कराची में यूएस दूतावास पर हमले का वीडियो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का बताकर गलत दावे से वायरल
- प्रकाशित 19 जून 2026, 13h44
- 3 मिनट
- द्वारा Sachin BAGHEL, एफप भारत
जून 2026 में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में पुलिस और प्रतिबंधित संगठन के समर्थकों के बीच हुई झड़पों में कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई. इसी से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया गया, जिसमें पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया है. दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो हालिया झड़पों का है. लेकिन यह दावा गलत है. यह वीडियो कई महीने पहले कराची में हुए एक अन्य विरोध प्रदर्शन का है, जो ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या के बाद शुरू हुआ था.
9 जून को X पर शेयर किये गए एक वीडियो का कैप्शन है, "पीओके में प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पथराव किया तो 12 को गोली मार कर जन्नत रवाना किया ."
मुस्लिम बहुल कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान दोनों अपना दावा करते हैं, लेकिन ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता के तुरंत बाद से यह क्षेत्र दोनों देशों के बीच विभाजित है. दोनों देश दूसरे के नियंत्रण वाले हिस्से को "कब्ज़े वाला क्षेत्र" कहते हैं.
58 सेकंड के वायरल वीडियो में एक पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों के एक समूह पर गोली चलाता दिखाई देता है. बाद में कुछ अन्य पुलिसकर्मी उस व्यक्ति को बुरी तरह पीटते नज़र आते हैं.
AFP पहले भी इस X अकाउंट द्वारा शेयर किये गए पोस्ट्स का फ़ैक्ट चेक कर चुका है.
यह वीडियो इंस्टाग्राम और फ़ेसबुक पर भी इसी तरह के दावों के साथ उस वक्त शेयर किया गया, जब पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में पुलिस और प्रतिबंधित संगठन के समर्थकों के बीच हिंसक झड़पें चल रही थीं.
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC), जो आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों की मांग करने वाला एक सरकार-विरोधी संगठन है, के समर्थकों ने 5 जून को सरकार द्वारा आतंकवाद-विरोधी कानूनों के तहत संगठन पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद प्रदर्शन जारी रखे (आर्काइव्ड लिंक).
17 जून तक इन झड़पों में कम से कम 22 लोगों की मौत हो चुकी थी, जिनमें सुरक्षा बलों के चार सदस्य भी शामिल थे. AFP द्वारा आधिकारिक डेटा के आधार पर तैयार किए गए आंकड़ों के अनुसार, 89 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं (आर्काइव्ड लिंक).
हालांकि वायरल वीडियो कई महीने पहले कराची में हुए एक अलग प्रदर्शन का है, इन हालिया झड़पों का नहीं.
वायरल वीडियो के कीफ़्रेम को गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर 3 मार्च को यूट्यूब पर पोस्ट किया गया इसका लंबा संस्करण मिला. वीडियो के कैप्शन में इसे पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में अमेरिकी दूतावास (US Consulate) पर हुए हमले का बताया गया है (आर्काइव्ड लिंक).
वीडियो के 1 मिनट 41 सेकंड पर दिखाई देने वाली इमारत भी कराची की एक प्रमुख सड़क पर मौजूद उस इमारत से मेल खाती है, जो गूगल मैप्स स्ट्रीट व्यू में दिखाई देती है (आर्काइव्ड लिंक).
फ़रवरी 28 को अमेरिकी-इज़रायली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत के बाद 1 मार्च को पूरे पाकिस्तान में जमकर विरोध प्रदर्शन हुए जिसमे कम से कम 17 लोग मारे गए थे.
AFP के एक पत्रकार ने बताया कि सैकड़ों ईरान समर्थक प्रदर्शनकारियों ने कराची स्थित अमेरिकी दूतावास में घुसने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं (आर्काइव्ड लिंक).
वीडियो में मौजूद कई दृश्य संकेत -- जैसे पुलिस वैन पर लिखा "Frere Police Station" और ट्रैफ़िक साइन बोर्ड पर कराची के इलाकों "लालाज़ार" और "शेरशाह" के नाम -- साफ़ तौर पर दिखाते हैं कि वीडियो कराची में फ़िल्माया गया था, न कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में.
AFP ने भी उस दिन की एक तस्वीर प्रकाशित की थी, जिसमें वही ट्रैफ़िक साइन दिखाई देता है. तस्वीर के कैप्शन में लिखा था, "1 मार्च 2026 को कराची स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिकी-इज़रायली हमलों में मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बल आंसू गैस छोड़ते हुए."
एएफ़पी इससे पहले भी JAAC विरोध प्रदर्शनों से जुड़े अन्य भ्रामक दावों को फ़ैक्ट चेक कर चुका है.
कॉपीराइट © एएफ़पी 2017-2026. इस कंटेंट के किसी भी तरह के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए सब्सक्रिप्शन की ज़रूरत पड़ेगी. अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.