ईरान द्वारा कतर में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमले का वीडियो असल में एआई जेनरेटेड है
- प्रकाशित 13 अप्रैल 2026, 14h09
- 3 मिनट
- द्वारा Pierre MOUTOT, एफप फ्रांस
- अनुवाद और अनुकूलन Akshita KUMARI, AFP India
फ़रवरी के अंत में ईरान ने अमेरिकी-इज़रायली हमलों के जवाब में इज़रायल और पड़ोसी खाड़ी देशों को निशाना बनाते हुए हमले किए. हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, जिसमें कतर में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमले का दावा किया गया है, असल में एआई जेनरेटेड है. कतर में अमेरिकी अड्डे पर हमला होने की कोई जानकारी नहीं है, और वीडियो में कई दृश्य विसंगतियां हैं जो इसके आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस टूल्स की मदद से बनाए जाने का संकेत देती हैं.
फ़ेसबुक पर 17 मार्च, 2026 को पोस्ट किए गए वीडियो का कैप्शन है, "कतर के अमेरिकी बेस हैदरियाह पर ईरान का जबरदस्त हमला - क्लोज-अप वीडियो में धमाकों की भयानक तस्वीरें!"
वीडियो में एक सैन्य अड्डा जैसी दिखने वाली लोकेशन पर दो मिसाइलें गिरती हैं जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बन जाती है.
ईरान ने फ़रवरी के अंत में अमेरिका और इज़रायल द्वारा किए गए संयुक्त हमलों के जवाब में खाड़ी क्षेत्र और कई पड़ोसी देशों पर मिसाइल हमले किए, जिसके बाद से ही यह क्लिप फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और X पोस्ट्स में शेयर की जा रही है (आर्काइव्ड लिंक).
कतर के रक्षा मंत्रालय ने 3 मार्च को बताया कि एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल ने मध्य पूर्व में स्थित सबसे बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डे, अल-उदैद एयर बेस को निशाना बनाया; हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है (आर्काइव्ड लिंक).
एएफ़पी ने रिपोर्ट किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से इस अड्डे को कम से कम दो बार निशाना बनाया गया है (आर्काइव्ड लिंक).
लेकिन "हैदरियाह" नामक अमेरिकी अड्डे पर हमले की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है, और यह कथित अड्डा 2024 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा जारी किए गए देश के बाहर मौजूद सैन्य अड्डों की आधिकारिक सूची में शामिल नहीं है (आर्काइव्ड लिंक).
वीडियो में कई विसंगतियां हैं, जैसे कि बैकग्राउंड ऑडियो का अचानक बंद हो जाना और आवाज़ों का असामान्य रूप से स्पष्ट होना, जो यह संकेत देती हैं कि वीडियो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाया गया था.
गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि प्रांगण के एक इमारत पर लहराता अमेरिकी झंडा मिसाइल हमले से ठीक पहले पूरी तरह से गायब हो जाता है.
विस्फोट के कारण आंगन में बिखरते मलबे के ढेर में से एक टुकड़ा कई बार आकार बदलता दिखाई देता है.
हाइव मॉडरेशन डिटेक्शन टूल का इस्तेमाल करके किए गए विश्लेषण के अनुसार फ़र्ज़ी वीडियो में "एआई-जेनरेटेड या डीपफ़ेक सामग्री होने की प्रचुर संभावना है" (आर्काइव्ड लिंक).
गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो के कीफ़्रेम्स को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर 16 मार्च को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया एक समान वीडियो मिला; यूज़र के बायो में स्पष्ट लिखा है कि वह एक "AI क्रिएटर" है (आर्काइव्ड लिंक).
वीडियो में उसे "AI" द्वारा बनाये जाने का डिस्क्लेमर भी शामिल है.
एएफ़पी ने कमेंट के लिए इंस्टाग्राम यूज़र से संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.
दोनों वीडियो बालकनी के एक ही कोने से फ़िल्माए गए लगते हैं, और इनमें वाहन और इमारतें भी एक जैसी दिखाई देती हैं. इससे यह संकेत मिलता हैं कि ये वीडियो जेनरेटिव एआई मॉडल का उपयोग करके समान निर्देशों के साथ बनाए गए थे.
एएफ़पी ने मध्य पूर्व युद्ध से जुड़े अन्य भ्रामक दावों को भी फ़ैक्ट चेक किया है.
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