इराक़ में धार्मिक समारोह और हिज़्बुल्लाह नेताओं के अंतिम जुलूस को ईरान में ख़ामेनेई की मौत पर जुटी भीड़ के दावे से शेयर किया गया

अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त अभियान में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की फ़रवरी 2026 में हत्या के बाद तेहरान में शोक मनाने वालों की भीड़ उमड़ी, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो वीडियो जो ख़ामेनेई के जनाज़े में उमड़ी भीड़ के दावे से शेयर किये जा रहे हैं, असल में गलत हैं. पहली क्लिप इराक़ की राजधानी बगदाद में शिया इमाम की याद में आयोजित वार्षिक "प्रतीकात्मक जनाज़े" की है जबकि दूसरी फ़ुटेज 2025 में लेबनान में मारे गए हिज़्बुल्लाह नेताओं की अंतिम यात्रा के जुलूस की है.  

फ़ेसबुक पोस्ट में 1 मार्च, 2026 को दो वीडियो शेयर किए गए थे.

पहली वीडियो में काले कपड़े पहने लोगों की भारी भीड़ एक बड़े सार्वजनिक चौक पर दिखाई दे रही है, जिसके बैकग्राउंड में एक मस्जिद का सुनहरा गुंबद देखा जा सकता है.

पोस्ट का आंशिक कैप्शन है, "इतिहास बन रहा है. ईरान की सरकारी मीडिया ने अमेरिका और इज़राइल के मिलकर किए गए मिलिट्री हमलों के बाद सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की ऑफिशियली पुष्टि की है."

वहीं दूसरी वीडियो में पीले कपड़े में लिपटे दो ताबूतों को कांच से ढकी गाड़ी में ले जाते हुए दिखाया गया है जबकि आसपास काफ़ी भीड़ मौजूद है.

इस पोस्ट का कैप्शन है, "सुप्रीम लीडर खामेनेई के अंतिम संस्कार का आखिरी पल."

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गलत दावे से शेयर किए गए पोस्ट्स का स्क्रीनशॉट, 6 मार्च 2025, जिस पर एएफ़पी द्वारा X साइन जोड़ा गया है

अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त हवाई हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई और कई शीर्ष सैन्य नेताओं की 28 फ़रवरी को हत्या कर दी गई (आर्काइव्ड लिंक).

ईरानी सेना द्वारा इज़रायल और अमेरिकी हितों की मेजबानी करने वाले कई खाड़ी देशों के खिलाफ़ जवाबी कार्रवाई करने के बाद यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया में फैल गया है. जबकि इज़रायली सेना ने ख़ामेनेई की हत्या के जवाब में तेहरान समर्थित समूह द्वारा रॉकेट हमले के बाद लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को भी निशाना बनाया है.

ईरानियन स्टेट मीडिया ने 1 मार्च को ख़ामेनेई की मौत की पुष्टि की, और कुछ ही घंटों के भीतर काले कपड़े पहने शोकाकुल लोग तेहरान के केंद्रीय एंगेलाब स्क्वायर पर सड़कों पर उतर आए (आर्काइव्ड लिंक).

राजधानी में कुछ अन्य ईरानियों ने इमारतों से खुशी में नारे लगाए, जबकि कुछ ने सड़कों पर गाड़ियों के हॉर्न बजाए और संगीत बजाया.

दोनों वीडियो को इंस्टाग्राम और X पोस्ट्स में इसी तरह के गलत दावों के साथ शेयर किया गया था.

हालांकि, वायरल हो रही दोनों वीडियो का ख़ामेनेई की मौत से कोई संबंध नहीं है.

इमाम मूसा अल-काज़िम का प्रतीकात्मक जनाज़ा

गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर इराक़ी ब्रॉडकास्टर कर्बला टीवी द्वारा 15 जनवरी को फ़ेसबुक पर अपलोड किया गया एक समान फ़ुटेज मिला (आर्काइव्ड लिंक).

इस क्लिप में, गलत दावे की पोस्ट में दिखाई गई उसी गुंबददार इमारत के सामने एक विशाल भीड़ उसी हरे रंग के ताबूत को ले जाती हुई दिखाई दे रही है.

