इंडोनेशिया में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के पुराने वीडियो गलत दावे से वायरल
- प्रकाशित 16 जून 2026, 14h47
- 4 मिनट
- द्वारा Devesh MISHRA, एफप भारत
इंडोनेशिया में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के महीनों पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर फिर इस गलत दावे से शेयर किये जा रहे हैं कि ये फ़्रांस में मुस्लिमों द्वारा पुलिस पर किये हमले दिखाते हैं. ये क्लिप्स 30 मई की रात फ़्रांसीसी शहरों में युवाओं और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद वायरल हुई. हालांकि ये फ़ुटेज पहले इंडोनेशिया के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी शेयर किये जा चुके हैं जो आर्थिक असमानता से जुड़ी नाराज़गी के कारण शुरू हुए थे.
वीडियो, जिसे इसे 3 जून 2026 को फ़ेसबुक पर शेयर किया गया है, में दो क्लिप्स हैं जिनमें लोग ढाल के पीछे खड़े सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर फेंकते दिखते हैं.
कैप्शन में दावा किया गया कि वीडियो में फ़्रांस पुलिस छिपती और अपना बचाव करती दिख रही है.
कैप्शन में आगे लिखा है: "उत्तर प्रदेश पुलिस इससे बेहतर है. यहां न जेल, न बेल, सीधे 72 हूरों से मेल."
यहां "हूर" का मतलब कथित इस्लामी मान्यता के अनुसार जन्नत में मिलने वाली अप्सराओं से है.
कैप्शन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ज़िक्र भी है. इसमें कहा गया: "दुनिया को मुस्लिम आतंक से सिर्फ योगी मॉडल ही बचा सकता है."
पेरिस और फ़्रांस के अन्य शहरों में 30 मई की शाम पेरिस सेंट-जर्मन की चैंपियंस लीग में जीत के बाद हिंसक झड़पें शुरू हो गईं जिसके बाद से ही ये क्लिप्स फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर इसी तरह के दावों के साथ शेयर की गईं.
AFP के अनुसार जश्न के दौरान पेरिस और अन्य शहरों में युवाओं और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, कई कारों में आग लगा दी गई और दुकानों में लूटपाट हुई (आर्काइव्ड लिंक). इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई जब वह पेरिस रिंग रोड पर मोटरसाइकिल चलाते हुए जश्न मना रहा था. पुलिस अधिकारियों ने चाकूबाजी और अन्य हमलों की भी जानकारी दी है.
गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने कहा कि 890 लोगों को गिरफ़्तार किया गया जबकि लगभग 180 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं.
हालांकि, सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा वीडियो फ़्रांस का नहीं है. यह इंडोनेशिया के एक विरोध प्रदर्शन का है.
पहले वायरल क्लिप के की-फ़्रेम को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर इसका लंबा संस्करण मिला जो 29 अगस्त 2025 को इंडोनेशिया के ट्रिब्यून मेडान न्यूज़ वेबसाइट के यूट्यूब चैनल पर प्रकाशित हुआ था (आर्काइव्ड लिंक).
इसकी इंडोनेशियाई भाषा की हेडलाइन है: "प्रदर्शनकारी पुलिस पर हमला करते हैं और पत्थर फेंकते हैं." वीडियो में पुलिसकर्मियों के हाथ में दिख रही ढाल पर इंडोनेशियाई भाषा में अंकित "पुलिस" शब्द भी दिखता है.
ये प्रदर्शन अगस्त 2025 के अंत में शुरू हुए थे जिसकी वजह सांसदों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर लोगों में उपजी नाराज़गी थी (आर्काइव्ड लिंक).
बाद में एक वीडियो सामने आया, जिसमें अर्धसैनिक पुलिस की एक टीम 21 साल के डिलीवरी ड्राइवर को कुचलती दिखी. इसके बाद प्रदर्शन हिंसक हो गए.
वीडियो के डिसक्रिप्शन के अनुसार, यह उत्तर सुमात्रा विधानसभा भवन के बाहर का है. इसमें दिख रही जगह गूगल स्ट्रीट व्यू से भी मेल खाती है (आर्काइव्ड लिंक).
AFP पहले भी इस वीडियो के साथ किये जा रहे एक अन्य गलत दावे को फ़ैक्ट-चेक कर चुका है जब इसे सितंबर 2025 में नेपाल के विरोध प्रदर्शनों से जोड़कर शेयर किया गया था.
दूसरे क्लिप के की-फ़्रेम को रिवर्स इमेज सर्च करने पर भी एक समान वीडियो मिला जिसे यूट्यूब पर इंडोनेशियाई भाषा के कैप्शन के साथ शेयर किया गया था. इसमें लिखा है: "28 अगस्त 2025 को उत्तर सुमात्रा क्षेत्रीय विधानसभा (DPRD) में हिंसक प्रदर्शन" (आर्काइव्ड लिंक).
इसी घटना का एक और वीडियो अलग एंगल से 28 अगस्त 2025 को फ़ेसबुक पर भी पोस्ट किया गया था (आर्काइव्ड लिंक).
यह फ़ुटेज भी उत्तर सुमात्रा विधानसभा भवन के बाहर की सड़क से मेल खाता है, जैसा कि गूगल स्ट्रीट व्यू में दिखता है (आर्काइव्ड लिंक).
फ़्रांस में विरोध प्रदर्शनों से अन्य गलत दावों को एएफ़पी ने यहां फ़ैक्ट-चेक किया है.
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