ट्रम्प के खिलाफ़ पिछली रैलियों के फ़ुटेज को गलत दावे से एपस्टीन फ़ाइल्स से जोड़ा गया
- प्रकाशित 27 फरवरी 2026, 12h29
- 4 मिनट
- द्वारा Akshita KUMARI, एफप भारत
जनवरी 30, 2026 को जेफ़री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों का नया बैच जारी किया गया, जिसके बाद से डोनाल्ड ट्रम्प के एपस्टीन के साथ पुराने संबंधों की जांच शुरू हो गई है. हालांकि ऑनलाइन शेयर हो रहे वीडियो में तथाकथित एपस्टीन फ़ाइल्स को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का दावा गलत है. असल में फ़ुटेज अक्टूबर 2025 और जनवरी 2026 की शुरुआत में हुए उन प्रदर्शन को दिखाती हैं, जो मुख्य रूप से ट्रम्प प्रशासन की इमीग्रेशन नीति में बल प्रयोग के खिलाफ़ किये गए थे.
सोशल मीडिया साइट X पर 7 फ़रवरी, 2026 को शेयर किये गए एक वीडियो का कैप्शन है "Big Breaking News. Epstein files को लेकर अमेरिका में गुस्सा सड़कों पर है. वायरल वीडियो में ट्रंप के ख़िलाफ़ ज़ोरदार विरोध. ट्रंप के विरोध में लोग ट्रंप टावर के सामने जमकर हंगामा किया."
वीडियो में दो अलग-अलग क्लिप हैं: पहली क्लिप में सड़कों पर कतार में खड़े लोगों की भारी भीड़ दिखाई देती है, जबकि दूसरी क्लिप में ट्रम्प टॉवर के सामने इकट्ठा हुए लोगों का एक समूह "शेम, शेम" के नारे लगा रहा है.
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा एपस्टीन की जांच से जुड़े लाखों दस्तावेज़ जारी किए जाने के बाद यह वीडियो समान दावों के साथ फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, और थ्रेड्स पर भी शेयर की गई. एपस्टीन की 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में नाबालिग लड़कियों की यौन तस्करी के आरोप में मुकदमे की प्रतीक्षा करते हुए मृत्यु हो गई थी (आर्काइव्ड लिंक).
यूएस वर्जिन आइलैंड के निजी द्वीप लिटिल सेंट जेम्स की यात्राओं को लेकर कई हाई-प्रोफ़ाइल हस्तियों की जांच की जा रही है, जहां अभियोजकों का आरोप है कि एपस्टीन ने नाबालिग लड़कियों की यौन तस्करी की थी (आर्काइव्ड लिंक).
पहले जारी किए गए दस्तावेजों से एपस्टीन के प्रमुख व्यापारिक अधिकारियों, मशहूर हस्तियों, शिक्षाविदों और राजनेताओं, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पूर्व नेता बिल क्लिंटन शामिल हैं, के साथ संबंधों का खुलासा हुआ है.
हालांकि, ट्रम्प ने देश से "आगे बढ़ने" की अपील करते हुए कहा कि लाखों दस्तावेजों के नवीनतम रिलीज़ से उन्हें बरी कर दिया गया है (आर्काइव्ड लिंक).
एपस्टीन फ़ाइल्स में किसी व्यक्ति के नाम का मात्र उल्लेख होना, अपने आप में, उस व्यक्ति द्वारा किसी भी प्रकार के गलत काम में शामिल होने का सबूत नहीं देता है.
लेकिन सार्वजनिक किए गए दस्तावेज़ कम से कम इतना तो साफ़ दिखाते हैं कि एपस्टीन या उसके करीबी लोगों और कुछ सार्वजनिक हस्तियों के बीच संबंध थे -- जिन्हें उनके द्वारा अक्सर कम कर के बताया गया है या पूरी तरह से नकार दिया गया है.
वायरल हो रही पोस्ट्स पर कई कमेंट्स से पता चलता है कि लोगों का मानना था कि वीडियो सच है.
एक यूज़र ने लिखा, "ध्यान दें की ट्रंप के साथ जो हो रहा है, एपस्टीन का मामला उनके नियति से जुड़ा है."
एक अन्य ने कहा, "ये तो होना ही था, अमेरिका के लोग जागरूक हैं."
हालांकि ये क्लिप्स एपस्टीन फ़ाइल्स के नवीनतम जत्थे के जारी होने से पहले की हैं.
नो किंग्स विरोध प्रदर्शन
गूगल पर वीडियो के की-फ़्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च करने पर 19 अक्टूबर, 2025 को मीडिया आउटलेट ब्लॉक क्लब शिकागो के आधिकारिक फ़ेसबुक अकाउंट पर अपलोड किया गया फ़ुटेज मिला (आर्काइव्ड लिंक).
कैप्शन में लिखा है, "मिशिगन एवेन्यू पर नो किंग्स विरोध प्रदर्शन का ऊपर से लिया गया दृश्य."
समाचार वेबसाइट ने बताया कि 18 अक्टूबर को देश के सबसे बड़े इमिग्रेशन अभियान के बीच, ट्रम्प प्रशासन की निंदा करते हुए, दूसरे राष्ट्रव्यापी "नो किंग्स" विरोध प्रदर्शन में शिकागो के लगभग 250,000 निवासी शहर के केंद्र में उमड़ पड़े (आर्काइव्ड लिंक).
यह वीडियो 20 अक्टूबर को इंस्टाग्राम पर भी शेयर किया गया था, जिसमें कैप्शन में कहा गया था कि ट्रम्प प्रशासन के खिलाफ़ "नो किंग्स" विरोध प्रदर्शन में लाखों अमेरिकी सभी 50 राज्यों में सड़कों पर उतर आए (आर्काइव्ड लिंक).
दूसरा क्लिप 16 जनवरी, 2026 को यूट्यूब पर प्रकाशित किया गया था (आर्काइव्ड लिंक).
कैप्शन में लिखा है, "जबरदस्त भीड़! 'नो आईसीई, नो किंग्स, नो वॉर्स' न्यूयॉर्क सिटी मार्च के लिए हजारों लोग ट्रम्प टॉवर पर टूट पड़े!"
यह वीडियो 18 जनवरी को NewsXWorld के फ़ेसबुक पेज पर भी शेयर किया गया था (आर्काइव्ड लिंक).
न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि यह प्रदर्शन 11 जनवरी को मैनहट्टन में हुआ था, जिसमें हज़ारों लोग शामिल हुए थे और फ़िफ़्थ एवेन्यू स्थित ट्रंप टॉवर के सामने से गुज़रे थे (आर्काइव्ड लिंक).
यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से 7 जनवरी को मिनियापोलिस में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) एजेंट द्वारा अमेरिकी नागरिक रेनी निकोल गुड की हत्या के कारण भड़का, जिसने ट्रंप के शासनकाल में बड़े पैमाने पर निर्वासन के खिलाफ़ आक्रोश को और बढ़ा दिया.
इस विरोध प्रदर्शन को वेनेज़ुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप, जिसमें निकोलस मादुरो की गिरफ़्तारी भी शामिल है, ने और बल दिया.
एएफ़पी ने इससे पहले भी एपस्टीन फ़ाइल्स से संबंधित अन्य गलत सूचनाओं को फ़ैक्ट-चेक किया है.
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