डेनमार्क की संसद में 'ट्रंप का मजाक उड़ाने' के दावे से शेयर किया गया वीडियो पुराना है
- प्रकाशित 16 मार्च 2026, 10h29
- 3 मिनट
- द्वारा एफप इंडोनेशिया
- अनुवाद और अनुकूलन Akshita KUMARI, एफप भारत
डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2026 में ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के अधिकार पर सवाल उठाया और कहा कि नोबेल पुरस्कार से वंचित किए जाने के बाद अब उन्हें शांति में कोई दिलचस्पी नहीं है. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में डेनमार्क के प्रधानमंत्री और सांसदों को अमेरिकी राष्ट्रपति की इन टिप्पणियों का मज़ाक उड़ाते हुए नहीं दिखाया गया है. असल में यह क्लिप 2019 की है और इसमें संसद में राज्य द्वारा सर्कस के जानवरों की खरीद पर बातचीत के दौरान एक टिप्पणी पर हंसते हुए दिखाया गया है.
फ़ेसबुक पर 26 जनवरी, 2026 को शेयर की गई एक पोस्ट के कैप्शन का एक हिस्सा है, "अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह बयान देकर कि वह डेनमार्क से कंट्रोल लेना चाहते हैं (कथित तौर पर नोबेल पुरस्कार न मिलने की वजह से) बहुत से देशों के नागरिकों को हैरान किया है."
कैप्शन में आगे लिखा है, "इस मुद्दे पर डेनिश संसद में भी चर्चा हुई, जहां के सांसदों ने ट्रंप के इस बेतुके दावे की बहुत खिल्ली उड़ाई."
गलत दावे से शेयर की गई क्लिप में डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन संसद कक्ष में दर्जनों लोगों के साथ पोडियम पर हंसती हुई दिखाई दे रही हैं.
ये वीडियो फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर तब शेयर हुआ जब नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर को ट्रंप द्वारा एक संदेश भेजा गया जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के नियंत्रण पर सवाल उठाया था (आर्काइव्ड लिंक).
अमेरिकी राष्ट्रपति ने 19 जनवरी के अपने संदेश में यह भी कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नजरअंदाज किए जाने के बाद, स्वायत्त क्षेत्र पर कब्जा करने के अपने अभियान को तेज करते हुए, वह अब "पूरी तरह से शांति" के बारे में सोचने के लिए बाध्य महसूस नहीं करते हैं.
ट्रम्प ने बार-बार यह दावा किया है कि कई संघर्षों को सुलझाने में उनकी भूमिका के लिए वे नोबेल पुरस्कार के "हकदार" हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह दावा काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है (आर्काइव्ड लिंक).
नोबेल समिति ने 2025 में यह पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को दिया, जिन्होंने बाद में जनवरी 2026 में व्हाइट हाउस की यात्रा के दौरान ट्रम्प को यह पुरस्कार प्रदान किया (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां).
वीडियो को इसी दावे से अंग्रेजी, इतालवी, पोलिश, पुर्तगाली, स्पेनिश और जर्मन सहित अन्य भाषाओं में भी शेयर किया गया है.
लेकिन यह वीडियो वास्तव में 2019 का है और नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ ट्रम्प की हालिया बातचीत से इसका कोई संबंध नहीं है.
गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो के की-फ़्रेम्स को गूगल पर कुछ कीवर्ड्स के साथ रिवर्स इमेज सर्च करने पर 11 अक्टूबर, 2019 को पोलैंड में डेनमार्क दूतावास के आधिकारिक फ़ेसबुक पेज पर अपलोड किया गया एक समान वीडियो मिला (आर्काइव्ड लिंक).
वीडियो पर लिखा है, "मेटे फ्रेडरिक्सन सर्कस के हाथियों की सरकारी खरीद के बारे में बात कर रही हैं."
डेनिश भाषा में एएफ़पी के एक पत्रकार ने बताया कि वीडियो में फ्रेडरिक्सन यह बता रही हैं कि सरकार ने शुरू में चार हाथी खरीदने की योजना बनाई थी, लेकिन अंततः एक ऊंट भी खरीद लिया. उन्होंने अपने भाषण में ट्रंप का कहीं भी जिक्र नहीं किया है.
उनके भाषण के वीडियो में अंग्रेजी सबटाइटल भी मौजूद हैं, जिसके अनुसार सरकार ने ऊंट को इसलिए खरीदा क्योंकि उसे पता चला कि वह एक हाथी का "सबसे अच्छा दोस्त" था.
यूरोप के टेलीविजन समाचार नेटवर्क, यूरोन्यूज़ ने 10 अक्टूबर, 2019 को इस हंसी-मजाक भरी बैठक पर एक वीडियो रिपोर्ट भी प्रकाशित की (आर्काइव्ड लिंक).
हेडलाइन में लिखा है, "डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन 3 अक्टूबर को संसद सत्र के दौरान भाषण देते समय जोर से हंस पड़ीं."
अमेरिकी प्रसारक एनबीसी न्यूज़ वर्ल्ड ने भी इस फ़ुटेज पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जबकि डेनिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि सरकार ने सर्कस से जानवरों को इसलिये खरीदा था क्योंकि सर्कस को उन्हें रखने की अनुमति नहीं थी (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां).
एएफ़पी ने पहले भी इसी फ़ुटेज से जुड़े अन्य गलत दावों को यहां ,और यहां फ़ैक्ट चेक किया है.
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