कश्मीर पर अरुंधति रॉय के सालों पुराने बयान को कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन से जोड़कर शेयर किया गया

जुलाई 2026 में पैरोडी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध-प्रदर्शन में मशहूर लेखिका अरुंधति रॉय भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मिलीं. इसके बाद ही उनका एक पुराना वीडियो शेयर कर दावा किया गया कि CJP के मंच से उन्होंने कहा "कश्मीर भारत का अभिन्न अंग नहीं है". हालांकि, असल वीडियो 2010 में आयोजित एक सम्मेलन का है, जब उन्होंने कश्मीर पर भारत के शासन के अधिकार पर सवाल उठाया था. साथ ही रॉय ने CJP के विरोध-प्रदर्शन के दौरान ऐसा कोई बयान देने से इनकार किया है.

सोशल मीडिया साइट X पर 5 जुलाई, 2026 को शेयर किए गए एक पोस्ट का कैप्शन है, "कॉकरॉच आंदोलन मंच से अरूंधती रॉय का एलान है कि 'कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है' और बाकायदा सारे कॉकरॉच इस बात पर ताली पीट रहे हैं."

क्लिप में एक पोडियम से बोलती हुई रॉय कहती हैं कि कैसे जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा था कि क्या कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, उन्होंने कहा "वह कभी नहीं था".

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गलत दावे से शेयर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट जिस पर AFP द्वारा X साइन जोड़ा गया है

यह वीडियो तब वायरल हुआ जब नई दिल्ली में सैकड़ों छात्र CJP के बैनर तले एकजुट होकर शिक्षा व्यवस्था में बार-बार हो रही कथित नाकामियों के जवाबदेही के रूप में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर कर रहे हैं (आर्काइव्ड लिंक).

CJP समर्थक 20 जून से ही विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के कई सदस्य क्लाइमेट एक्टिविस्ट व शिक्षक सोनम वांगचुक के साथ मिलकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं (आर्काइव्ड लिंक).

भारत की सबसे मशहूर लेखिकाओं में से एक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की आलोचक, रॉय ने 4 जुलाई को प्रदर्शनकारियों से मिलकर अपना समर्थन जताया (आर्काइव्ड लिंक).

वह मुस्लिम-बहुल कश्मीर में भारत की मौजूदगी की भी मुखर आलोचक रही हैं (आर्काइव्ड लिंक).

फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड्स और X पर इसी तरह के दावों के साथ ये वीडियो शेयर किया गया पर असल में ये 2010 में फ़िल्माया गया था और CJP के विरोध-प्रदर्शन से इसका कोई संबंध नहीं है.

2010 का कॉन्फ़्रेंस

क्लिप के कीफ़्रेम्स को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर एक लंबा वीडियो मिला, जिसे 30 अक्टूबर, 2010 को यूट्यूब पर पब्लिश किया गया था (आर्काइव्ड लिंक).

वीडियो का टाइटल था, "नई दिल्ली में 21 अक्टूबर को 'आज़ादी - द ओनली वे अहेड' कॉन्फ़्रेंस में अरुंधति रॉय."

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गलत दावे से शेयर किए गए वीडियो (बाएं) और अक्टूबर 2010 के यूट्यूब वीडियो के स्क्रीनशॉट की तुलना

रॉय ने भाषण में कहा कि कश्मीर "कभी भी भारत का अभिन्न अंग नहीं रहा" (आर्काइव्ड लिंक).

लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता ने तब कट्टरपंथी कश्मीरी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के साथ मंच साझा किया था और कश्मीर के लिए "आज़ादी" के विचार का समर्थन किया था.

आगे कीवर्ड सर्च करने पर 18 जून, 2024 की एक न्यूज़ रिपोर्ट मिली, जिसमें भारत सरकार ने बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका के बयानों के लिए उन पर मुकदमा चलाने की मंज़ूरी दी थी (आर्काइव्ड लिंक).

संपर्क करने पर रॉय ने 8 जुलाई को AFP को बताया कि वह विरोध प्रदर्शन में शामिल तो हुई थीं, लेकिन उन्होंने कोई भाषण नहीं दिया था.

"मैंने CJP में भाषण नहीं दिया. मैं बस वहां गई और लोगों से मिली-जुली. यह वही पुराना वीडियो है," रॉय ने कहा.

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने 9 जुलाई को AFP को बताया कि विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर रॉय ने ऐसा कोई भाषण नहीं दिया था और अन्य वक्ताओं का भी मुख्या एजेंडा सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में सुधार से जुड़ा है.

AFP ने पहले भी CJP से जुड़े दूसरे कई गलत दावों को फ़ैक्ट चेक किया है.

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