वाराणसी में अग्निपथ योजना के विरोध प्रदर्शन का वीडियो गलत दावे से शेयर किया गया
- प्रकाशित 17 अप्रैल 2026, 13h53
- 3 मिनट
- द्वारा Devesh MISHRA, एफप भारत
पश्चिम बंगाल में चुनाव से जुड़ी हिंसा का एक लंबा इतिहास रहा है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा बीच सड़क पर एक व्यक्ति की पिटाई का जो वीडियो सोशल मीडिया पर बंगाल के दावे से शेयर हो रहा है, उसका राज्य में होने वाले आगामी चुनावों से कोई सम्बन्ध नहीं है. यह क्लिप वाराणसी में फ़िल्मायी गई थी, और 2022 में अग्निपथ योजना के विरोध प्रदर्शनों की न्यूज़ रिपोर्ट्स में प्रकाशित की गई थी.
वीडियो 8 अप्रैल, 2026 को X पर इस दावे से शेयर किया गया: "ये हैं नजरुल इस्लाम टीएमसी कार्यकर्ता, मुर्शिदाबाद में हिंदूओं को वोट के लिए धमका रहा था। कुछ हिंदूओं का ईमान जागा और नजरूल इस्लाम दुम दबाकर भागा".
वीडियो में दो लोग एक व्यक्ति को बीच सड़क पीटते नज़र आ रहे हैं जबकि व्यक्ति भागने की कोशिश करता दिख रहा है.
यह वीडियो X और फ़ेसबुक पर भी इसी दावे से शेयर किया जा रहा है.
ज्ञात हो कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की सरकार है जिसका 23 और 29 अप्रैल को होने वाले दो चरणों के मतदान में भारतीय जनता पार्टी से कड़ा मुकाबला होने जा रहा है (आर्काइव्ड लिंक).
स्थानीय मीडिया ने इस राज्य में चुनाव से जुड़ी हिंसा के कई मामलों को बार‑बार रिपोर्ट किया है और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि चुनाव से पहले यहां 480 कंपनियों की अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी.
हालांकि, वायरल वीडियो को गलत दावे से शेयर किया गया है.
वाराणसी की घटना
वीडियो के कीफ़्रेम को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर इस वीडियो का पुराना संस्करण मिला, जिसे 17 जुलाई 2022 को ऑर्गनाइज़र वीकली पत्रिका ने X पर अपलोड किया था (आर्काइव्ड लिंक).
पोस्ट का कैप्शन है: "बनारस में दुकानों को बंद कराने की कोशिश कर रही हिंसक भीड़ को स्थानीय लोगों ने पीटा."
पोस्ट में "Agnipath" हैशटैग भी था. यह युवाओं को सेना में भर्ती करने की नई योजना की घोषणा से जुड़ा है जो उस समय की गई थी (आर्काइव्ड लिंक).
इस योजना के ऐलान के बाद देश के कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए. आम तौर पर देश में सेना की नौकरी को जीवनभर की नौकरी माना जाता था लेकिन नयी योजना में इसकी अवधि घटाकर चार साल कर दी गई है.
इस योजना के तहत भर्ती किए गए नए जवानों में से केवल एक‑चौथाई को ही कार्यक्रम के अंत में स्थायी नौकरी मिलेगी. बाकी को पेंशन जैसी सुविधाएँ नहीं मिलेंगी, जो मौजूदा सैनिकों को मिलती हैं (आर्काइव्ड लिंक).
लोकल समाचार चैनल NBT यूपी‑उत्तराखंड ने भी इस वीडियो को विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्ट में शामिल किया था (आर्काइव्ड लिंक).
एएफ़पी ने वीडियो के सोर्स के बारे में जानकारी के लिए ऑर्गनाइज़र वीकली और NBT यूपी‑उत्तराखंड से संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है.
एएफ़पी ने गूगल मैप्स के जरिये भी इस बात की पुष्टि कर ली है कि यह वीडियो उत्तर प्रदेश में शूट किया गया था न कि बंगाल में. हमने वाराणसी की उसी सड़क के गूगल स्ट्रीट व्यू से इसकी तुलना की है (आर्काइव्ड लिंक).
वीडियो और गूगल स्ट्रीट व्यू, दोनों में ही कुछ खास समानतायें दिखाई देती हैं, जैसे कि दीवार पर बना एक खास लाल रंग का विज्ञापन और एक बड़ा पेड़.
एएफ़पी ने पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव से जुड़ी अन्य फर्ज़ी दावों को यहां और यहां फ़ैक्ट-चेक किया है.
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