रुसी आर्टिस्ट के काष्ठ हृदय कलाकृति की तस्वीर गलत दावे से शेयर की गयी

  • यह आर्टिकल दो साल से अधिक पुराना है.
  • प्रकाशित 31 जुलाई 2023, 14h12
  • अपडेटेड 16 जनवरी 2026, 11h55
  • 3 मिनट
  • द्वारा Anuradha PRASAD, एफप भारत
  • अनुवाद और अनुकूलन Anuradha PRASAD

सोशल मीडिया पोस्ट्स में लकड़ी के एक हृदय-रूपी आकृति की तस्वीर शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि भगवान जगन्नाथ की काठ की मूर्ति में रखी इस आकृति के अंदर भगवान कृष्ण का दिल रखा हुआ है जो आज भी धड़क रहा है. हालांकि ह्रदय के आकार वाली लकड़ी की ये कलाकृति रूसी आर्टिस्ट दिमित्री सायकलोव की रचना है. सायकलोव ने एएफ़पी को बताया कि उन्होंने 2001 में एनाटॉमी नामक कला प्रोजेक्ट के तहत ये कलाकृति बनाई थी जिसे पैरिस के आर्ट फ़ेयर में लगाया गया था.

लकड़ी से बने हृदय की तस्वीर को ट्विटर, जिसे 'X' के नाम से रिब्रांड किया गया है, पर 16 जून, 2023 को यहां शेयर करते हुए लिखा गया, “भगवान् कृष्ण ने जब देह छोड़ी तो उनका अंतिम संस्कार किया गया, उनका सारा शरीर तो पांच तत्त्व में मिल गया, लेकिन उनका हृदय बिलकुल सामान्य एक जिन्दा आदमी की तरह धड़क रहा था और वो बिलकुल सुरक्षित था.” 

“उनका हृदय आज तक सुरक्षित है, जो भगवान् जगन्नाथ की काठ की मूर्ति के अंदर रहता है और उसी तरह धड़कता है, ये बात बहुत कम लोगो को पता है.”

इस लम्बे पोस्ट में आगे कई दावे किये गए हैं.

ये दावा एक लोकप्रिय हिन्दू मान्यता पर आधारित है कि ओडिशा स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान कृष्ण का जीवित हृदय रखा हुआ है  (आर्काइव्ड लिंक्स यहां और यहां). 

इस ट्वीट को 6,500 से ज़्यादा बार रीट्वीट किया जा चुका है.

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भ्रामक पोस्ट का 20 जून, 2023 को लिया गया स्क्रीनशॉट

यूज़र्स द्वारा किये गए कमेंट्स से मालुम होता है कि उन्होंने इस दावे को सच माना है.

ये तस्वीर इसी दावे के साथ फ़ेसबुक पर यहां और यहां; और ट्विटर पर यहां और यहां सैकड़ों बार शेयर की गयी. 

हालांकि ये तस्वीर एक रूसी कलाकार द्वारा 2001 में बनाई गयी लकड़ी की कलाकृति की है.

काठ कलाकृति

गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर यही तस्वीर रूसी आउटलेट ब्यूरो 24/7 के 29 मार्च, 2013 के एक आर्टिकल में मिली. ये आर्टिकल 2013 पैरिस आर्ट फ़ेयर में प्रदर्शित रूसी कला का एक रिव्यु है (आर्काइव्ड लिंक).

इस रिव्यु के मुताबिक रूसी कलाकार दिमित्री सायकलोव की लकड़ी से बनी कलाकृति पैरिस में गैलरी रबुआन म्यूसियों में प्रदर्शित की गयी थी.  

आर्टिकल में लिखा है, “इस वर्ष पैरिस आर्ट फ़ेयर और ज़्यादा आकर्षक है क्योंकि अपने इतिहास में पहली बार यहां समकालीन रूसी कला का वास्तविक तौर देखने को मिला.”

“कुल 90 रूसी आर्टिस्ट्स को पैरिस आर्ट फ़ेयर ने एक्सहिबीट किया -- जिसमें रूसी और विदेशी गैलरी दोनों शामिल हैं.”

नीचे भ्रामक पोस्ट में शेयर की गयी तस्वीर (बाएं) और ब्यूरो 24/7 द्वारा छापी गयी तस्वीर (दाएं) की तुलना दिखाई गयी है:

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भ्रामक पोस्ट में शेयर की गयी तस्वीर (बाएं) और ब्यूरो 24/7 द्वारा छापी गयी तस्वीर (दाएं) की तुलना

फ़्रांस की एक समकालीन कला मैगज़ीन आर्ट्स हेब्दो मीदिआस ने भी लकड़ी से बनी इस कलाकृति की तस्वीर को छापते हुए इसे दिमित्री सायकलोव की कृति बताया है (आर्काइव्ड लिंक).

सायकलोव ने एएफ़पी को 25 जून को बताया कि ये कलाकृति उन्होंने एनाटॉमी नाम के कला प्रॉजेक्ट के तहत 2001 में बनाई थी. इसे 2002 में फ़्रांस में प्रदर्शित किया गया था. 

उन्होंने एएफ़पी को ई-मेल के ज़रिये बताया, “मैं पैरिस के गैलरी रबुआन म्यूसियों के साथ काम करता हूँ. इसी गैलरी में मेरी ये कलाकृति रखी गयी है.” 

सायकलोव ने एएफ़पी को अपने इस कलाकृति की एक तस्वीर भेजी जहां प्रदर्शनी में इसके साथ लकड़ी के कुछ अन्य आर्टवर्क भी लगे हुए हैं. 

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उनकी वेबसाइट पर भी इस आर्टवर्क की तस्वीर उनके पोर्टफ़ोलिओ में देखी जा सकती है (आर्काइव्ड लिंक).

नीचे उनकी वेबसाइट पर फ़ीचर की गयी आर्टवर्क की तस्वीर का स्क्रीनशॉट है.

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वेबसाइट पर फ़ीचर की गयी आर्टवर्क की तस्वीर
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