गोरखपुर में विश्व की सबसे लम्बी एलपीजी पाइपलाइन के दावे से वायरल तस्वीर जर्मनी की है

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कई फ़ेसबुक पोस्ट में एक तस्वीर को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि ये उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में विश्व के सबसे बड़े एलपीजी पाइपलाइन के निर्माण की है. हालाँकि इस तस्वीर को भ्रामक दावे के साथ शेयर किया गया है; यह तस्वीर असल में फ़ोटो एजेंसी गेटी ने 2010 में जर्मनी में एक पाइपलाइन निर्माण के दौरान खींची थी.

यह तस्वीर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से बने एक फ़ेसबुक फ़ैन पेज पर 17 जनवरी 2022 को यहां शेयर की गई है. इस पेज के लगभग 440,000 फ़ॉलोवर हैं.

तस्वीर में एक बड़े आकार के पाइप को ज़मीन के अंदर गाड़ते हुए दिखाया गया है. 

इस भ्रामक तस्वीर के ऊपर अलग से टेक्स्ट में लिखा है, "विश्व की सबसे बड़ी पाइपलाइन का निर्माण उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जो 2023 में बनकर तैयार हो जायेगी. कांदला-गोरखपुर पाइपलाइन का निर्माण 10 हज़ार करोड़ रुपये की लागत से हो रहा है. 2757 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन से 34 करोड़ परिवारों को गैस प्रदान की जायेगी...यह एक शानदार प्रोजेक्ट है जो भारत में एलपीजी क्रान्ति को तेज करेगा."

भ्रामक पोस्ट का स्क्रीनशॉट ( Uzair RIZVI)

कांदला-गोरखपुर पाइपलाइन परियोजना आईएचबी- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की एक संयुक्त उद्यम कंपनी द्वारा शुरू की जा रही है. इस परियोजना को 'दुनिया की सबसे लंबी पाइपलाइन परियोजना' होने का दावा किया जा रहा है. 

आईएचबी लिमिटेड की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 10,088 करोड़ के बजट की लागत से 2805 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन का निर्माण किया जा रहा है. इस परियोजना  शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी ने 24 फ़रवरी 2019 को गोरखपुर शहर में किया था.

बिल्कुल इसी दावे के साथ ये तस्वीर फ़ेसबुक पर यहां और यहां; साथ ही ट्विटर पर यहां और यहां शेयर की गई है.

इस पोस्ट में कई यूज़र्स कमेंट कर रहे हैं जिससे ये लगता है कि लोग इस तस्वीर के साथ किये जा रहे दावे से भ्रमित हो रहे हैं. 

एक यूज़र ने लिखा: "राज्य और केन्द्र सरकार के बीच सीधे सहयोग का ये नतीजा है आने वाले चुनाव में वोट डालते समय लोगों को ये ध्यान रखना चाहिये."

हालाँकि दावा ग़लत है.

वायरल तस्वीर को यांडेक्स सर्च इंजन पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर गेटी इमेजेस द्वारा खींची गई ऑरिजनल फ़ोटो यहां मिली जिसे 8 अप्रैल 2010 को प्रकाशित किया गया था जिसमें जर्मनी में ओपीएएल पाइपलाइन के निर्माण कार्य को दिखाया गया है.

फ़ोटो के कैप्शन में लिखा है, "ओपीएएल पाइपलाइन टू कनेक्ट टू बाल्टिक सी लुबमिन, जर्मनी- अप्रैल 8: एक मज़दूर 8 अप्रैल 2010 को जर्मनी के लुबमिन में ओपीएएल पाइपलाइन के लिये क्रेन की मदद से पाइप के एक हिस्से को ज़मीन में रखता हुआ. ओपीएएल और एनईएल पाइपलाइन रूस में नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन के माध्यम से जर्मनी में बाल्टिक सागर और यूरोप के अन्य देशों में प्राकृतिक गैस ले जायेगी. नॉर्ड स्ट्रीम परियोजना रूसी प्राकृतिक गैस को सीधे पश्चिमी यूरोप में पहुंचाती है और बीच में पोलैंड और यूक्रेन जैसे देशों से बचाती है. (फ़ोटो गेटी इमेजेस द्वारा/ शॉन गैलप)"

नीचे भ्रामक तस्वीर (बायें) और गेटी इमेजेस की 2010 की तस्वीर (दायें) के बीच एक तुलना है. 

भ्रामक तस्वीर (बायें) और गेटी इमेजेस की 2010 की तस्वीर (दायें) के बीच एक तुलना ( Uzair RIZVI)

अमेरिका के अख़बार न्यूयार्क टाइम्स ने 8 अप्रैल 2010 को प्रकाशित अपने एक आर्टिकल में भी ये तस्वीर प्रकाशित की थी जिसमें जर्मनी की इस पाइपलाइन निर्माण की जानकारी दी गई थी.

( Uzair RIZVI)