इंदिरा गांधी के बयान के साथ वायरल अख़बार की यह कटिंग फ़र्ज़ी है

हाल फ़िलहाल में विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील की आलोचना की जिसमें उन्होंने मध्य पूर्व युद्ध के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़े असर को देखते हुए लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने को कहा. इसके बाद सोशल मीडिया पर द हिन्दू अख़बार की कटिंग शेयर करते हुए दावा किया गया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी 1967 में ऐसी ही अपील की थी. हालांकि द हिंदू अख़बार ने कहा कि वायरल तस्वीर फ़र्ज़ी है, यह उसके अख़बार का असली पेज नहीं है. अख़बार के 6 जून, 1967 के असली संस्करण का पहला पेज एकदम अलग था. 

द हिंदू के 6 जून 1967 के कथित फ़्रंट पेज की तस्वीर 13 मई 2026 को X पर शेयर की गई.जिसमें एक हेडलाइन थी: "सोना मत खरीदिए, इंदिरा ने लोगों से कहा; 'राष्ट्रव्यापी  पालन' की अपील."

पोस्ट का हिंदी कैप्शन है, "इंदिरा गांधी ने भी देशहित में लोगों से सोना न खरीदने की अपील की थी." 

इंदिरा गांधी 1966 से 1977 तक और फिर 1980 से 1984 में अपनी हत्या तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं (आर्काइव्ड लिंक). 

यह कथित अख़बार की कटिंग फ़ेसबुक और X पर उस समय वायरल हुई, जब विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी को सोना न खरीदने की अपील को लेकर घेरा. यह अपील अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुए मध्य पूर्व युद्ध के आर्थिक असर को कम करने के उद्देश्य से की गई (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां). 

मोदी ने इसके अलावा पेट्रोल-डीज़ल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने, गैरज़रूरी विदेशी यात्राओं से बचने और वर्क फ़्रॉम होम जैसी सलाह भी दी. उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल 50 प्रतिशत तक घटाने की अपील भी की. 

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट जिस पर एएफ़पी द्वारा X साइन जोड़ा गया है

हालांकि, गूगल पर कीवर्ड सर्च करने पर पता चला कि वायरल फ़्रंट पेज फ़र्ज़ी है. 

द हिंदू अख़बार ने 12 मई 2026 को अपने आधिकारिक X अकाउंट पर पोस्ट कर कहा कि वायरल कटिंग को डिजिटल तरीके से बनाया गया है (आर्काइव्ड लिंक). 

अख़बार ने लिखा, "हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह हमारे आर्काइव का असली पेज नहीं है."

अख़बार के लिए पॉलिटिक्स कवर करने वाले दो पत्रकारों ने भी 6 जून 1967 के असल प्रिंटेड फ़्रंट पेज का स्क्रीनशॉट वारयल कटिंग के साथ शेयर किया (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां). 

असल फ़्रंट पेज मुख्य रूप से अरब-इज़रायल युद्ध यानी 'सिक्स-डे वॉर', की खबरों से भरा था. इसी युद्ध के बाद इज़रायल ने गाज़ा, वेस्ट बैंक, गोलान हाइट्स और मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप पर कब्ज़ा कर लिया था (आर्काइव्ड लिंक). 

यह युद्ध संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम के बाद खत्म हुआ. बाद में 1982 में इज़रायल ने मिस्र से पूर्ण मान्यता के बदले सिनाई प्रायद्वीप लौटा दिया, जबकि गाज़ा पट्टी 2005 में फ़िलिस्तीनियों को वापस सौंपी गई. 

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द हिंदू के राजनीतिक संपादक द्वारा शेयर की गई X पोस्ट का स्क्रीनशॉट

फ़र्ज़ी संस्करण में अख़बार की टैगलाइन भी गलत लिखी गयी है. वायरल कटिंग में "Indian National Newspaper" लिखा है, जबकि असली टैगलाइन "India's National Newspaper" है. 

इसके अलावा, फ़र्ज़ी पेज में पांच कॉलम हैं जबकि असली फ़्रंट पेज आठ कॉलम वाले ब्रॉडशीट फ़ार्मेट में है. 

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वायरल कटिंग (बाएं) और असली कटिंग की तुलना का स्क्रीनशॉट

हालांकि, इंदिरा गांधी सरकार ने 1968 में सोने की खरीद पर सख्त कानून लागू किये थे (आर्काइव्ड लिंक). 

1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद कमज़ोर हुई अर्थव्यवस्था के चलते नागरिकों के लिए सोने की ईंटें और सिक्के रखना प्रतिबंधित कर दिया गया था. यह कानून 1990 में हटा लिया गया (आर्काइव्ड लिंक). 

एएफ़पी इससे पहले भी वैश्विक ऊर्जा संकट से जुड़े कई फ़र्ज़ी दावों को फ़ैक्ट चेक कर चुका है. 

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