इंडोनेशिया में भूकंप से फैली अफरा-तफरी के दावे से वायरल वीडियो एआई जेनरेटेड है
- प्रकाशित 14 अप्रैल 2026, 16h36
- 3 मिनट
- द्वारा Sachin BAGHEL, एफप भारत
अप्रैल 2, 2026 को पूर्वी इंडोनेशिया के तट पर आए 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद भारत में सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जाने लगा कि यह इंडोनेशिया में फैली अफरा-तफरी का दृश्य दिखाता है. हालांकि यह वीडियो एआई से बनाया गया है और जांच में इसमें कई ऐसी गलतियां मिलीं जो इसके एआई जेनरेटेड होने का सुबूत हैं.
भूकंप वाले दिन शेयर किए गए एक X पोस्ट में लिखा है, "इंडोनेशिया में 7.6 तीव्रता का भूकंप, दृश्य आप देख सकते हैं, सड़क दो हिस्सों में बंट गई है" (आर्काइव्ड लिंक).
वीडियो में घबराए हुए लोग दिखाई देते हैं और सड़क पर दरारें पड़ती नज़र आ रही है.
सुबह-सुबह आया यह झटका सुलावेसी और मलुकू द्वीप समूह के बीच मोलुक्का सागर में महसूस किया गया. इससे कुछ जगहों पर 75 सेंटीमीटर (2.5 फ़ीट) तक ऊंची लहरें उठीं और सुनामी की चेतावनी जारी की गई, जिसे बाद में वापस ले लिया गया (आर्काइव्ड लिंक).
मनाडो में एक इमारत गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, क्षेत्र के सर्च और रेस्क्यू प्रमुख जॉर्ज लियो मर्सी रंडांग ने एएफ़पी को बताया।
इंडोनेशिया और आसपास के देशों में अक्सर भूकंप आते रहते हैं क्योंकि यह इलाका प्रशांत महासागर के "रिंग ऑफ़ फ़ायर" में आता है, जहां टेक्टोनिक प्लेटें टकराती हैं.
2004 में आचेह प्रांत में 9.1 तीव्रता का भूकंप आया था, जिससे उठी सुनामी में हिंद महासागर के कई तटीय इलाकों में 2,20,000 लोगों की मौत हो गई थी.
इस वीडियो को X, फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर इंडोनेशिया का असली फ़ुटेज बताकर गलत तरीके से शेयर किया गया.
कमेंट्स से पता चलता है कि कई सोशल मीडिया यूज़र्स इसे सच मान बैठे हैं. एक यूज़र ने लिखा, "कई देश युद्ध में हैं और भूकंप आ रहे हैं, ऐसा लग रहा है जैसे दुनिया का अंत करीब है."
एक अन्य यूज़र ने वीडियो में लोगों के हिंदी बोलने का ज़िक्र करते हुए लिखा, "इंडोनेशिया में भारत के कई लोग रहते हैं, इसलिए वे हिंदी बोल रहे हैं."
एआई फ़ुटेज
वीडियो को ध्यान से देखने पर कई दृश्यात्मक खामियां दिखती हैं जो एआई से बनाए गए कंटेंट की पहचान होती हैं.
लोगों के हाथ विकृत दिखते हैं, जिनकी उंगलियां साफ़ या सही तरीके से बनी हुई नहीं लगतीं.
इसके अलावा, वीडियो में कथित तौर पर फैली घबराहट के बावजूद कुछ लोग सड़क में पड़ी दरारों पर आराम से चलते हुए दिखाई देते हैं.
Hive Moderation के एआई डिटेक्शन टूल से किए गए विश्लेषण में पाया गया कि यह वीडियो "संभवतः एआई-जेनरेटेड या डीपफ़ेक कंटेंट" है (आर्काइव्ड लिंक).
हालांकि, एएफ़पी इस वीडियो के सोर्स का पता नहीं लगा सका.
कीफ़्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च करने पर पता चला कि इसका एक शुरुआती वर्ज़न 2 अप्रैल को X पर शेयर किया गया था. एएफ़पी ने उस पेज से संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.
आपदाओं के बाद फैलने वाली एआई-आधारित भ्रामक सामग्री पर एएफ़पी के और फ़ैक्ट चेक यहां देखे जा सकते हैं.
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