बांग्लादेश में "हिन्दू व्यक्ति के साथ अभद्रता" के गलत दावे से वीडियो वायरल

फ़रवरी 2026 में होने वाले आम चुनावों से पहले बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ़ हिंसा की कई घटनाएं सामने आयी हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए दावा किया गया कि इसमें एक हिंदू शिक्षक को जूतों की माला पहनाकर अपमानित किया जा रहा है. हालांकि स्थानीय पुलिस ने एएफ़पी को बताया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मुस्लिम है, जिसपर ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने अभद्रता की थी.

दिसंबर 25, 2025 को इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक हिंदी पोस्ट का कैप्शन है, "बंग्लादेश, सेवानिवृत्त हिन्दू शिक्षक की विदाई". 

पोस्ट में शेयर किये गए वीडियो में एक व्यक्ति के गले में जूतों की माला दिखाई देती है. उसके आसपास इस्लामी पोशाक पहने लोग नज़र आते हैं. 

वीडियो पर लिखे टेक्स्ट में दावा किया गया कि यह बांग्लादेश में एक 50 वर्षीय हिंदू शिक्षक को जूतों की माला पहनाए जाने का दृश्य है.

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गलत दावे से शेयर की गई इंस्टाग्राम पोस्ट का 30 दिसम्बर 2026 को लिया गया स्क्रीनशॉट, जिसमें एएफ़पी द्वारा लाल X मार्क जोड़ा गया है

यह फ़ुटेज ऐसे ही दावों के साथ X और फ़ेसबुक पर उस समय फैलाया गया जब 18 दिसंबर 2025 को ढाका के उत्तर में मयमनसिंह में हिंदू कपड़ा फ़ैक्ट्री कर्मचारी दीपूचंद्र दास की कथित ईशनिंदा के आरोपों के बाद हत्या कर दी गई थी (आर्काइव्ड लिंक). 

दास की हत्या उसी समय हुई, जब बांग्लादेश में हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे थे. ये प्रदर्शन ढाका में एक मस्जिद के बाहर छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी को गोली मारे जाने के बाद शुरू हुए थे. बाद में इलाज के दौरान सिंगापुर के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई (आर्काइव्ड लिंक). 

2024 के आंदोलन का एक अहम चेहरा रहे हादी फ़रवरी 2026 में होने वाले राष्ट्रीय चुनाव में लड़ने वाले थे.

भारतीय मीडिया के अनुसार, दिसंबर 2025 से अब तक बांग्लादेश में कम से कम 11 हिंदुओं की हत्या हुई है (आर्काइव्ड लिंक). 

हालांकि, यह वीडियो किसी हिंदू व्यक्ति को जूतों की माला पहनाए जाने का नहीं है. 

वीडियो के की- फ़्रेम्स पर किए गए गूगल रिवर्स इमेज सर्च से पता चला कि इसी वीडियो के स्क्रीनशॉट 15 जून 2025 को स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुए थे (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां). 

इन रिपोर्ट्स में उक्त व्यक्ति की पहचान सेवानिवृत्त सामुदायिक मेडिकल अधिकारी अहमद अली के रूप में की गई. बताया गया कि मध्य बांग्लादेश के राजबाड़ी इलाके में पैगंबर मोहम्मद के बारे में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में भीड़ ने उन पर हमला किया था. पुलिस ने मौके पर पहुंच के भीड़ को शांत किया. 

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट (बाएं) एवं स्थानीय मीडिया में प्रकाशित वीडियो के स्क्रीनशॉट की तुलना

राजबाड़ी ज़िले के बलियाकांदी पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी मो अब्दुर रब तालुकदार ने 15 जनवरी को एएफ़पी को बताया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति एक सेवानिवृत्त मुस्लिम चिकित्सा अधिकारी है. 

उन्होंने कहा, "15 जून 2025 को उस व्यक्ति के खिलाफ़ ईशनिंदा के आरोपों को लेकर एक मामला दर्ज किया गया था."

बांग्लादेशी मुख्य सलाहकार के प्रेस कार्यालय ने भी जून 2025 में इसी वीडियो का इस्तेमाल कर फैलाए गए एक समान दावे का खंडन किया था (आर्काइव्ड लिंक

एएफ़पी पहले भी बांग्लादेश में हिंसा से जुड़े अन्य दावों को फ़ैक्ट चेक कर चुका है. 

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