G20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरोध के दावे से वायरल ये तस्वीर एडिटेड है

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सोशल मीडिया पर एक एडिटेड तस्वीर शेयर करते हुए ये दावा किया जा रहा है कि 16 नवंबर को इंडोनेशिया के बाली में सम्पन्न हुई G20 बैठक के दौरान एक महिला ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विरोध करते हुए प्लेकार्ड दिखाया. हालांकि ये दावा गलत है. असल तस्वीर लेने वाले पत्रकार ने AFP को बताया कि यह तस्वीर जुलाई में अमेरिका में गर्भपात के अधिकारों के लिए कानूनी संरक्षण को खत्म करने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के विरोध के दौरान ली गई थी.

तस्वीर को ट्विटर पर 17 नवंबर, 2022 को शेयर किया गया है जिसे 1100 से भी अधिक बार रिट्वीट किया जा चुका है. इसमें एक महिला सड़क के बीच एक प्लेकार्ड पकड़े हुए खड़ी दिखाई दे रही है जिसपर लिखा है, "मोदी वापस जाओ ... फिर से मोदी वापस जाओ.”

पोस्ट के कैप्शन में दावा किया गया है कि यह इंडोनेशिया में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन को दिखाता है.

कैप्शन में लिखा है, "...अब तो इसको भी समझ जाना चाहिए की झोला उठा कर चल देने के दिन आ गए हैं.,"

गलत दावे से शेयर किये जा रहे ट्वीट का स्क्रीनशॉट, 18 नवंबर 2022

इंडोनेशिया के बाली में दो दिवसीय G20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाग लिया और अन्य सदस्य देशों के नेताओं से मुलाकात की.

शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी विरोधी प्रदर्शनों पर कोई विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट नहीं है मगर फिर भी कुछ यूज़र्स वायरल दावे पर विश्वास करते नज़र आएं.

एक यूजर ने कहा, "मोदी को अपना अपमान कराना है बस, पता नहीं ये वहां क्या करने जाता है."

एक अन्य यूजर ने लिखा, "वह भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए दिन में 18 घंटे काम कर रहे हैं! अब परिणाम देखें."

इस दावे को फ़ेसबुक पर यहां, यहां और ट्विटर पर यहां सैकड़ों बार शेयर किया जा चुका है.

हालांकि भ्रामक पोस्ट में शेयर की गई तस्वीर एडिटेड है. मूल तस्वीर जुलाई में ली गई है जो अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के गर्भपात के अधिकारों को रद्द करने के फ़ैसले पर विरोध दिखाती है.

अमेरिका में विरोध प्रदर्शन की तस्वीर

रिवर्स इमेज सर्च करने पर मूल तस्वीर हमें अमेरिकी पत्रकार वजाहत अली द्वारा 1 जुलाई, 2022 को अपने ट्विटर अकाउंट पर अपलोड की गई मिली.

तस्वीर में प्लेकार्ड पर लिखा है: "डेमोक्रेट और निर्दलीय लोगों को एकजुट होकर रिपब्लिकन्स के ख़िलाफ वोट देना चाहिए. इस नवंबर में ब्लू को वोट करें."

वजाहत अली ने AFP को बताया कि ये तस्वीर जून में अमेरिका में "रो V वेड" मामले को पलटने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का विरोध कर रही एक महिला की है.

यह साल 1973 का मामला है जिसने गर्भपात को अमेरिका में संवैधानिक अधिकार के रूप में स्थापित किया.

नीचे एडिटेड तस्वीर (बाएं) और वजाहत अली के ट्वीट में पोस्ट की गई तस्वीर (दाएं) के स्क्रीनशॉट की तुलना है.

अली ने AFP को बताया कि यह तस्वीर वर्जीनिया के अलेक्जेंड्रिया शहर में लिटिल रिवर टर्नपाइक और ब्यूरेगार्ड स्ट्रीट के चौराहे पर ली गई थी. गूगल स्ट्रीट व्यू पर वायरल फ़ोटो और उस जगह की तस्वीर के विश्लेषण से दोनों ही तस्वीरों में एक मेल खाने वाली भूरी इमारत दिखाई देती है.

नीचे अली द्वारा ट्विटर पर पोस्ट की गई तस्वीर (बाएं) और गूगल स्ट्रीट व्यू पर देखे गए स्थान की तस्वीर (दाएं) की तुलना है:

अमेरिकी महिलाओं के गर्भपात के अधिकार के कानूनी संरक्षण को रद्द करने के अदालत के रूढ़िवादी निर्णय के बाद अमेरिका में फ़ैसले के समर्थकों और आलोचकों के कई समूह बन गये.

डेमोक्रेट्स ने गर्भपात के अधिकारों के बचाव में मध्यावधि चुनाव में मतदाताओं को जुटाने के लिए इस फ़ैसले का इस्तेमाल भी किया.

मूल तस्वीर में भी लिखे टेक्स्ट में अमेरिकी मतदाताओं से नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी और स्वतंत्र उम्मीदवारों को समर्थन करने का आह्वान किया गया है.