अरबी भाषा के कैप्शन में कहा गया है कि यह दृश्य इराक के बगदाद स्थित पवित्र काज़िमिया श्राइन पर आयोजित एक "प्रतीकात्मक जनाज़े" का है, जो शिया इस्लाम के 12 सम्मानित इमामों में से सातवें इमाम मूसा अल-काज़िम जिन्हें "अन्यायपूर्ण ढंग से जहर दिया गया"  था, की मृत्यु की याद में किया जा रहा है.

बगदाद में, शिया धार्मिक यात्री हर साल इस आयोजन के लिए सुनहरे गुंबद वाले श्राइन पर बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं, ताकि उस व्यक्ति को श्रद्धांजलि दे सकें, जिन्हें आठवीं शताब्दी में जेल में जहर दिया गया था और वहीं दफ़नाया गया है (आर्काइव्ड लिंक).

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गलत दावे से शेयर की गई वीडियो (बाएं) और कर्बला टीवी द्वारा प्रकाशित वीडियो के स्क्रीनशॉट की तुलना

यह फ़ुटेज बगदाद स्थित स्राइन की गूगल स्ट्रीट व्यू इमेजरी से भी मेल खाती है (आर्काइव्ड लिंक).

यह वीडियो रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी के एक फोटोग्राफ़र द्वारा 15 जनवरी को ली गई तस्वीरों से भी मेल खाता है (आर्काइव्ड लिंक).

स्टेट मीडिया द्वारा ख़ामेनेई की मृत्यु की पुष्टि होने के बाद, एएफ़पी की तस्वीरों और वीडियो में तेहरान और ईरान के अन्य हिस्सों में शोक मनाने वाले लोग ईरानी झंडे लिए हुए देखे जा सकते हैं (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां).

हसन नसरल्लाह का जनाज़ा

दूसरे क्लिप में, ध्यान से देखने पर पता चलता है कि ताबूत को ढकने वाले कांच पर लगा पेड़ के निशान वाला लाल और सफेद झंडा असल में लेबनान का राष्ट्रीय ध्वज है (आर्काइव्ड लिंक). भीड़ में मौजूद लोग पीले झंडे भी लिए हुए हैं जिन पर हरे रंग के अक्षर और प्रतीक चिन्ह बने हुए हैं, जो हिज़्बुल्लाह का झंडा है (आर्काइव्ड लिंक).

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फ़ेसबुक पर शेयर किए गए फ़र्जी वीडियो का स्क्रीनशॉट, लेबनान का राष्ट्रीय ध्वज और हिज़्बुल्लाह का ध्वज एएफ़पी द्वारा हाइलाइटेड

गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो के की-फ़्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर फ़रवरी 2025 में लेबनान की कुछ मिलती-जुलती तस्वीरें मिलीं जिनमें हिज़्बुल्लाह के दिवंगत नेता हसन नसरल्लाह का अंतिम संस्कार दिखाया गया है. नसरल्लाह की सितंबर 2024 में एक इज़रायली हमले में मौत हो गई थी (आर्काइव्ड लिंक).

नसरल्लाह ने तीन दशकों से अधिक समय तक हिज़्बुल्लाह का नेतृत्व किया था और बेरूत में उनके अंतिम संस्कार में हजारों लोग काले कपड़े पहने शोक सभा में शामिल हुए थे.

एएफ़पी ने भी नसरल्लाह और उनके चुने हुए उत्तराधिकारी हाशेम सफ़ीदीन, जिनकी एक अन्य इज़रायली हवाई हमले में मौत हो गई थी, के पीले ताबूतों को ले जा रही शवयात्रा की एक तस्वीर ली थी.

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23 फरवरी, 2025 को बेरूत में हिज़्बुल्लाह के शहीद नेताओं हसन नसरल्लाह और हाशेम सफ़ीदीन के ताबूतों को ले जा रहे वाहन के साथ शोकाकुल लोग अंतिम संस्कार जुलूस में चल रहे हैं (AFP / Ibrahim Amro)

स्टेट टेलीविजन ने रिपोर्ट किया कि ईरान ने 4 मार्च, 2026 को घोषणा की कि ख़ामेनेई के लिए तेहरान में आयोजित राजकीय जनाज़ा - जो मूल रूप से उसी शाम के लिए निर्धारित था - "अभूतपूर्व भीड़ की आशंका" के कारण स्थगित कर दिया गया है (आर्काइव्ड लिंक).

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से संबंधित गलत सूचनाओं पर एएफ़पी की रिपोर्टिंग यहां देखी जा सकती है.

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