ईरानी हमले से ध्वस्त इमारत में फंसे अमेरिकी सैनिकों का वीडियो असल में एआई जेनरेटेड है

  • प्रकाशित 17 मार्च 2026, 06h12
  • 2 मिनट
  • द्वारा Akshita KUMARI, AFP India

अमेरिका और इज़रायल के 28 फ़रवरी के संयुक्त हमले के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में कथित तौर पर एक ईरानी हमले में तबाह हुई इमारत के मलबे में फंसे और रोते हुए अमेरिकी सैनिकों को दिखाया गया है; जबकि यह दावा गलत है, वीडियो दरअसल एआई की मदद से बनाया गया है. इस क्लिप में सिंथेटिक कंटेंट के संकेत देने वाली कई गड़बड़ियां हैं, और इसके ऑडियो को भी एक डिटेक्शन टूल ने संभावित रूप से AI-जेनरेटेड होने की पुष्टि की है. 

फ़ेसबुक पर 3 मार्च, 2026 को शेयर किए गए एक वीडियो के हिंदी कैप्शन में लिखा है, "अमेरिकी सैनिक रो रोकर बता रहा है. इस्लामाबाद से लेकर बगदाद तक अमरीकी दूतावास में आग लगा दी गई. तेहरान में अमेरिकी मिलिट्री बेस पर ईरान का कहर जारी है."

इस वीडियो को 250,000 से अधिक बार देखा जा चुका है -- जिसमें एक रोते हुए अमेरिकी सैनिक को कहते सुना जा सकता है कि मेरे फोन की स्क्रीन टूट गई है, मैं अपनी बेटी का चेहरा भी नहीं देख पा रहा हूं.

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट, 13 मार्च 2025, जिस पर एएफ़पी द्वारा X साइन जोड़ा गया है

यह वीडियो समान दावों से फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और X पोस्ट्स में भी शेयर हुआ,  जब 28 फ़रवरी को अमेरिका-इज़रायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या के जवाब में ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने शुरू किए (आर्काइव्ड लिंक).

दुबई, बहरीन, इराक़ और अन्य जगहों पर विस्फोट हुए, जिससे अफ़रा-तफ़री मच गई, सैकड़ों उड़ानें रद्द हो गईं और रणनीतिक रूप से अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ लगभग ठप्प हो गया.

एएफ़पी द्वारा सैटेलाइट इमेज के आधार पर किए गए विश्लेषण के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से अब तक मध्य पूर्व में कम से कम 25 ईरानी हमलों में अमेरिकी ठिकानों या अमेरिकी सैन्य कर्मियों के आवासों को निशाना बनाया गया है (आर्काइव्ड लिंक).

हालांकि 13 मार्च को सुबह 2 बजे तक, अमेरिकी दूतावासों या अमेरिकी सैन्य कर्मियों वाले ठिकानों को उस हद तक नुकसान पहुंचने की कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं आई है (आर्काइव्ड लिंक). साथ ही, ईरान की राजधानी तेहरान में किसी भी अमेरिकी सैन्य ठिकाने अथवा अमेरिकी सैनिकों की ग्राउंड पर मौजूदगी की कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं है.

वीडियो में कई त्रुटियां और विसंगतियां इस बात का संकेत देती हैं कि इसे एआई टूल्स की मदद से बनाया गया है. सैनिक के फोन का आकार विचित्र है, उसके हाव-भाव और आंसुओं का बहाव भी अस्वाभाविक दिखता है. 

इसके अलावा, सैनिक की आस्तीनों पर लगे अमेरिकी झंडे के पैच सैन्य दिशानिर्देशों के विपरीत प्रतीत होते हैं (आर्काइव्ड लिंक). सैनिक के बांए आस्तीन पर लगे पैच में तारे पूरे झंडे में फैले हुए हैं, जबकि वे केवल ऊपरी-बांए कोने में होते हैं.

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गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो का स्क्रीनशॉट, जिसमें एएफ़पी द्वारा गड़बड़ियों को हाइलाइट किया गया है

InVID-WeVerify वेरिफिकेशन प्लगइन पर उपलब्ध हिया वॉयस-क्लोनिंग डिटेक्शन टूल का उपयोग करके वीडियो के ऑडियो के विश्लेषण से पता चला कि इसकी बहुत संभावना है कि एआई द्वारा जेनेरेट किया गया था.

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हिया वॉइस-क्लोनिंग डिटेक्शन टूल के रिजल्ट का स्क्रीनशॉट

एएफ़पी ने मध्य पूर्व युद्ध से संबंधित अन्य गलत सूचनाओं का भी फ़ैक्ट-चेक किया है.

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