भारत में "मुस्लिमों द्वारा ट्रेन को नुकसान पहुंचाने" के दावे से वायरल ये वीडियो बांग्लादेश से है
- प्रकाशित 28 जनवरी 2026, 10h47
- 3 मिनट
- द्वारा Devesh MISHRA, Eyamin SAJID, एफप भारत, एफप बांग्लादेश
सोशल मीडिया पर एक वीडियो, जिसमें कुछ बच्चे प्लेटफ़ॉर्म पर खड़ी ट्रेन के कपलिंग से छेड़छाड़ करते दिख रहे हैं, इस गलत दावे से शेयर किया जा रहा है कि मुस्लिम बच्चे एक यात्री ट्रेन को नुकसान पहुंचा रहे हैं. जबकि वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने एएफ़पी को बताया कि यह फ़ुटेज बांग्लादेश की राजधानी ढाका में फ़िल्माया गया था और इसका भारत से कोई संबंध नहीं है.
इंस्टाग्राम पर 14 जनवरी 2026 को शेयर किए गए इस वीडियो का कैप्शन है, "हमें उस पाकिस्तान से डर नहीं लगता जो हमारी भारतीय सीमा से बाहर है, हमें उन हजारों छोटे-छोटे पाकिस्तान से डर लगता है जो भारत के अंदर है."
वीडियो में कई बच्चे प्लेटफ़ॉर्म पर खड़ी ट्रेन पर चढ़ते हुए दिखते हैं. एक बच्चे को पत्थर से ट्रेन की कपलिंग पर मारते और उसके जोड़ से छेड़छाड़ करते देखा जा सकता है.
वीडियो के ऊपर पीले रंग के बैनर पर लिखा है, "खतरा पाकिस्तानी सेना से नहीं, खतरा भारत में बैठे मजहबी विचारों से है."
वीडियो को इसी दावे से फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी शेयर किया गया है.
पोस्ट पर किये गये कमेंट्स में यूज़र्स ने लिखा, "भारत में जिहादी सोच की यही हालत है. बच्चों के दिमाग में पहले से ही आतंकवादी ट्रेनिंग भरी जा रही है."
एक अन्य कमेंट है, "यह इस्लामिक बर्बरता की जानी-पहचानी रणनीति है नाबालिगों से गंभीर अपराध करवाना. भारतीय रेलवे को इस पर ध्यान देना चाहिए."
हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो भारत से नहीं, बांग्लादेश से है.
गलत दावे के साथ शेयर किए गए वीडियो के की-फ़्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर इसका एक बेहतर संस्करण मिला, जो 28 दिसंबर 2025 को फ़ेसबुक पर पोस्ट किया गया था (आर्काइव्ड लिंक).
वीडियो के साथ बंगाली भाषा में लिखा गया है, "सभी लड़के ट्रेन पर हैं. बच्चे कमलापुर में काम कर रहे हैं."
कमलापुर, ढाका स्थित बांग्लादेश का एक रेलवे स्टेशन है (आर्काइव्ड लिंक).
कंटेंट क्रिएटर और स्थानीय पत्रकार अलामिन ने 21 जनवरी 2026 को एएफ़पी को बताया, "मैंने यह वीडियो 28 दिसंबर 2025 को कमलापुर स्टेशन पर फ़िल्माया था."
उन्होंने कहा, "जब ट्रेन प्लेटफ़ॉर्म पर आई, तो बच्चे इंजन की कपलिंग से लोहा निकालने की कोशिश कर रहे थे."
अलामिन ने यह भी बताया कि इलाके के बच्चे रेलवे स्टेशन के आसपास खेलते रहते हैं और कभी-कभी कुछ पैसे कमाने के लिए कर्मचारियों की मदद भी करते हैं.
बाद में अपने फ़ेसबुक पोस्ट पर किये गये कमेंट में अलामिन ने साफ़ किया कि सोशल मीडिया पर शेयर किये जा रहे दावे गलत हैं, वे बच्चे चोरी नहीं कर रहे थे.
इसके अलावा, वायरल वीडियो में दिख रही ट्रेन बांग्लादेश में चलने वाली यात्री ट्रेनों की तस्वीरों से मेल खाती है, जो एएफ़पी के आर्काइव में उपलब्ध हैं. कोच के किनारे लिखी बंगाली भाषा से भी इस बात की पुष्टि होती है कि वीडियो बांग्लादेश में ही फ़िल्माया गया है.
ट्रेन में चोरी से जुड़े इसी तरह के एक अन्य साम्प्रदायिक दावे को एएफ़पी ने पहले भी फ़ैक्ट-चेक किया है.
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