फ़्रांस में कुर्दिश लोगों के हिंसक प्रदर्शन के दावे से शेयर किया गया वीडियो पुराना है
- प्रकाशित 28 अप्रैल 2026, 19h59
- 3 मिनट
- द्वारा Hawon Jung, एफप दक्षिण कोरिया
- अनुवाद और अनुकूलन Devesh MISHRA
यूरोप के कई देशों में हाल के वर्षों में उनकी प्रवासन नीतियों और अप्रवासियों को शरण देने का मुद्दा राजनीतिक रूप से गर्माया हुआ है. लेकिन सोशल मीडिया पर हिंसक विरोध प्रदर्शन के एक वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि यह फ़्रांस में प्रवासी कुर्द लोगों के प्रोटेस्ट का है. जबकि यह वीडियो 2022 में फ़्रांस में तीन कुर्द लोगों की मौत के बाद भड़के उग्र प्रदर्शनों का है.
फ़ेसबुक पर 7 अप्रैल 2026 को शेयर की गई पोस्ट का कैप्शन है, "यह बेरूत या तेहरान नहीं है. यह मैक्रों का फ़्रांस है. फ़्रांस में कुर्दिश प्रवासियों द्वारा किए गए दंगों से हुई तबाही की तस्वीरें दुनिया भर में सुर्खियाँ बटोर रही हैं. यह एक ऐसी सच्चाई है जिसकी रिपोर्टिंग मुख्यधारा का मीडिया नहीं कर रहा है."
वीडियो में दो क्लिप हैं, पहली में एक सड़क पर पलटी, जली हुई कारें दिखती हैं और चारों ओर मलबा बिखरा है वहीं दूसरी क्लिप में कुछ लोग बस स्टॉप के कांच तोड़ते दिखाई देते हैं.
वीडियो को इसी तरह के दावों के साथ X औैर फ़ेसबुक पर भी शेयर किया गया है.
जबकि वीडियो पेरिस में कुर्द समुदाय के लोगों के प्रदर्शन का ही है, लेकिन यह हालिया किसी प्रोटेस्ट का नहीं है.
पेरिस पुलिस ने 16 अप्रैल 2026 को एएफ़पी को एक ईमेल में बताया, "हाल के महीनों में पेरिस में ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं हुआ है," और इस "फ़ेक न्यूज़ की कड़ी निंदा" की.
2022 के प्रदर्शन
गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो के की‑फ़्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर पता चला कि पहला क्लिप फ़्रांसीसी पत्रकार रेमी बुइज़ीन ने 24 दिसंबर 2022 को X पर शेयर किया था (आर्काइव्ड लिंक).
उस समय एएफ़पी की रिपोर्ट के अनुसार मध्य पेरिस के प्लास द ला रिपब्लिक में हज़ारों लोग एक कुर्द सांस्कृतिक केंद्र के पास हुए हमले में मारे गए तीन कुर्द लोगों की याद में इकट्ठा हुए थे. हमलावर ने नस्लीय भेदभाव और विदेशियों के प्रति "बीमारी जैसी नफ़रत" की बात कबूल की थी (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां).
कई लोगों ने फ़्रांसीसी सुरक्षा एजेंसियों पर गोलीबारी रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया. प्रदर्शन के दौरान गुस्सा भड़क उठा और प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हो गई. एएफ़पी पत्रकारों के अनुसार कम से कम चार कारें पलट दी गईं और एक कार को जला दिया गया था.
एएफ़पी ने उसी पलटी हुई कार की फ़ोटो और वीडियो भी जारी किए थे.
यह वीडियो क्लिप पहले भी गलत दावों के साथ शेयर की जा चुकी है. कुछ पोस्ट में इसे 2023 में फ़्रांस में पेंशन सुधारों के खिलाफ़ हुए विरोध प्रदर्शनों से जोड़ा गया, जबकि कुछ ने इसे जनवरी 2026 में पेरिस में हुई एक अन्य हिंसक घटना बताया.
एक अन्य रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमने पाया कि दूसरी क्लिप 25 दिसंबर 2022 को एक तुर्की‑भाषी वेबसाइट पर शेयर की गई थी. एक अन्य तुर्की‑भाषी वेबसाइट ने भी 26 दिसंबर 2022 को उसी विरोध प्रदर्शन पर प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में इस वीडियो को शामिल किया था (आर्काइव्ड लिंक यहां, यहां).
एएफ़पी ने दोनों वेबसाइटों से कमेंट के लिए संपर्क किया, लेकिन प्रकाशन के समय तक कोई जवाब नहीं मिला है.
यह फ़ुटेज उस स्थान के पास की गूगल स्ट्रीट व्यू तस्वीरों से भी मेल खाती है, जहां प्लेस द ला रिपब्लिक में ये विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे (आर्काइव्ड लिंक).
इसके अलावा, गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो के 31वें सेकंड पर दिखाई देने वाला पीले रंग का हेडस्कार्फ़ पहने एक प्रदर्शनकारी फ़्रांस के टीवी चैनल CNEWS पर प्रसारित विरोध प्रदर्शन के फ़ुटेज में भी देखा जा सकता है (आर्काइव्ड लिंक).
यह फ़ुटेज एक फ़्रांसीसी यूज़र के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया था, और चैनल ने 21 अप्रैल 2026 को ईमेल के ज़रिये एएफ़पी से इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि की है.
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