ईरान पर इज़रायली मिसाइल हमले के दावे से शेयर किया गया वीडियो एआई जेनरेटेड है

ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी की 17 मार्च को एक इज़रायली हमले में मौत हो गई. लेकिन सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा एक वीडियो, जिसे इस हमले का बताया जा रहा है, असल में एआई जेनरेटेड है. यह क्लिप एक ऐसे अकाउंट द्वारा पोस्ट की गई है, जो मुख्य रूप से ईरान के खिलाफ़ 28 फ़रवरी को शुरू हुए संयुक्त अमेरिकी-इज़रायली युद्ध के एआई जेनरेटेड विज़ुअल्स पोस्ट करता है.

मार्च 31, 2026 को फ़ेसबुक पर शेयर किये गए वीडियो का कैप्शन है, "ईरान अपने अंतिम दौर में है क्योंकि इजरायल चुन-चुन करमार रहा है. ये हमला देखकर आप निश्चित रूप से सहम जायेंगे. ईरान का राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी इसी हमले में मारा गया. हमले की तीव्रता से आसपास की ईरानी धरती मानो हिल गई."

वीडियो में एक इमारत पर लगातार होते हवाई हमले दिख रहे हैं.

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गलत दावे से शेयर की गई फ़ेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट जिसमें एएफ़पी द्वारा लाल X और एआई लेबल जोड़ा गया है

वीडियो को इसी दावे से फ़ेसबुक और पर भी शेयर किया गया है. 

अमेरिका–इज़रायल और ईरान के बीच पांच सप्ताह से जारी संघर्ष को कई देश बातचीत के ज़रिये रोकने की कोशिश कर रहे हैं.  यह लड़ाई 28 फ़रवरी को अमेरिका और इज़रायल के ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुई थी. जवाब में ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद कर दिया और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हित से जुड़े ठिकानों पर हमले किए. ईरान ने 7 अप्रैल को अमेरिका और इज़रायल के साथ युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था (आर्काइव्ड लिंक).

युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका–इज़रायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई और देश के कई बड़े राजनीतिक और सैन्य नेता मारे गए हैं (आर्काइव्ड लिंक).

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने 17 मार्च को अली लारिजानी की मौत की पुष्टि की थी. इज़रायल ने कहा था कि वह एक हवाई हमले में मारे गए हैं (आर्काइव्ड लिंक).

लेकिन वायरल वीडियो उस हमले का नहीं है.

वीडियो के कीफ़्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर यही क्लिप कई हफ़्तों पहले 10 मार्च को इंस्टाग्राम पर अपलोड की गई मिली (आर्काइव्ड लिंक).

पोस्ट के कैप्शन में इसे स्पष्ट रूप से एआई-जेनरेटेड बताया गया है.

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गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो (बाएं) और 10 मार्च के इंस्टाग्राम वीडियो के स्क्रीनशॉट की तुलना, जिसमें AFP द्वारा AI लेबल और AI डिसक्लेमर को हाईलाइट किया गया है

यह वीडियो एक ऐसे अकाउंट से पोस्ट किया गया था, जो नियमित रूप से मिडिल ईस्ट युद्ध से जुड़े एआई-जेनरेटेड वीडियो शेयर करता है. 

अकाउंट चलाने वाले यूज़र ने नाम न बताने की शर्त पर 3 अप्रैल को एएफ़पी को बताया कि पोस्ट में दिया गया डिस्क्रिप्शन ही ओपनएआई के अब बंद हो चुके 'सोरा 2' वीडियो टूल के लिए इस्तेमाल किया गया एआई प्रॉम्प्ट था (आर्काइव्ड लिंक).

यूज़र ने यह भी कहा कि उनका इरादा "फ़र्जी खबर फैलाने का नहीं, बल्कि मनोरंजन के लिए" यह वीडियो शेयर करने का था.

वीडियो को ध्यान से देखने पर इसमें कई तकनीकी गड़बड़ियां दिखती हैं, जो अमूमन सिंथेटिक कंटेंट की पहचान मानी जाती हैं. 

जैसे मिसाइल गिरने के बावजूद आसपास की इमारतों को कोई नुकसान नहीं होता और एक व्यक्ति बिना घबराए सड़क पर चलता भी दिखता है, जबकि चारों ओर लगातार विस्फोट हो रहे हैं.

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गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो के स्क्रीनशॉट, जिनमें धमाकों के दौरान बिना किसी नुकसान के खड़ी इमारतें और शांति से चलता हुआ एक व्यक्ति AFP द्वारा हाईलाइट किया गया है.

इसके अलावा, Hive Moderation AI डिटेक्शन टूल द्वारा किए गए एक विश्लेषण में पाया गया कि इस वीडियो में "संभवतः एआई-जेनरेटेड या डीपफ़ेक सामग्री मौजूद है" (आर्काइव्ड लिंक).

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Hive Moderation AI डिटेक्शन टूल से वीडियो के विश्लेषण का स्क्रीनशॉट

एएफ़पी ने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध से जुड़े अन्य भ्रामक दावों का खंडन यहां किया है.

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