पैराशूट लैंडिंग के पुराने वीडियो को मिडिल ईस्ट संघर्ष से जोड़कर शेयर किया गया
- प्रकाशित 21 अप्रैल 2026, 09h28
- 4 मिनट
- द्वारा Akshita KUMARI, Grace MOON, एफप भारत, एफप दक्षिण कोरिया, एफप मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका
अप्रैल 2026 में ईरान द्वारा अमेरिकी लड़ाकू विमान गिराए जाने के दावे के बाद से पैराशूट लैंडिंग के कुछ पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए ये कहा गया कि ये ईरान द्वारा बंदी बनाये गए यूएस पायलट को दिखाते हैं. हालांकि, इनमें से एक क्लिप लीबिया में सैन्य प्रशिक्षण के दौरान फ़िल्मायी गई थी, जबकि दूसरी एक बांग्लादेशी पैराग्लाइडर को दिखाती है जो गलती से पाकिस्तान के एक बंद हवाई अड्डे पर उतर गया था.
फ़ेसबुक पर 4 अप्रैल को शेयर किए गए वीडियो का कैप्शन है, "अमेरिकी पायलट को बंदी बनाए जाने का क्षण देखें."
क्लिप में एक व्यक्ति को पैराशूट के सहारे लैंड करते दिखाया गया है, जबकि अन्य लोग उसकी ओर दौड़ रहे हैं. वीडियो के ऊपर लिखा है, "ईरान ने अमेरिका के पायलेट को बंदी बनाया. विडियो अंत तक देखे."
एक अन्य वीडियो जिसमें एक व्यक्ति हाथ ऊपर उठाकर दूसरे व्यक्ति की ओर चलता हुआ दिखाई दे रहा है, 3 अप्रैल को फ़ेसबुक पर शेयर की गई थी.
पोस्ट का कैप्शन है, "अमेरिकी F-35 Lightning का पायलट को ईरानियों ने ज़िंदा पकड़ लिया हैं."
ईरानी सेना द्वारा 3 अप्रैल को एक अमेरिकी एफ़-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया गया. विमान के दो चालक दल -- एक पायलट और एक हथियार प्रणाली संचालक -- इजेक्ट होकर ईरानी क्षेत्र के भीतर अलग-अलग स्थानों पर उतरे, जिसके बाद एक हाई-रिस्क रेस्क्यू मिशन चलाया गया (आर्काइव्ड लिंक).
अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी जनरल डैन केन ने कहा कि 50 घंटे के जोखिम भरे अभियान के बाद विमान के दोनों क्रू सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया और वे "मित्र देश की टेरिटरी" में वापस आ गए हैं (आर्काइव्ड लिंक).
अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते से कुछ दिन पहले ही ईरान के ऊपर मार गिराया गया यह पहला अमेरिकी युद्धक विमान था (आर्काइव्ड लिंक).
अमेरिकी सेना ने 12 अप्रैल को कहा कि युद्धरत पक्षों के बीच पाकिस्तान में हुई वार्ता विफ़ल हो जाने के बाद वह सभी ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू करेगी (आर्काइव्ड लिंक).
जबकि ये क्लिप्स सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर कई भाषाओं में शेयर किए गए हैं लेकिन इनका मिडिल ईस्ट युद्ध से कोई संबंध नहीं है.
लीबिया में सैन्य अभ्यास
गलत दावे से शेयर की गई पहली वीडियो के कीफ़्रेम्स को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर एक क्लिप मिला जिसमें वही दृश्य दिखाया गया है, जिसे लीबियाई आउटलेट फ़वासेल मीडिया ने 2 मार्च को X पर शेयर किया था (आर्काइव्ड लिंक).
पोस्ट के कैप्शन का अनुवाद है कि इसमें एक सैनिक पैर टूटने के बावजूद पैराशूट से कूद रहा है और उतरने पर अन्य सैनिक उसका स्वागत करते हैं.
अन्य आउटलेट्स ने भी अलग एंगल से फ़िल्माए गए लैंडिंग के वीडियो प्रकाशित किए है (आर्काइव्ड लिंक).
एएफ़पी को एक और वीडियो मिला जिसमें समान दृश्य दिखाया गया है और इसे 1 मार्च को फ़ेसबुक यूज़र विसी अल-तिरा ने शेयर किया था, जिन्होंने कैप्शन में बताया कि उन्होंने पैराशूटिंग कोर्स सफ़लतापूर्वक पूरा कर लिया है (आर्काइव्ड लिंक).
उन्होंने एएफ़पी को बताया कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति वह खुद हैं. उन्होंने अपना नाम ईसा अली ईसा अल-तिरा बताया और कहा कि वह लीबियाई सेना के सदस्य हैं. उन्होंने आगे बताया कि पैराशूट प्रशिक्षण के दौरान उनका पैर टूट गया था और उनके साथी सैनिकों ने सुरक्षित उतरने में उनकी मदद की.
बांग्लादेशी पैराग्लाइडर
दूसरे वीडियो के कीफ़्रेम्स को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने से पता चला कि फ़ेसबुक पर 7 मई, 2025 को इसी वीडियो का हाई-रिज़ॉल्यूशन वर्ज़न शेयर किया गया था. इसके उर्दू-भाषा के कैप्शन में कहा गया है कि इसमें दो दिन पहले उत्तरी पाकिस्तान के चित्राल हवाई अड्डे पर एक पैराशूटिस्ट को उतरते दिखाया गया है (आर्काइव्ड लिंक).
यह फ़ुटेज उस वक़्त शेयर हुआ जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसी स्थिति के बीच घातक लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, ड्रोन और तोपों से हमले हुए थे, जिसके बाद मई 2025 में युद्धविराम के बाद लड़ाई समाप्त हुई (आर्काइव्ड लिंक).
फ़ेसबुक पोस्ट में यह भी कहा गया है कि वीडियो इस गलत दावे के साथ शेयर हुआ कि व्यक्ति एक भारतीय पायलट है, लेकिन इस दावे में "कोई सच्चाई नहीं" है.
एएफ़पी ने पाकिस्तान के चित्राल हवाई अड्डे को जियोलोकेट किया और गूगल मैप्स पर उपलब्ध तस्वीर से पहाड़, बिजली के खंभे और फेंस के समान दृश्यों को मिलाया (आर्काइव्ड लिंक).
एक अन्य रिवर्स इमेज सर्च से पता चला कि 24 मार्च, 2026 को "riad.khan.bd" हैंडल के एक यूज़र ने इंस्टाग्राम और फ़ेसबुक पर यह वीडियो शेयर किया था, जिसमें उसने खुद को क्लिप में दिख रहा पैराशूटिस्ट बताया था (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां).
यूज़र ने पोस्ट में कहा कि सैन्य हवाई अड्डे पर गलती से उतरने के बाद पाकिस्तानी गार्ड्स ने उसे बंदूक की नोक पर पकड़ लिया, लेकिन दस्तावेज़ों की जांच के बाद उसे रिहा कर दिया गया. घटना के बारे में विस्तार से उसने कई महीनों बाद तब बात की जब उसे पता चला कि सोशल मीडिया पोस्ट्स पर उसे पाकिस्तान में पकड़ा गया भारतीय पायलट बताया जा रहा है.
अकाउंट की पड़ताल से यह भी पता चलता है कि वह नियमित रूप से पैराग्लाइडिंग के वीडियो अपलोड करता है. हालांकि, एएफ़पी ने कमेंट के लिए यूज़र से संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.
एएफ़पी ने मिडिल ईस्ट युद्ध से जुड़े अन्य भ्रामक दावों को भी फ़ैक्ट चेक किया है.
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