वीडियो छत्तीसगढ़ के मंदिर में हुए रोपवे हादसे का है, वाराणसी का नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भारत की पहली शहरी रोपवे सेवा का ट्रायल रन अक्टूबर में शुरू हुआ. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए दावा किया गया कि पहली यात्रा के दौरान ही केबल कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई. लेकिन वीडियो में दिखाए गए कार्यक्रम को कवर करने वाले पत्रकार ने एएफ़पी को बताया कि वायरल क्लिप छत्तीसगढ़ में अप्रैल में हुई एक दुर्घटना की है.

फ़ेसबुक पर अक्टूबर 1 को शेयर की गई पोस्ट का कैप्शन है, "बनारस में मोदी जी ने 4 KM का रोपवे 800 करोड़ की लागत से बनवाया. उद्घाटन होते ही डिब्बा टूटकर नीचे गिरा और मजे की बात, इस डिब्बे में भाजपा नेता भी साथ में बैठा था. इतनी लागत और नतीजा-ज़मीन पर थड़ाम."

लगभग 26-सेकंड के इस वीडियो में पहले एक केबल कार को चलते हुए दिखाया गया है, फिर अचानक अगले सीन में एक गोंडोला (केबिन) को दुर्घटनाग्रस्त होते और घायलों को दिखाया गया है.

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट जिसमें एएफ़पी द्वारा लाल X मार्क जोड़ा गया है

वीडियो को इंस्टाग्राम और X पर भी इसी दावे के साथ शेयर किया गया है.

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार भारत की पहली शहरी सार्वजनिक परिवहन रोपवे का ट्रायल रन वाराणसी में 2 अक्टूबर को शुरू हुआ था (आर्काइव्ड लिंक).

शहर की आवागमन सुविधा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से बनाए जा रहे इस 3.8 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में 148 गोंडोला होंगे, जो प्रतिदिन लगभग 1 लाख यात्रियों को ले जा सकेंगे.

हालांकि यह वीडियो वास्तव में पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में हुई एक रोपवे दुर्घटना का है.

वीडियो के कीफ़्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर यही वीडियो अप्रैल 25, 2025 को इंस्टाग्राम पर अपलोड किया हुआ मिला (आर्काइव्ड लिंक).

पोस्ट का कैप्शन है, "डोंगरगढ़ में रोपवे की ट्रॉली टूटी, बाल-बाल बचे बीजेपी नेता, राजनंदगांव संजीवनी अस्पताल लाया गया था."

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गलत दावे की पोस्ट (बायें) और इंस्टाग्राम वीडियो के स्क्रीनशॉट की तुलना

वीडियो के कैप्शन में रिपोर्ट का क्रेडिट स्थानीय समाचार वेबसाइट Correct News CG के पत्रकार मोनाज देवांगन को दिया गया है, जिन्होंने एएफ़पी को बताया कि यह फ़ुटेज छत्तीसगढ़ में रिकॉर्ड किया गया था.

उन्होंने अक्टूबर 8, 2025 को कहा, "रोपवे अचानक टूट गया. इसमें सवार बीजेपी नेता समेत अन्य यात्री घायल हो गए थे जिसके बाद घायलों को पास के अस्पताल ले जाया गया."

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हादसा तब हुआ जब डोंगरगढ़ स्थित बम्लेश्वरी मंदिर जा रही एक केबिन कार तार से अलग होकर नीचे गिर गई, जिसमें कुछ बीजेपी नेताओं समेत कई श्रद्धालु घायल हुए (आर्काइव्ड लिंक्स यहां, यहां और यहां).

एएनआई ने 3 अक्टूबर को वाराणसी रोपवे सिस्टम के ट्रायल रन का एक वीडियो प्रकाशित किया था, जिसमें गोंडोला पर अलग रंग और डिजाइन दिखाई दे रही है, जो गलत दावे के वीडियो से मेल नहीं खाती (आर्काइव्ड लिंक).

उत्तर प्रदेश पुलिस ने भी अपने X अकाउंट पर इस गलत दावे को खारिज किया है (आर्काइव्ड लिंक).

एएफ़पी इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ी गलत सूचनाओं का फ़ैक्ट-चेक कर चुका है.

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