महाराष्ट्र के मंदिर में पुजारियों और श्रद्धालुओं के बीच झगड़े का वीडियो गलत दावे से वायरल

मई 2026 में बकरीद के पहले मंदिर में हुई एक पुरानी लड़ाई का वीडियो सोशल मीडिया पर इस गलत दावे से शेयर किया गया कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक मंदिर में बीफ़ फेंकने पर पुजारियों ने मुस्लिमों की पिटाई कर दी. जबकि यह वीडियो कई महीने पहले का है. पुलिस ने भी AFP को बताया कि यह झगड़ा पुजारियों और भक्तों के बीच हुए विवाद से शुरू हुआ था, और इसमें कोई भी मुसलमान शामिल नहीं था.

वीडियो को फ़ेसबुक पर 23 फ़रवरी को शेयर किया गया है जिसका कैप्शन है, "कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिन मुस्लिमों ने श्रद्धालुओं पर मांस फेंका. अल्लाहु अकबर के नारे लगाए लगभग पुजारियों ने मुस्लिमों पर नारियल फेंकते हुए कपड़े के चिथड़े उड़ने कुटाई करके मुंहतोड़ जवाब दिया. जय महालक्ष्मी."

पोस्ट में 19 सेकंड का वीडियो शेयर किया गया है जिसमें कुछ लोग एक व्यक्ति पर हमला कर रहे हैं. इस फ़ेसबुक पेज पर शेयर होने के बाद से वीडियो को 43,000 से अधिक बार देखा जा चुका है. 

इस पेज के 58,000 से  ज़्यादा फ़ॉलोवर्स हैं और पहले भी इसने ऐसे कई गलत दावे शेयर किये हैं, जिन्हें AFP ने फ़ैक्ट-चेक किया है.

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गलत दावे से शेयर की गई फ़ेसबुक पोस्ट का स्क्रीनसॉट, 3 जून 2026 को लिया गया, जिसमें एएफ़पी द्वारा लाल X जोड़ा गया है

यह वीडियो बकरीद के पहले फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर ऐसे ही दावों के साथ शेयर किया गया है. 

त्यौहार के मद्देनजर मुंबई के कई इलाकों में पुलिस को तैनात किया गया था ताकि जानवरों की कुर्बानी को लेकर हिंदू और मुस्लिम लोगों के बीच किसी भी तरह की विवाद की स्थिति न उत्पन्न हो.

कई इलाकों में दोनों समुदायों के बीच झगड़े के बाद त्योहार के लिए जानवरों की कुर्बानी की अनुमति रद्द कर दी गई (आर्काइव्ड लिंक).

पोस्ट पर यूज़र्स के कमेंट्स से लगता है कि वे इस दावे पर यकीन कर रहे हैं.

एक यूज़र ने लिखा, "जिहादी अपने किसी भी त्योहार को हिंदुओं का अपमान किए बिना नहीं मनाते हैं." 

एक अन्य ने लिखा: "इस समुदाय के लिए यही एक समाधान है, हमारे धार्मिक स्थानों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."

लेकिन यह वीडियो मुसलमानों या बीफ़ से संबंधित नहीं है.

सांप्रदायिक मामला नहीं

गूगल कीवर्ड सर्च करने पर वही वीडियो 23 मार्च को टीवी चैनल NDTV के X अकाउंट पर मिला, जिसके ऊपर दाईं ओर उसका लोगो दिखता है (आर्काइव्ड लिंक).

पोस्ट के कैप्शन में लिखा है: "ज्योतिबा मंदिर में पुजारी बेकाबू हुए, भक्तों को बुरी तरह पीटा," और इसमें बताया गया है कि यह वीडियो महाराष्ट्र के कोल्हापुर में फ़िल्माया गया था.

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गलत दावे की पोस्ट के वीडियो (बायें) और एनडीटीवी के एक्स पोस्ट के वीडियो के स्क्रीनशॉट की तुलना

मीडिया संस्थान टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने भी 24 मार्च की एक रिपोर्ट में इस वीडियो की एक तस्वीर शेयर करते हुए बताया कि झगड़े के बाद पुलिस ने 17 पुजारियों और 17 भक्तों को हिरासत में लिया था (आर्काइव्ड लिंक).

रिपोर्ट में कहा गया कि झगड़ा तब शुरू हुआ जब कुछ भक्तों ने कथित रूप से एक पुजारी की ओर नारियल के टुकड़े फेंके, जिससे बहस शुरू हुई और बाद में यह लड़ाई में बदल गई.

कोडोली पुलिस स्टेशन के एक सहायक पुलिस निरीक्षक चेतन मसुतागे ने 29 मई को AFP को बताया कि इस झगड़े में "कोई भी मुसलमान शामिल नहीं था".

उन्होंने कहा, "यह घटना 22 मार्च को हुई थी, जब ज्योतिबा मंदिर में पुजारियों और कुछ भक्तों के बीच मामूली बहस हुई. कई लोगों को हिरासत में लिया गया और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया. बाद में आपसी सहमति से मामला सुलझा लिया गया."

मंदिर के एक पुजारी नितिन लाडे ने भी AFP को बताया कि "मुसलमान मंदिर में बीफ़ लेकर आए थे" जैसे दावे गलत हैं.

उन्होंने कहा कि कुछ लोग कथित तौर पर नशे में मंदिर में आए और पुजारियों को गाली देने लगे, जिससे बहस शुरू हो गई.

लाडे ने 29 मई को AFP को बताया, "नशे में एक व्यक्ति ने एक पुजारी को मारने की कोशिश की, जिसके बाद अन्य पुजारी बीच में आए और झगड़ा हो गया."

AFP ने भारत में हिंदू‑मुस्लिम तनाव से जुड़े ऐसे और भी कई गलत दावों को पहले भी फ़ैक्ट-चेक किया है.

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