बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन का वीडियो बंगाल चुनाव से जोड़कर वायरल

पश्चिम बंगाल में अप्रैल 2026 में होने वाले चुनावों की तैयारियों के बीच राजनीतिक पार्टियों के समर्थकों के बीच झड़पों की खबरें आई हैं, लेकिन ऑनलाइन शेयर हो रहा एक फ़ुटेज जिसमें दावा किया गया है कि ये पुलिस द्वारा तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पीटते दिखाता है, असल में चुनावों से सम्बंधित नहीं है. यह वीडियो बांग्लादेश में कुछ महीने पहले एक युवा नेता की मौत की जांच की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान फ़िल्माया गया था.

फ़ेसबुक पोस्ट में 6 अप्रैल को शेयर किये गए वीडियो का कैप्शन है, "बंगाल में चुनावी माहौल गरम! पश्चिम बंगाल में चुनाव के बीच सख्ती बढ़ती नजर आ रही है. खबरों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर Mamata Banerjee से जुड़े गुंडों पर कार्रवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाया."

वीडियो के ऊपर लिखा है: "बंगाल में सीएम ममता के गुंडों की कमांडो ने कर दी सर्विसिंग."

गलत दावे से शेयर की गई वीडियो में पुलिसकर्मी द्वारा एक व्यक्ति को लाठी से पीटते और एक अन्य अधिकारी को उसे रोकते हुए देखा जा सकता है.

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट जिस पर एएफ़पी द्वारा X साइन जोड़ा गया है

आगामी 23 और 29 अप्रैल को होने वाले बंगाल चुनावों से पहले फ़ेसबुक और X पोस्ट में इसी तरह के दावों के साथ यह वीडियो शेयर किया गया (आर्काइव्ड लिंक).

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) -- जो पश्चिम बंगाल में विपक्ष में है -- का इस बार 2011 से राज्य में सत्तारूढ़ टीएमसी से सीधा मुक़ाबला है.

पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का लंबा इतिहास रहा है, और सेंटर द्वारा ऐसी किसी भी झड़प को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की घोषणा की गई है (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां).

भाजपा के एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान व्यवस्था बनाए रखने में विफ़ल रहने पर चार अधिकारियों को सस्पेंड किए जाने के बाद स्थानीय पुलिस पर भी दुर्व्यवहार का आरोप लगाया गया है (आर्काइव्ड लिंक).

लेकिन इस वीडियो का बंगाल चुनाव से कोई संबंध नहीं है.

वीडियो के कीफ़्रेम्स को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर बांग्लादेशी ऑनलाइन समाचार पोर्टल "बार्ता बाजार" द्वारा 6 फ़रवरी को फ़ेसबुक पर शेयर किए गए वीडियो का एक लंबा वर्ज़न मिला (आर्काइव्ड लिंक).

इसके बंगाली कैप्शन में लिखा है: "पुलिस ने प्रदर्शनकारी होने के संदेह में खड़े एक पैदल यात्री को रोक लिया."

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट (बाएं) और बार्ता बाजार द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो की स्क्रीनशॉट तुलना

आउटलेट के कार्यकारी संपादक अल फहदुल इस्लाम ने 10 अप्रैल को व्हाट्सएप के माध्यम से एएफ़पी को बताया कि असल वीडियो एक स्टाफ़ रिपोर्टर द्वारा फ़िल्माया गया था.

उन्होंने कहा, "शुक्रवार, 6 फ़रवरी को प्रदर्शनकारियों ने शाम 5:00 बजे से लगभग 10:30 बजे तक शाहबाग चौराहे को ब्लॉक कर दिया. पुलिस द्वारा भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करने पर गतिरोध और बढ़ गया."

बार्ता बाजार के वीडियो में वह व्यक्ति पत्रकारों से बात करता हुआ दिखाई देता है, जिसे उसी दिन एक अन्य आउटलेट द्वारा प्रकाशित क्लिप में एक अलग एंगल से भी फ़िल्माया गया था (आर्काइव्ड लिंक).

एएफ़पी ने फ़ुटेज को ढाका में जियोलोकेट किया, जहां गूगल मैप्स स्ट्रीट व्यू पर उसी दुकान के साइनबोर्ड और गेट देखे जा सकते हैं (आर्काइव्ड लिंक).

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गलत दावे के पोस्ट में शेयर किये गए वीडियो (बाएं) और गूगल मैप्स स्ट्रीट व्यू की तस्वीर के स्क्रीनशॉट की तुलना; एएफ़पी द्वारा समानताएं हाइलाइट की गयी हैं

स्थानीय मीडिया ने उस समय बताया था कि छात्र समूह इंकलाब मंच द्वारा उनके नेता शरीफ़ उस्मान हादी की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन पुलिस और प्रदर्शनकारियों  के बीच हुई झड़प के बाद हिंसक हो गए (आर्काइव्ड लिंक).

हादी भारत के मुखर आलोचक थे और बांग्लादेश के 2024 के जन आंदोलन में शामिल थे. उन्हें ढाका में नकाबपोश हमलावरों ने गोली मार दी थी और बाद में सिंगापुर के एक अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई (आर्काइव्ड लिंक).

भारतीय चुनावों पर एएफ़पी की रिपोर्टिंग यहां देखी जा सकती है.

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