिकार समूहों (Rights groups) का कहना है कि प्रदर्शनों पर जारी कार्रवाई में बच्चों सहित कम से कम 108 लोग मारे गए हैं.
इस तस्वीर को फ़र्स्ट पोस्ट वेबसाइट के एक आर्टिकल में भी 21 सितंबर 2022 को प्रकाशित किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि यह ईरान के विरोध प्रदर्शन से है.
इसी तरह की एक तस्वीर फ़ेसबुक पर 24 सितंबर, 2022 को पोस्ट की गई है जिसके कैप्शन में लिखा है: "ईरानी महिलाओं द्वारा विरोध के रूप में काटे गये बाल का झंडा."

कलाकार ऐ वेईवेई और लेखिका तसलीमा नसरीन सहित कई प्रमुख हस्तियों ने "ईरानी महिलाओं के बालों के झंडे" के दावे वाले इस तस्वीर को ट्वीट किया जिसे 1,000 से अधिक बार शेयर किया गया है.
कई अन्य यूज़र्स ने इसी तरह के दावे के साथ इस तस्वीर को फ़ेसबुक पर यहां, यहां और ट्विटर पर यहां, यहां शेयर किया है.
हालांकि यह दावा गलत है.
एक गूगल रिवर्स इमेज सर्च में बेल्जियम की एक आर्ट गैलरी की वेबसाइट पर प्रकाशित एक प्रदर्शनी की पोस्ट पर उसी तस्वीर का स्टिल शॉट हमें मिला. इसके कैप्शन में लिखा है: "एडिथ डेकिंड्ट, ओम्ब्रे इंडिजेन पार्ट। 2, मार्टीनिक आइलैंड, 2014."
एडिथ डेकिंड्ट बेल्जियम की एक विज़ुअल आर्टिस्ट हैं जिन्होंने 2014 में "ओम्ब्रे इंडिगेन" नामक एक वीडियो इंस्टॉलेशन के हिस्से के रूप में बालों के झंडे को बनाया था.
इस प्रोजेक्शन को उनकी वेबसाइट पर यहां एक वीडियो में देखा जा सकता है, और यहां प्रदर्शनी की सूची के पृष्ठ 17 पर भी देखा जा सकता है.
प्रदर्शनी के कैटलॉग के पेज नंबर 17 के डिस्क्रिप्शन में लिखा है: "बालों से बनाये गए एक झंडे को ज़मीन में गाड़ कर डायमैंट कोस्ट, मार्टीनिक आइलैंड पर पत्थरों के ऊपर फ़िल्माया गया था."
मार्टीनिक द्वीप फ़्रेंच रिपब्लिक का एक अभिन्न हिस्सा है.
नीचे भ्रामक पोस्ट में शेयर की गई तस्वीर (बायें) और डेकिंड्ट की कलाकृति की वास्तविक तस्वीरों (दायें) के स्क्रीनशॉट की तुलना की गई है.


जून 2020 में प्रकाशित एक इंटरव्यू में डेकिंड्ट ने कहा कि उनकी यह कलाकृति लेखक और दार्शनिक एडौर्ड ग्लिसेंट के काम से प्रेरित थी, जो फ़्रांसिसी कैरिबियन के सबसे महत्वपूर्ण लेखकों में से एक थे और जिनके लेखन में उपनिवेशवाद, दासता, नस्लवाद और सांस्कृतिक विविधता के पहलू होते थे.
डेकिंड्ट के काम की मेजबानी करने वाली ब्रुसेल्स गैलरी ग्रेटा मेर्ट के एक प्रवक्ता मैगली विंस ने कहा कि यह तस्वीर ईरान में मौजूदा विरोध से संबंधित नहीं था.
AFP ने ईरान में चल रहे प्रदर्शनों से जुड़े कई अन्य गलत दावों का यहां और यहां फ़ैक्ट-चेक किया है.
