कैमरा क्रू के साथ मज़दूरों से बात करते पीएम मोदी की यह तस्वीर एआई जेनरेटेड है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अप्रैल को असम में चुनाव से पहले एक चाय बागान का दौरा किया था. एक तस्वीर जिसमें उनके स्थानीय मज़दूरों के साथ बातचीत को एक बड़े फ़िल्म क्रू द्वारा शूट करते हुए दिखाया गया है, वास्तविक बताकर शेयर की जा रही है. हालांकि, यह असली नहीं बल्कि एआई से बनाई गई है. इस तस्वीर में कई गड़बड़ियां दिखती हैं और एक टूल ने भी इसके एआई-जेनरेटेड होने की संभावना बताई है. 

5 अप्रैल 2026 को X पर शेयर की गई इस तस्वीर के साथ कैप्शन है, "चाय बागान में भी सेट लगवा दिया मोदी जी ने."

तस्वीर में ऐसा दिखता है कि प्रधानमंत्री स्थानीय चाय मजदूरों के साथ बैठे हैं और इस बातचीत को कई कैमरों से फ़िल्माया जा रहा है. वहां लाइट्स, ऊपर लगे माइक्रोफोन, टेंट और स्टेज जैसी व्यवस्था दिखाई देती है, जिसे एक डायरेक्टर संभाल रहा है. 

यह तस्वीर उस समय वायरल हुई जब मोदी असम के डिब्रूगढ़ में चुनाव से पहले एक चाय बागान गए थे, जहां उन्होंने राज्य की मशहूर चाय उद्योग में  मज़दूरों के योगदान की तारीफ़ की थी (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां). 

असम में फ़िलहाल भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, 9 अप्रैल को वोटिंग हो चुकी है. इसके नतीजे 4 मई को घोषित होंगे.

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट जिसमें एएफ़पी द्वारा लाल X और एआई लेबल जोड़ा गया है

यह फ़ोटो फ़ेसबुक और X पर इसी तरह के दावे से शेयर की गयी, जहां लोगों के कमेंट से मालूम होता है कि उन्होंने इसे मोदी के दौरे की असली तस्वीर मान लिया है. 

एक यूज़र ने लिखा, "मोदी का एक और दिखावा."

एक अन्य कमेंट में कहा गया, "दिखावे के लिए चाय के पौधों को नुकसान पहुंचाया गया, बहुत दुखद है."

हालांकि इस तस्वीर में कई ऐसी गलतियां हैं जो आमतौर पर एआई से बनाई गई तस्वीरों में होती हैं. 

ध्यान से देखने पर पता चलता है कि मोदी और उनके आसपास मौजूद महिलाओं के चेहरे धुंधले हैं और लोगों के हाथ-पैर अजीब तरीके से मुड़े हुए या शरीर में मिलते हुए दिखते हैं. 

पीछे लगे बोर्ड और टेंट पर लिखा टेक्स्ट भी  समझ नहीं आता, जो एआई से बनी तस्वीरों की एक आम पहचान है.

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गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो के स्क्रीनशॉट, जिनमें विसंगतियों को एएफ़पी द्वारा हाईलाइट किया गया है

इसके अलावा, Hive Moderation नाम के एआई डिटेक्शन टूल से किए गए विश्लेषण में पाया गया कि यह वीडियो "संभावित रूप से AI से बना या डीपफ़ेक कंटेंट" हो सकता है (आर्काइव्ड लिंक). 

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Hive Moderation AI डिटेक्शन टूल से वीडियो के विश्लेषण का स्क्रीनशॉट

एएफ़पी पहले भी एआई से बने कंटेंट पर आधारित कई भ्रामक दावों का फ़ैक्ट चेक कर चुका है. 

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