वोट गिनती का पुराना वीडियो हालिया बांग्लादेश चुनाव से जोड़कर गलत दावे से वायरल
- प्रकाशित 28 फरवरी 2026, 18h41
- 3 मिनट
- द्वारा Sachin BAGHEL, एफप भारत
अगस्त 2024 में जनविद्रोह के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपदस्थ किये जाने के बाद बांग्लादेश में पहली बार आम चुनाव फ़रवरी 2026 में हुए. इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया गया कि यह मतदान से एक रात पहले मतपत्रों की गिनती दिखाता है. लेकिन वीडियो में मतपत्रों पर जो चिह्न दिख रहा है, वह शेख हसीना की पार्टी -- आवामी लीग -- का चुनाव चिह्न है, जो इस बार चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित था.
फ़ेसबुक पर एक यूज़र ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, जिसका एक हिस्सा है, "पोलिंग आज हो रही है, लेकिन बांग्लादेश में वोटों की गिनती रात में ही हो गई."
कैप्शन में वीडियो को ढाका के गाज़ीपुर के एक निर्वाचन क्षेत्र का बताया गया था.
12 फ़रवरी का चुनाव 2024 के उस जनविद्रोह, जिसमें शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा, के बाद बांग्लादेश का पहला चुनाव था. हसीना ने 15 साल तक बांग्लादेश पर शासन किया लेकिन इस बार उनकी पार्टी आवामी लीग को चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया था (आर्काइव्ड लिंक).
मतदाताओं ने चुनाव के साथ एक जनमत संग्रह के लिए भी वोट डाले. इनमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा तय करना, संसद का एक नया उच्च सदन बनाना, राष्ट्रपति की शक्तियों को बढ़ाना और न्यायपालिका को अधिक स्वतंत्र बनाना जैसे प्रस्ताव शामिल थे. 60 प्रतिशत मतदाताओं ने इन बदलावों के पक्ष में मतदान किया.
चुनाव के बाद, 13 फ़रवरी को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारी जीत का जश्न मनाया. इसके बाद बीएनपी के नेता तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ़ हो गया (आर्काइव्ड लिंक).
चुनाव आयोग के अनुसार, बीएनपी ने 212 सीटें जीतीं, जबकि इस्लामिक दल जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 77 सीटें मिलीं.
वीडियो के साथ इसी तरह के दावे X, फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी शेयर किये गए.
लेकिन चुनाव अधिकारियों ने चुनाव से पहले मतगणना होने के दावों को खारिज कर दिया.
गाज़ीपुर निर्वाचन क्षेत्र के मुख्य चुनाव अधिकारी मोहम्मद आलम हुसैन ने 18 फ़रवरी को एएफ़पी को बताया कि उनके अधिकार क्षेत्र में समय से पहले मतगणना नहीं हुई. उन्होंने यह भी कहा कि इस साल के चुनाव के मतपत्र उस वायरल वीडियो में दिख रहे मतपत्रों जैसे नहीं थे (आर्काइव्ड लिंक).
उन्होंने कहा, "वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि लोग सिर्फ़ एक तरह के मतपत्रों की गिनती कर रहे हैं, जबकि हालिया चुनाव में दो अलग-अलग मतपत्र इस्तेमाल किए गए थे। इससे स्पष्ट है कि यह वीडियो हाल के चुनाव का नहीं है."
अन्य संकेत
की-फ़्रेम के ज़रिये रिवर्स इमेज सर्च करने पर फ़ेसबुक पर इसी तरह का एक थोड़ा अधिक स्पष्ट वीडियो मिला. इसमें कुछ स्पष्ट संकेत दिखते हैं कि वीडियो पुराना है -- जैसे मतपत्रों पर नाव का निशान दिखाई दे रहा है, जो आवामी लीग पार्टी का चुनाव चिह्न था (आर्काइव्ड लिंक).
एएफ़पी के पास पिछले चुनाव की एक तस्वीर है, जिसमें मतपत्र पर नाव का चुनाव चिन्ह दिखाई दे रहा है.
एएफ़पी ने वायरल वीडियो की तुलना एएफ़पी के पत्रकारों द्वारा रिकॉर्ड किए गए आधिकारिक मतगणना के दृश्यों से भी की.
इस वर्ष मतदान प्रक्रिया में दो प्रकार के मतपत्र -- गुलाबी और सफ़ेद -- का इस्तेमाल किया गया. गुलाबी मतपत्र का उपयोग लोकतांत्रिक सुधार चार्टर पर जनमत संग्रह के लिए किया गया था (आर्काइव्ड लिंक).
एएफ़पी पहले भी बांग्लादेश चुनाव से जुड़ी गलत सूचनाओं को फ़ैक्ट चेक कर चुका है.
कॉपीराइट © एएफ़पी 2017-2026. इस कंटेंट के किसी भी तरह के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए सब्सक्रिप्शन की ज़रूरत पड़ेगी. अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.