
अमेरिका में पेपर बैलट से चुनाव का सुझाव देते ट्रंप का एडिटेड वीडियो गलत दावे से वायरल
- प्रकाशित 20 मार्च 2025, 13h06
- 4 मिनट
- द्वारा Devesh MISHRA, एफप भारत
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फ़ेसबुक पर 2 मार्च, 2025 को शेयर किए गए वीडियो का कैप्शन है, "मोदी के चेहरे पर लगातार और टाइट चप्पलों की बौछार. मोदी, सबसे बेशर्म, सबसे गंदे, घमंडी और अपरिपक्व. हाल ही में नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनिया को बताया कि मोदी ने 140 करोड़ लोगों को धोखा देकर चुनाव जीता है. 2014 में, मोदी को पहले कांग्रेस पार्टी के खिलाफ फर्जी प्रचार करके और फिर ईवीएम मशीनों और पक्षपाती सीईसी द्वारा चुना गया था, न कि लोगों द्वारा. निस्संदेह, भारत मोदी-बीजेपी को खारिज करता है! शर्म करो, बीजेपी शर्म करो."
लगभग 32,000 से अधिक बार देखे जा चुके इस वीडियो में ट्रंप एक संबोधन में यह कहते हुए दिखाई देते हैं कि उन्हें क्यों लगता है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के इस्तेमाल की तुलना में पेपर बैलेट से मतदान करना बेहतर है.
वीडियो के ऊपर हिंदी और अंग्रेज़ी में लिखा है: "ट्रंप ने फिर से मोदी पर बोला हमला. ट्रंप ने कहा कि मोदी ने ईवीएम में धोखाधड़ी करके और 140 करोड़ लोगों को बेवकूफ़ बनाकर जीत हासिल की है. ईवीएम पर ये क्या बोल गये मोदी के मित्र?"
ये वीडियो मोदी द्वारा वाशिंगटन में एक राजनैतिक दौरे के समापन के बाद शेयर किया गया, जहां मोदी और ट्रंप ने दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने के समझौते पर सहमति जताई थी (आर्काइव्ड लिंक).

वीडियो को फ़ेसबुक और X पोस्ट्स में इसी तरह के दावों के साथ 2,000 से अधिक बार शेयर किया गया है.
भारत में विपक्षी दलों ने अक्सर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं, जिनका उपयोग भारत में लगभग हर स्तर के मतदान के लिये होता है. जबकि चुनाव आयोग ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें "100 प्रतिशत सुरक्षित" हैं (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां).
डोनाल्ड ट्रंप ने भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के उपयोग के बारे में कई बार चिंता जताई और कहा कि वे बैलेट पेपर की तुलना में कम सुरक्षित हैं, ऐसी कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं है जिसमें उन्होंने मोदी पर ईवीएम के जरिये चुनावों में धोखाधड़ी का आरोप लगाया हो (आर्काइव्ड लिंक).
बैलेट पेपर से मतदान का समर्थन
गूगल कीवर्ड सर्च करने पर हमने पाया गया कि ट्रंप ने ओवल ऑफ़िस में मोदी के बगल में बैठे हुए संवाददाताओं से कहा था कि उनका प्रशासन बैलेट पेपर चुनाव प्रणाली की ओर बढ़ना चाहता है.
उनसे पूछा गया था कि क्या उन्हें लगता है कि यूएस एजेंसी फ़ॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID), जिसके कार्यक्रमों में उन्होंने कटौती की है, की 2020 में अमेरिकी चुनावों और 2024 में भारतीय चुनावों में किसी भी तरह के हस्तक्षेप में कोई भूमिका थी (आर्काइव्ड लिंक).
इस बातचीत का एक वीडियो 14 फ़रवरी को पीबीएस न्यूजऑवर के वेरिफ़ाइड यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया था (आर्काइव्ड लिंक).
इस सवाल पर ट्रंप का जवाब 2020 के अमेरिकी चुनावों में कथित धांधली पर केन्द्रित था, भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के उपयोग का उन्होंने कहीं भी ज़िक्र नहीं किया.
उन्होंने कहा: "हम अब एक ऐसी प्रणाली पर जाने की सोच रहे हैं, जो बहुत अलग हो, जहां (हमारे पास) एक दिवसीय मतदान, मतदाता पहचान पत्र हो, और हमें ऐसा करना होगा, इसीलिये हम बैलेट पेपर से मतदान चाहते हैं."
ट्रंप और मोदी ने अपनी बैठक के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस की, और इसमें भी भारत द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के उपयोग का कोई ज़िक्र नहीं किया गया (आर्काइव्ड लिंक).
गवर्नर्स वर्किंग सेशन
आगे गूगल कीवर्ड सर्च करने पर हमने पाया कि गलत दावे की पोस्ट में शेयर किये वीडियो में ट्रंप 22 फ़रवरी को गवर्नर्स वर्किंग सेशन में पेपर बैलेट की वकालत करते हुए दिखाई दे रहे हैं.
राष्ट्रपति की पूरी टिप्पणी व्हाइट हाउस के वेरिफ़ाइड यूट्यूब चैनल पर अपलोड की गई है (आर्काइव्ड लिंक).
गलत दावे की पोस्ट में शेयर किया गया हिस्सा यूट्यूब वीडियो के 50:09 मिनट से लिया गया था.

ट्रंप ने अपने भाषण के पहले हिस्से में भारत या मोदी का मात्र एक जगह उल्लेख किया, जहां उन्होंने तथाकथित सरकारी दक्षता विभाग के "सरकारी सामान की बर्बादी, धोखाधड़ी और दुरुपयोग के खिलाफ़ युद्ध" पर चर्चा की.
40 मिनट के बाद वे कहते हैं, "मतदान के लिए भारत में मेरे मित्र प्रधानमंत्री मोदी को 21 मिलियन डॉलर दिए जा रहे हैं. हम भारत में मतदान के लिए 21 मिलियन डॉलर दे रहे हैं. हमारा क्या होगा?"
