बांग्लादेश का पुराना वीडियो पश्चिम बंगाल में अतिक्रमण हटाने के गलत दावे से वायरल

मई 2026 में पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अवैध अतिक्रमण और प्रवासन के खिलाफ़ कार्रवाई को तेज किया है. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के घरों पर बुलडोज़र चलाया जा रहा है. लेकिन यह दावा गलत है. वीडियो वास्तव में पड़ोसी देश बांग्लादेश का है, जहां ढाका में सरकारी ज़मीन पर कथित तौर पर अवैध रूप से बने मकानों को हटाने के लिए अभियान चलाया गया था.

21 मई को X पर शेयर की गई एक पोस्ट में लिखा है, "पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशियों की बस्ती पर बुलडोजर कार्रवाई चल रही है. ये सभी वन विभाग और सरकारी जमीन पर बसाए गए थे. वीडियो में पीछे देखिए, एक व्यक्ति बांग्लादेश क्रिकेट टीम की जर्सी पहने खड़ा है." 

वीडियो में एक व्यक्ति सड़क पर फूट-फूटकर रोता दिखाई देता है, जबकि आसपास के लोग उसे शांत कराने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ महिलाएं और छोटे बच्चे भी रोते हुए नज़र आते हैं.  

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट जिसमें एएफ़पी द्वारा लाल X जोड़ा गया है

भाजपा सरकार ने पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने के बाद कथित अवैध प्रवासियों के खिलाफ़ अभियान के तहत स्थानीय प्रशासन को पकड़े गए विदेशी नागरिकों के लिए "होल्डिंग सेंटर" बनाने के निर्देश दिए (आर्काइव्ड लिंक).  

इस कार्रवाई से प्रवासी समुदायों में चिंता बढ़ गई है, जिनमें से कई के पास उचित दस्तावेज नहीं हैं. मानवाधिकार समूहों ने जबरन निष्कासन और सीमित कानूनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है (आर्काइव्ड लिंक).  

भाजपा लंबे समय से दावा करती रही है कि बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशी मुस्लिम प्रवासी भारत की मतदाता सूची में शामिल हो गए हैं. वहीं आलोचकों का कहना है कि यह सरकार की सख्त प्रवासी विरोधी नीति का हिस्सा है. भाजपा के कई वरिष्ठ नेता अतीत में बांग्लादेशी प्रवासियों को "दीमक" और "घुसपैठिया" कह चुके हैं (आर्काइव्ड लिंक).  

यह वीडियो फ़ेसबुक और X पर ऐसे ही दावों के साथ शेयर किया गया है. हालांकि वायरल वीडियो का भाजपा सरकार की इस कार्रवाई से कोई संबंध नहीं है. यह वीडियो बांग्लादेश में फ़िल्माया  गया था.  

रिवर्स इमेज सर्च करने पर यही वीडियो 20 मई को बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट "सोबार कंठा" के फ़ेसबुक पेज पर मिला. पोस्ट के कैप्शन में बताया गया था कि यह एक अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान फ़िल्माया गया था (आर्काइव्ड लिंक).

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गलत दावे की पोस्ट के वीडियो (बायें) और सोबार कंठा के वीडियो के स्क्रीनशॉट की तुलना

एक अन्य रिवर्स इमेज सर्च से बांग्लादेशी समाचार संस्था "कलेर कंठो" की उसी दिन की लाइव-स्ट्रीम वीडियो मिली, जिसमें वही व्यक्ति दिखाई देता है जो वायरल वीडियो में भी मौजूद है. लाइव-स्ट्रीम में घटना का स्थान ढाका के बौनियाबाद इलाके की एक झुग्गी बस्ती को बताया गया है (आर्काइव्ड लिंक). 

स्थानीय प्रशासन ने इलाके में सरकारी ज़मीन पर बने कथित अवैध मकानों को हटाने का आदेश दिया था. कार्रवाई का विरोध करने वाले स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई, जिसमें मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हुए (आर्काइव्ड लिंक यहां और यहां).  

सोबार कंठा ने उसी दिन एक और वीडियो प्रकाशित किया था जिसमें वही व्यक्ति एक इमारत की मुंडेर पर खड़े होकर एक पुलिस अधिकारी से गुहार लगाता दिखाई देता है (आर्काइव्ड लिंक).  

लाइव-स्ट्रीम वीडियो के 5 मिनट 59 सेकंड पर "खान वस्त्र बितान" नाम की एक दुकान दिखाई देती है. दुकान का पता बांग्ला भाषा में "बौनियाबाद टिनशेड कॉलोनी बाज़ार, मीरपुर, ढाका" लिखा हुआ है.

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AFP द्वारा हाइलाइट किए गए दुकान के नाम और पते के साथ कलेर कंठो की लाइव-स्ट्रीम का स्क्रीनशॉट

गूगल मैप्स स्ट्रीट व्यू की तस्वीरों में भी वही दुकान और बिजली का खंभा दिखाई देता है जिससे पुष्टि होती है कि वीडियो ढाका के मीरपुर इलाके में फ़िल्माया गया था (आर्काइव्ड लिंक). 

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कलेर कंठो के वीडियो (बाएं) और ढाका की गूगल स्ट्रीट व्यू के स्क्रीनशॉट की तुलना, AFP ने दोनों में मिलते-जुलते हिस्सों को हाईलाइट किया है.

स्थानीय दुकानदार अब्दुल कुद्दुस खान ने 1 जून को AFP से फ़ोन पर बातचीत में पुष्टि की कि यह वीडियो ढाका के पल्लबी इलाके के बौनियाबाद बाज़ार में फ़िल्माया गया था.  

उन्होंने कहा, "यह वीडियो 20 मई को चलाए गए बेदखली अभियान का है. इस अभियान में सरकारी जमीन पर बने अवैध घरों, दुकानों और गैराजों को तोड़ा गया था." 

AFP इससे पहले भी पश्चिम बंगाल चुनावों से जुड़े कई भ्रामक दावों को फ़ैक्ट चेक कर चुका है.  

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